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राजधानी एक्सप्रेस में एक दिन, पार्ट-2

अब तक आपने पढ़ा, राजधानी एक्सप्रेस अपने स्टाफ और यात्रिओंके साथ नासिक तक पहुंची। अब आगे….

[ राजधानी एक्सप्रेस में एक दिन पार्ट-1 – https://wp.me/pajx4R-9g ]

18.55 नासिक 29 अप्रेल

मुम्बई नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस थोडीही देर में प्लेटफार्म नम्बर दो से चलने को तैयार है। अनाउंस हो रही थी।
“काकड़े साहेबांचा विजय असो” नारेबाज A1 तक पोहोंच गए, उनके काकड़े साहब A1 के दरवाजे में खड़े रहकर पब्लिक का अभिवादन करने लगे। इधर फ़िल्म हीरोइन माला और उसकी सेक्रेटरी भौचकसी, भीड़ को देख रही थी। उनको यकीन नही आ रहा था की उनके अलावा कोई कैसे इतना लोकप्रिय हो सकता है?
“सारा सामान B3 में चढ़ गया न? अब गाड़ी चलने पर शिफ्ट कर लेंगे। वो ब्लैक वाली ब्रीफकेस सम्भालना” अग्रवाल ग्रुप के लीडर में से कोई बोल रहा था। विक्की को टारगेट समझ मे आ गया था, अब उसकी आँखें जैसे अर्जुन को सिर्फ मछली दिख रही थी वैसे ही काली ब्रीफकेस पर गड़ी थी। वो भी B3 में लपक लीया था।

20.15 पासिंग चालीसगांव 29 अप्रेल

” सर डिनर इज रेडी, सुप लगा दु क्या?” बद्रीप्रसाद H1 और H2 के यात्रिओंको वेंडर को साथ लिए डिनर सर्व करने लगा था। C कूपे के यात्री की आर्डर उसे याद थी, इसलिए उसने उसका डिनर हॉट केस में रखवा दिया, C कूपे वाले ने रात 9 बजे डिनर सर्व करने का आर्डर दिया था। H2 का A कैबिन भोपाल तक तो चेकिंग स्टाफ़ के कब्जे में था। बद्रीप्रसाद अपना टिफिन साथ लाता था, शुद्ध शाकाहारी ब्राम्हण जो था, उसे पेन्ट्री का चाय तक नही जमती थी। वो गजानन जोशी को भ्रष्ट बम्मन कह छेड़ता था, हालाँकि उसे पता था गजा जोशी भी उसके जितना ही कर्मठ ब्राम्हण है। रोजीरोटी के लिए पेन्ट्री में काम करना पड़ता था, वेज नॉनवेज सब उसके निगरानी में ही तो लेना देना होता था।

CTI तिवारीजी A1 के बर्थ चेक करने नासिक के सांसद काकड़े के पास पहुंचे, उनको देखते ही माला बोली,” यहाँ शोर नही चलेगा, बोल देना नेताजी को।”
“मैडम, आप उन नेताजी को नही जानती न? आप को पता ही नही की काकड़े साहब आपके कितने बड़े पुराने फैन है। उनको जब पता चलेगा की आप उनके साथ, उनके सामने वाली बर्थ पर है तो आज वो पूरे स्टाफ को ट्रीट दे देंगे।” तिवारी जी ने तुक्का मारा।
इधर नेताजी, दरवाजे के कॉरिडोर में, अपने भक्तों के साथ, पहले से ही सात में से छठवे आसमान तक पहुंच गए थे और बचा खुचा कोटा अपनी जेब से निकाल कर झटपट पूरा करने की कोशिश में लगे थे।
जब तिवारीजी उनके पास पहुंचे तो उन्हें भी अपना स्टील फ्लास्क बताकर, भंवे उठकर पीने के इन्वाइट किया। तिवारीजी ने कहा, “नो, थैंक्स। ड्यूटी पर हूँ।
वैसे मंत्रीजी, आज आपके सामने वाली बर्थ पर आपकी कट्टर समर्थक बैठी है, आपको अपने देश का 1 नम्बर और सबसे लायक नेता मानती है। मेरे से झगड़ पड़ी, बोल रही थी काकड़े साब तो मंत्री नहीं प्रधानमंत्री होने चाहिए और उसके लिए आज उसने मौन रखा है। बोलती है कल दिल्ली में चमत्कार होगा।”
काकड़े साहब तो पहले ही झूम रहे थे, यह सुन कर तो गदगद हो गए। वैसे ही तिवारीजी के मुँह से मंत्रीजी का सम्बोधन सुन कर उनकी तबियत हरी हो गई थी।
“मास्टर, पहले मंत्री तो बनने दो, आगे देखते है क्या होगा और उसका मौन है तो हमारा भी सबका मौन रहेगा, सुना क्या कार्यकर्ताओ, ध्यान रहे कोई हल्लागुल्ला, शोरशराबा नही पाहिजे मला। शांत रहा, लोकांच्या प्रार्थना देवपर्यंत पोहचु द्या। आपल्याला गरज आहे बा त्याची।”
दोनोंके ईगो को ऊपर की हवा देके तिवारीजी का काम बन गया।

माइकल डिकोस्टा ने अग्रवाल ग्रुप को समझाया, सबसे पहले आप लोग अपने अपने जगहोपर बैठ जाओ। अपने टिकट और लिस्ट मेरे पास देदो, मैं चेक कर लूंगा। विक्की बीचमे कूद पड़ा,” मैं भी यही तो कह रहा हूँ इनको, लाओ अग्रवालजी, मेरे पास दे दो टिकटे, आप समान सेट करो, TTE साब का हिसाब मैं जमा दूँगा।” ” हाँ, बेटे प्लीज। आप बहोत मदत कर रहे हो, नहीं तो आजकल कौन किसके लिए इतना करता है? आपने हमारा सामान भी चढ़वाया, बड़े बुढोंको गाड़ी में अच्छेसे बिठवाया” एक सीनियर अग्रवाल बोला।

AC फर्स्ट के डिनर में रबड़ी यह डेजर्ट था। आज फूड कॉन्ट्रक्टर ने बोला ही था AC फर्स्ट वालोंके लिए अलग से पैकिंग है। सब रबड़ी मजेसे खा रहे थे सिवाय C कूपे, बद्रीप्रसाद और बाकी स्टाफ़ के।

21.20 जलगाँव 29 अप्रेल

भुसावल से आए, लोको पायलट और गार्ड ने अब राजधानी का चार्ज ले लिया था। अब यहाँसे 5 घंटे, लगभग 400 km तक गाड़ी का कोई स्टॉपेज नही था। सीधे भोपाल ही रुकना था। सब यात्री सोने की तैयारी में लग गए थे। डिनर की फाईबरवाली खाली प्लेटे वापस पेन्ट्री में जमा की जा रही थी।

21.55 पासिंग भुसावल 29 अप्रेल

मध्य रेलवे का सबसे बड़ा और महत्वका जंक्शन स्टेशन भुसावल। यह एकमेव गाड़ी है जो भुसावल में नही रुकती। गाड़ी थोड़ी स्लो जरूर हुई लेकिन रुकी नहीं।
के विठ्ठल, माइकल, पवार साब, तिवारीजी, बड़े मिया खान साहब सारे चेकिंग स्टाफ़ खाना खाने H2 के A कैबिन में आ गए। गजानन ने 6 थाली भिजवा दी थी और वह खुद H1 के अटेन्डेंट कैब में डिब्बा लेके बद्री का इंतजार कर रहा था। इधर बद्रीने H2 में सभी साहब लोगोंको खाना पकड़वाया और C कूपे वाले को आवाज दी। तभी खान साहब के वॉकी से आवाजें आने लगी, इमरजेंसी, ट्रेन के TS फौरन H1 में आए, इधर पेन्ट्री से भी कॉल था और B6 से भी अलर्ट की सूचना थी। माज़िद खान तुरंत उठे और H1 की तरफ दौड़े, पीछे सभी चेकिंग स्टाफ़ भी केबिन से निकल कोई पेन्ट्री और कोई B6 के तरफ निकले।

13.00 नई दिल्ली 30 अप्रेल

रेलवे बोर्ड, कमरा नम्बर 601
TS माजिद खान, CTI तिवारी, पेन्ट्री मैनेजर गजानन जोशी, अटेन्डेंट बद्रीप्रसाद सारे कॉरिडोर में बैचेनसे खड़े है। 10.45 को राजधानी एक्सप्रेस दिल्ली पहुँची और इन चारोंको जो मेमो मिला था उस हिसाब से तुरंत रेलवे बोर्ड में जबाब हेतु तलब किया गया था। अभी अभी हाथमे एक लेटर पकड़ाया गया था, जिसमे सभी को डिपार्टमेंटल इंक्वायरी के लिए 8 मई को मुंबई मुख्यालय में हाजिर रहने को बोला गया था। नासिक फूड कॉन्ट्रक्टर भुसे का कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रूपसे रदद् किया गया था। कन्डक्टर पवार की डीप इंक्वायरी के आदेश थे। क्षेत्रीय सुरक्षा आयुक्त जो H2 के A कैबिन के VIP यात्री थे, इंक्वायरी में शामिल होने वाले थे।

12.00 मुम्बई 1 मई

पैरेडाइज होटल, कमरा नम्बर 306 “जानेमन, दुबई की टिकट आज शाम की ही है न? कमसे कम दो महीने उधरीच रहना पड़ेंगा, कैश में काम हो जाएगा। सारे गहने उधर निपटा देंगे” माला बनाम आशा अपने ब्वायफ्रेंड विक्की से बात कर रही थी। नासिक में काली ब्रीफकेस में कमसे कम 65 लाख के गहने और 50 लाख कैश उसके हाथ लगा था। इसके अलावा कल की ट्रिप से और भी छोटा बड़ा कलेक्शन जमा हो गया था।

नासिक से जलगाँव के बीच अग्रवाल मैरेज पार्टी का सामान B3 से B6 में शिफ्ट करते हुए ब्रीफकेस कब A1 में माला बनी आशा के पास पहुंचा किसी को समझा ही नही।

चालीसगांव पास हो रहा था तब डिनर सर्व होना शुरू हुवा और जलगाँव से ट्रेन छूटने के बाद जिन जिन लोगोने रबड़ी खाई थी उनकी सबकी हालत उल्टियाँ कर कर के खराब हो गई थी।

रात 11 बजे, खांडवा स्टेशन पर राजधानी को 15 मिनिट रोका गया। सीरियस यात्रिओंको खण्डवा में दवाखाने शिफ्ट किया गया। एक मेडिकल टीम ने इटारसी तक कई सारे पेशंट की जांच की, दवांए, सलाइन दी गई।

इन सब हडबड़ी में विक्की, माला याने आशा और उसकी सेक्रेटरी बनी उनकी सहेली रिंकी तीनो खण्डवा उतर के मुम्बई लौटती गाड़ी में बैठ गए थे।

उनका खबरी, बंगाली बाबू दिल्लीसे फ्लाइट से आज ही लौट कर आया था। C कूपे वाले कपल राजा और मीना जो कल्याण से चढ़े थे वो भी कल तक उसी राजधानी से पैरेडाइज होटल पहुंचने वाले थे। रबड़ी में केमिकल मिलने का काम उनके जिम्मे था। डु नॉट डिस्टर्ब का टैग लगाके, राजा बीच बीच मे कई चक्कर पेन्ट्री और AC फर्स्ट के लगा रहा था।

AC मैकेनिक अब्बास ने अपने कॉन्ट्रक्टर से बोल दिया था की आगेसे वो सिर्फ साउथ साइड ही जाएगा, उसे दिल्ली रूट पर ना भेजे क्योंकी उसकी पहली बीबी जिसे उसने तलाक दे दिया था, भोपाल की थी और उसके फैमिली से उसे मारपीट होने का डर लगता है।

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