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धन, वह भी काला

भारतीय रेल यह भारत सरकार के स्वामित्व वाली सरकारी संस्था है और भारत के अर्थव्यवस्था में बड़ा महत्व रखती है। दुनिया की आठवीं और भारत की सबसे बड़ी रोजगार देनेवाली इस संस्था में करीबन 14 लाख कर्मचारी काम करते है। भारतीय रेलवे का वर्ष 2019-20 का बजट ₹2,72,706 करोड़ का था। इसके मायने आप समझ सकते है की भारत की अर्थव्यवस्था में भारतीय रेलवे का क्या वजूद है।इस तरह की संस्था, जब कोई बुनियादी परिवर्तन करती है तो देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी हलचल पैदा हो जाती है और आज हम आपको ऐसे ही एक परिवर्तन लाने की बात बताते है। इसे आपको गम्भीरतासे समझना होगा।

रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, यह रेलवे में आने वाले धन का बड़ा स्रोत, अ वेरी बिग सोर्स है। जबसे e टिकट की कमान IRCTC इस भारतीय रेलवे के वेब पोर्टल ने संभाली है तबसे मैन्युअल टिकट बुकिंग में बड़ी कमी आई है। फिरभी कई सारे लोग आजभी कैश व्यवहार करके मैन्यूअल टिकट, रिजर्वेशन काउंटर्स से खरीदते है।

कौन होते है यह लोग? वह जिनके पास कम्प्यूटर, मोबाईल, इंटरनेट नहीं है? या वह जिनको e टिकट निकालना नही आता? ऐसे लोग मुश्किल से 15 से 20% होंगे तो फिर कौन निकालता है ऐसे काउंटर वाले, प्रिंटेड टिकट?

यह सब जानने के पहले आपको इसी प्रणाली, सिस्टम का दूसरा पहलु दिखाते है। रेलवे में, काउंटर पर रिजर्वेशन करने के लिए कैश का इस्तेमाल किया जाता है, जो हो सकता है की ब्लैक मनी याने बिना हिसाबी धन हो, जिसका कही रिकॉर्ड नही होता और फण्ड मोबिलाइजेशन बड़ा आसान होता है।

समझिए किसीने त्रिवेंद्रम से चंडीगढ़ के लिए AC फर्स्ट के 8 यात्रिओंके टिकट बुक किए, उसे लगे 6650×8=53200 रुपए, अब वह टिकट वह किसीको पैसे ट्रांसफर करने हेतु देता है और वह टिकट को जाके अपनी सुविधानुसार कैंसिल करता है। कैंसलेशन चार्ज लगेगा फ्लैट ₹ 60/- प्रति व्यक्ति याने 60×8=480/- याने रुपए 480 में फण्ड एक चेक की तरह मोबिलाइज हो गया और कोई रिकॉर्ड नही। यह तो उदाहरण है इसलिए आपको समझाने हेतु हमने बड़ी रकम का व्यवहार लिया इस तरह कई सारे छोटे छोटे व्यवहार करके फण्ड मोबिलाइज होता है।

अब इसपे नकैल कैसे कसी जा सकती है, तो काउंटर पर प्रिंटेड टिकट पूर्ण तरीकेसे बन्द करके। काउंटर पर जब टिकट खरीदते है तब एक आरक्षण फॉर्म भरना होता है। फॉर्म में मोबाइल एवम पैन कार्ड लिखना कम्पलसरी कर के टिकट जो है उसे केवल e- टिकट स्वरूप में ही दिया जाना चाहिए। जो फॉर्म में मोबाइल नम्बर दिया जाएगा, उस पर ही टिकट का मैसेज आएगा और जो पैन नम्बर लिखा रहेगा वो उस पेमेंट का देनदार है ऐसा माना जाएगा। टिकट खरीदते वक्त भलेही कैश व्यवहार हो, लेकिन टिकट का यदि कोई रिफण्ड लेता है तो पैन नम्बर से जुड़े अकाउंट में रिफंड अपने आप जमा किया जाएगा। यहाँ फण्ड मोबिलाइजेशन की सिस्टम समाप्त और रकम पूरी अकाउंट में दिखेगी।

इस व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा यह होगा की काउंटर टिकट के वेटिंग लिस्ट टिकट चार्ट बनते ही अपने आप कैंसिल हो जाएंगे और जो वेटिंग टिकट वाले यात्री जबरदस्ती आरक्षित डब्बोंमे घुसे रहते है वो भी बन्द हो जाएंगे, यदि फिर भी चढ़े तो बिना टिकट चार्ज किए जाएंगे। यह भारतीय रेलमे रिजर्वेशन सिस्टम सुचारू रूपसे चलाने के लिए बेहद जरूरी है।

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2 thoughts on “धन, वह भी काला”

  1. Foe this, Online ticket booking will be always best.
    So that it can be stopped as it is recorded by both the end.
    For those who are not having access of this, can go to nearest place for online ticket booking.
    And if anyone is cancelling the ticket he has to get proper acknowledgement as said in article (i.e. mobile mumber and PAN details)
    It can reduce the black money management upto certain extent.

    Like

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