Uncategorised

MST पास धारकों, और छोटी दूरी के यात्रियोंकी तकलीफें

नई सरकार की स्थापना होने जा रही है। हो सकता है की रेल मंत्री भी नए ही आए। आज का लेख इन्ही आनेवाले रेल मंत्री के लिए है। जिनके लिए यात्रिओंकी ओरसे कुछ दरख़्वास्त है।

पूरे भारतीय रेल के नेटवर्क में सिंगल लाइन सेक्शन को डबल लाइन और डबल लाइन सेक्शन को ट्रिपल लाइन सेक्शन में बढ़ाने का काम तीव्र गति से शुरू है। जहाँ गाड़ियाँ डीज़ल इंजिनों से चलाई जा रही है, वहाँ पर विद्युतीकरण का काम भी तेजी से हो रहा है। रेल प्रशासन गाड़ियोंकी गति बढानेसे और कितनी गाड़ियाँ सेक्शन में बढ़ाई जा सकती है, या सिग्नलिंग सिस्टम में नई तकनीक लाकर कुछ गाड़ियोंके संख्या में इज़ाफ़ा हो सकता है इस पर लगातार काम कर रही है।

बहोत ज्यादा टेक्निकल बातें यहाँपर नहीं हो सकती पर इतना निश्चित है, यदि रेल प्रशासन ने डेली अपडाउन के यात्री की ओर ख्याल नही दिया तो, आने वाले दिनोंमें डेली अपडाउन करनेवाले, कम अंतर की यात्रा करनेवाले यात्री और लम्बी दूरी की यात्रा करनेवाले यात्रिओंको बीच हर रोज टकराव वाली स्थितीयाँ रहनेवाली है।

दरअसल होता यूँ है की जहाँ पर EMU ट्रेन नहीं चलती उन सेक्शनोंमें, ऊपरोक्त सभी अपडाउन वाले MST पास धारक यात्री, शार्ट डिस्टेन्स के यात्री सीधे लम्बी दूरियोंके गाड़ियोंमे चढ़ जाते है और अपना सफर करते है, जो उनको भी काफी तकलिफदायीं होता है। गाड़ियोंमे जो यात्री लम्बी यात्रा वाले होते है, वे उनको बैठने की जगह नही देते या एडजस्ट करनेसे मना करते है। उनकी भी अपनी तकलीफें है, हर स्टेशनसे 1-2 स्टेशनोंके लिए यात्री चढ़ते ही रहते है। वो लोग कहांतक और क्यों एडजस्ट करे?

जब दोनोंही तरह के यात्री एकदूसरे से तकलीफ पा रहे है, नाराज़ हो रहे है, आपस मे झगड़े कर रहे है तो इस प्रसंगपर रेल प्रशासन को सोचना चाहिए की कुछ बुनियादी तौर पर सुधार करने की जरूरत है।

यह सुधार इस प्रकार हो सकते है। सबसे पहले सेक्शन में जितनी भी लम्बी दूरी की सवारी गाड़ियाँ चलती है, जिनका ओवरऑल रन 300 km से ज्यादा है उन्हें, दिन की यात्रावाली है तो इंटरसिटी एक्सप्रेस और रात की यात्रा वाली है तो मेल एक्सप्रेस की श्रेणी में तब्दील करें।

इंटरसिटी और मेल एक्सप्रेस के बेसिक फर्क यह रहता है की इंटरसिटी में केवल ज्यादा क्षमता वाली सिटिंग चेयर कार डिब्बे होते है तो मेल एक्सप्रेस में यात्री सो पाए ऐसे सेकंड क्लास जनरल, स्लिपर क्लास और जरूरत हो तो वातानुकूलित डिब्बे लगाए जाते है।

अब दूसरा सुधार ये हो, जब यह सवारी गाड़ियोंमे युक्तिसंगत तरीकेसे तब्दीलियाँ हो जाती है तो सुबह 6 बजे से लेकर रात 22 बजे तक EMU / MEMU ट्रेन्स जो केवल शार्ट डिस्टेन्स यात्रिओंके लिए हो, शुरू की जानी चाहिए। जरूरत के हिसाब से इनकी बारम्बारता तय की जा सकती है। ऐसा जब हो जाए तो यह लोग कदापि लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे सफर नहीं करेंगे या रेल प्रशासन भी MST पास वालोंको लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे सफर करना बंद करा सकती है।

आज जब बहोत सारी बुनियादी सुविधाएं जैसे नई तीसरी, चौथी लाइने, ज्यादा प्लेटफॉर्म्स, यात्रिओंका प्लेटफॉर्म्स से जल्द निकास हो इसलिए एस्क्लेटर्स जब यात्रिओंको उपलब्ध कराई जा रही है, तब हम इस तरह की अलग अलग गाड़ियोंके बारेमे सोच सकते है।
इससे रोजाना अपडाउन करने वाले और सभी शार्ट डिस्टेन्स ट्रैवेलर्स भी ख़ुश और लम्बी दूरी के यात्री भी खुश।

इस योजना का एक फायदा यह भी हो सकता है, लम्बी दूरीकी गाड़ियोंके छोटे छोटे अंतर पर पड़ने वाले स्टोपेजेस भी रद्द कर उनकी गति बढाना और यात्रा की अवधी में सुधार लाया जा सकता है।

2 thoughts on “MST पास धारकों, और छोटी दूरी के यात्रियोंकी तकलीफें”

  1. That’s good think about deadly up&downer. .
    Also short distance travelling passenger…
    Government should have think about it…
    Thanking you

    Like

    1. Thanks. It sounds good that short distance travellers unite and move their appeal to the upstairs. Up to the ministry, we are giving just words on their problems and becoming a path.

      Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s