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डिजिटलाइज्ड हो वेंडर्स।

आज ही रेल मंत्री के दफ्तर से एक ट्वीट जारी किया गया है। भारतीय रेलवे ने डिजिटल राह चुनी है। अब सेंट्रल रेलवे के, मुम्बई एरिया के 5 स्टेशनोंपर के कुली, लगेज पोर्टर्स के गले मे QR कोड वाला कार्ड रहेगा जिससे यात्री अपने मोबाइल के जरिए स्कैन करके उनकी सत्यता प्रमाणित कर पाएंगे।

बेहतर है, अच्छा है। कोई भी सुविधा डिजिटलाइज होती है तो उसकी सत्यापितता बढ़ जाती है। एक कोड स्कैन करके, सम्बन्धित व्यक्ति का नाम, बिल्ला नम्बर आदी आपके पास रिकॉर्ड हो जाते है। इससे आपके साथ धोखाधड़ी का ख़तरा बिल्कुलही नही रहेगा।

लेकिन प्रश्न यह उपस्थित होता है, आखिर क्यों जरूरत पड़ती है, यात्रिओंको सच और झूठ जानने की? क्या यह प्रशासन का काम नही है, की जो भी प्लेटफार्म पर व्यवसाय कर रहा है वो प्रमाणित ही हो?प्लेटफॉर्म्स पर हर जगह cctv कैमरे लगे है, कितने सारे टिकट चेकिंग स्टाफ, रेल सुरक्षा बल के जवान, GRP के सिपाही चौबीसों घंटे निगरानी चलते रहती है, फिर कैसे कोई गैरकानूनी रूपसे कुली प्लेटफार्म पर अपना व्यवसाय कर लेता है?

इसके अलावा और भी गोरखधंदे प्लेटफॉर्म्स पर चलते है। गैरकानूनी रूपसे अवैध विक्रेता, बिना मेनू वाली खाद्यसामग्री धड़ल्ले से बेचते है। भीख मांगनेवाले, गाड़ियोंमे झाड़ू मारनेवाले, गाड़ियोंमे अवैध रूपसे कोल्ड्रिंक, नाश्ता यहाँतक की स्टेशनरी, लेडीज ज्वेलरी के विक्रेताओंका भी जाना आना प्लेटफॉर्म्स पर लगा रहता है।

क्या यह सब सीसीटीवी के आँखों से दृश्यमान नही होते है? खास करके प्लेटफॉर्मपर के विक्रेता, यह क्या सामग्री बेचते है, कहाँसे लाते है, कहाँ बनाते है इस पर कोई नियंत्रण दिखाई नही देता। खाद्यसामग्री कब की बनी है, इसका सेलिंग प्राइज, बेचने की कीमत, क्या है, कितने रूपए में कितने वजन की सामग्री मिलेगी इसकी क्या निश्चिती है? सबसे बड़ी बात जो वेंडर, विक्रेता प्लेटफार्म पर अपना व्यवसाय कर रहा है, क्या वह असली लायसन्स धारक ही है या फिर एक ही लायसन्स पर, कितने और बन्दे व्यवसाय कर करे है? कुलियों को प्रमाणित कर दिए है, बाकी लोगोंकी हाज़िरी कब गिनी जाएगी?

लायसन्स धारी वेंडरोंको भी रेल प्रशासन एक ऐसा कार्ड दे जिसमे GPS लगा हो, ताकी उसे ट्रैक किया जा सके और वेंडरोंके मेनेजर के पास, कितने वेंडर उस वक्त प्लेटफॉर्म्स पर व्यवसाय कर रहे है इसकी अद्यतन जानकारी किसी भी समय उपलब्ध रहे। इससे अवैध विक्रेताओं पर नकैल कसी जाएगी। साथ ही यात्रिओंका भी सुरक्षा का सही बन्दोबस्त हो सकेगा।

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