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भारतीय रेल – कविता

भारत की हर बात निराली है, सुहानी है,
हर चीज़ की यहाँ अपनी एक कहानी है|
कहानियो की बात हम करे,
तो रेल सबकी रानी है|
कभी तीन दिन का लम्बा सफर,
तो कभी रोज़ का अपडाउन,
यहाँ हर किसी का अलग किस्सा है,
रेल हमारे जीवन का अहम् हिस्सा है|
पैसेंजर ट्रैन में बना रिश्ता सबसे प्यारा होता है,
चलती ट्रैन को पकड़ने का आनंद न्यारा होता है|
छोटे बच्चे का वो खिड़की की पटिया पर बैठना,
बड़ा खूबसूरत नज़ारा होता है|
हर ट्रैन की बात अलग है, बोली अलग है,
सचखंड की पंजाबी, पवन की बिहारी,
नवजीवन की गुजराती, कर्नाटक की तेलगु,
सब की अपनी दास्ताँ है|
पर एक बात सबकी समान है,

भारत की रेल, भारत की पहचान है|

– N R Varma

2 thoughts on “भारतीय रेल – कविता”

  1. कभी चलती, कभी रूकती,
    रंग – बिरंगे तस्वीर दिखाती हू
    झरना, पहाड़, हरियाली खेतो से गुजरती हू,
    सफर का आनंद दिलाती हू, आगे बढ़ते जाती हू।

    credit:-fusebulbs.com

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