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चाय पे चर्चा, रेल्वेकी।

दुनिया मे यूनिक याने एकमेव है, ऐसे कई स्मारकों या इमारतों को लेकर, आपने सुना होगा, लेकिन टेस्ट याने स्वाद में, सारी जगह एक जैसा होना यह केवल भारत में मुमकिन है, और वो है रेल में बिकने वाली चाय।

चाय, चाहे रेलवे के बड़ी कैंटीन की हो या छोटेसे स्टेशनपर के टी स्टॉल की या के हमारे गाडियोंके पेन्ट्री की हो, लिख लीजिए, बिलकुल एकसा स्वाद वहीं पतली, पानीदार, कम शक्कर वाली पारदर्शी चाय।

भाईसाब, गाड़ी में कभी आपने चाय वाले की “चाय ए चाय” आवाज़ सुनी है? अपने देश के बड़े बड़े रुतबेदार, रसूखदार नामोपे चलने वाली, चौधरी, महाजन, ठाकुर इन के नामोंसे, गाड़ियोंमें चाय बिकती है, और हमारा दावा है, यदि आपने ये चाय, पुरा कप, बिना मुँह बिगाड़े पी ली तो आप दुनिया के सबसे महान व्यक्ति हो और आपको फौरन ही, सबसे बड़े सहिष्णुता का नॅशनल अवार्ड देना चाहिए।

चूँकि आजकल हमारे देश मे बहोतसे लोग हम भारतिय, असहिष्णु होने का नगाड़ा पीटते रहते है, यदि वह भी ये चाय चख ले तो असहिष्णु शब्द ही भूल जाएंगे।

इस चायपुराण मे आपने अभी अनाधिकृत प्राइवेट चाय वालोंकी कर्ममहिमा का बखान तो सुना ही नही। ये लोग जो चाय पिलाते है, उसकी रेसिपी तो इस भूलोक की हो ही नही सकती। हमने सुना है, इनकी चाय, बिना शक्कर, बिना दुध और यहाँतक के बिना पत्ती की रहती है। चाय के लिए, पानी भी रेल के डिब्बे में के बेसिन से लिया जाता है। आप चौक तो नही गए? भाई, चौकना क्या सदमा भी लाज़मी है।

जब पत्ती के जगह केमिकल वाला कलर, शक्कर की जगह सैक्रीन, दूध की जगह वाइटनर और आपकी कुछ ज्यादा ही खुशनसीबी हो तो, इलायची वाला एसेंस। वाह ! क्या कहने। पटरी के पास ही कहींसे यह सब अमृत, गर्म करके, किटली या थरमासोंमें भरकर 10 रुपैय्या कप से धड़ाधड़ बिक जाता है।

क्यों भाई, पढ़के हालत पतली हो गई न?
आखिर ऐसी चाय, चना, भेल, समोसे, कचौरी बिकती कैसे है रेल में? अनाधिकृत विक्रेता किस के दम पर चलती गाड़ियोंमे अपना धंदा चलाते है? यह समझने के लिए कोई बहोत बडी तहकीकात करने की जरूरत नही है। लेकिन सबसे बड़ी गलती हमारी, हम ग्राहकोंकी है, जब तक हम इन लोगोंसे सामान खरीदते रहेंगे, तब तक यह चीजें धड़ल्ले से बिकती रहेगी।

माना, दो दो दिन गाड़ियोंमे गुजारने वाले यात्री की मजबूरी हो जाती है की वह चाय, नाश्ता गाड़ीमे खरीदते है। लेकिन हम आपसे आग्रह करते है, आप कोशिश करें, जो भी खरीदना है, अधिकृत वेंडर से ही खरीदे। रेट लिस्ट के हिसाब से ही पैसा दे और सामान में जो भी कमी मिले तो उसकी शिकायत भी जरूर करे।

रेलवे प्रशासन, यात्री की हर व्यवस्था सुचारू हो इसके लिए जी तोड़ कोशिश करती है। आजकल, 24 घंटे रेलवे की ट्वीटर सेवा पर, यात्री की हर, छोटी से छोटी शिकायत की भी सुनवाई और कारवाई तुरंत हो रही है। DRM स्तर के अधिकारी आपको तुरंत जवाब दे रहे है। @railwaysewa के ट्वीटर पर आप, आपको जो भी तकलीफ हो रही है, दर्ज कराते ही, रेलवे के अधिकारी गण, सम्बन्धित विभाग को आपकी शिकायत टैग करते है और जब तक समाधान न हो तब तक आपसे लगातार सम्पर्क में रहते है।

रही चाय पर हमारी चर्चा, वह तो जारी रहेगी। धन्यवाद।

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