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रॉयल टिकट

भारतीय रेल में सबसे रॉयल टिकट कौनसा है? यहाँ रॉयल का मतलब इतना सुविधाजनक की आप आसानीसे, अपनी मर्जीसे यात्रा कर सको।

अब आप सोचेंगे यह क्या पूछने की बात है, वैसे तो विदेशी पर्यटकों को इंड रेल पास मिलता है, लेकिन केवल विदेशी नागरिकों को ही, उनके पासपोर्ट दिखाए जाने पर। इस इंड रेल पास पर वो लोग, पूरे भारतीय रेल के नेटवर्क पर, जिस क्लास का उनका पास है, उस क्लास में, चाहे उस दिशा में, चाहे जिस स्टेशन से, चाहे जिस स्टेशन तक अपने टिकट की निर्धारित अवधी तक घूम सकते है।

लेकिन हम भारतीयों की, अपनी, आम लोगोंकी बात कर रहे है। फिर आप सोचेंगे, AC फर्स्ट का टिकट। तो नही भाई, यह रॉयल टिकट है, सेकंड क्लास मेल एक्सप्रेस का सुपरफास्ट वाला टिकट।

आपको कहीं भी जाना है, अचानक से तय हुआ, रिजर्वेशन का चार्ट निकल गया है और बुकिंग की सारी सम्भावनाए खत्म। तो एक ही काम कर सकते है, जहाँ जाना है वहाँकी एक मेल एक्सप्रेस की टिकट लो और बढ़े चलो। जो गाड़ी आपके गन्तव्य स्टेशन की दिशा में जा रही है, उस गाडीके TTE से सम्पर्क करो और बढ़े चलो।

जहाँ तक जगह उपलब्ध है, जम जाओ। कई बार तो ऐसा होता है की वेटिंग लिस्ट वाला यात्री जिसने पूरा किराया पे किया है मगर उसको बर्थ नहीं मिलता और बाजी मार जाता है, अनारक्षित टिकट वाला बन्दा।

गाड़ी का हर क्लास उसके लिए ओपन चॉइस है। क्या स्लिपर क्लास और क्या AC क्लास। वो TTE को बोल सकता है, कही भी अवेलबल हो दे दीजिए।
TTE भी उसे जहाँ तक खाली है वहाँ तक, या बीचवाले किसी जंक्शन स्टेशन तक बैठा लेता है। जे नहीं जम रहा है, तो चल उतर और दूसरी ट्रेन पकड़। है कि नहीं मन का मालिक और मास्टर गियर वाला काम? जहाँ गाला मिलेगा फिट हो जाना है।

हालाँकि यात्रा तो आपको जनरल सेकंड क्लास में करनी है, क्योंकी आपकी टिकट उस क्लास की है। लेकीन हायर क्लास के सभी ऑप्शन तो खुले है न?
अब आप बोलेंगे, गाड़ी बदल बदल के भी जा सकते है क्या? क्यों नही? आपके पास भुसावल से पूना की टिकट है, मनमाड तक मुम्बई वाली गाड़ी में जा सकते है। मनमाड से दौंड तक और दूसरी गाड़ी में और दौंड से पुना तीसरी गाड़ीमे।

अब यह कब सम्भव है, जव आप सक्षम हो, आपके साथ ज्यादा सामान न हो। यस, बिल्कुल सही, एकजेक्टली हाइवे पर का हिच हाइकिंग वाला पैटर्न। जैसे हाइवे पर लोग ट्रक, जिप्स, बसेस, कार जो भी वाहन मिले, पकड़े और चलते रहे।

यहाँपर आपके पास TTE से अपनी बात रखने का कौशल भी जरूरी है। देखिए TTE के पास कहीं न कहीं, कोई न कोई जगह तो पक्की खाली होती ही है, आप की वाकपटुता वहीँ जी सम्भाषण कौशल्य काम कर जाए और जो भी आवश्यक चार्जेस देने की आपकी तैयारी हो तो आप सही मायने में अपनी मर्जी के राजा हो। इसी लिए हम, सेकेंड क्लास सुपरफास्ट मेल एक्सप्रेस टिकट को रॉयल टिकट कह रहे है।

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