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आज फोटोज देखते है: कुछ पुराने, कुछ नए

यह फोटो 1940 की, लाहौर स्टेशन की है, जब रेलवे सीधे मुम्बईसे पेशावर तक चलती थी। ब्रिटिश राज था और पार्टीशन नही हुवा था।

1920 में कोलकाता से चेन्नई याने तब का कलकत्ता से मद्रास मार्ग के किसी स्टेशन की है। तब आम हिंदुस्तानी यात्री रेलवे के तीसरे दर्जे में यात्रा कर पाते थे।

यह है पुरैच्ची थलाईवार डॉ एम जी आर चैन्नई सेंट्रल स्टेशन। अरे भाई, यह आज का नाम है, तब याने 1870 का मद्रास सेंट्रल स्टेशन। इसके ब्रिटिश वास्तुविद थे जॉन होर्डिंग्ज।

यह है जामरुड रेल्वे स्टेशन, आ हाँ! अब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पेशावर के पास का स्टेशन है।

चलो, आ जाते अपने आज में। एक नई गाड़ी 14817 / 14818 बांद्रा भगत की कोठी एक्सप्रेस वाया भीलड़ी, समदड़ी होकर चलने लगी है।

आज 13147 / 13148 सियालदाह न्यु कूचबिहार सियालदाह उत्तर बंग एक्सप्रेस का बामनहाट स्टेशन तक विस्तार किया गया। उसी की कुछ तस्वीरें और समयसारिणी।

पुराने फोटो : इंडियन हिस्ट्री फोटोज ट्विटर से साभार