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कैसे हो रेल किराया तर्कसंगत

जैसे ही बजट की डेट पास में आने लगती है, रेल किरायोंमे वृद्धि होने की चर्चा भी जोर पकड़ लेती है। किराया वृद्धि की चर्चा बहोत आम है। कई बजट हो गए, लेकिन रेल किराया जस की तस है। आखरी रेल किरायोंमे वृद्धि वर्ष 2014 में की गई थी। यह वृद्धि 14.2% यात्री किरायोंमे और 6.5% माल भाड़े में की गई थी।

इस बजट में रेलवे के आर्थिक, सांख्यिकी विशेषज्ञोंका अनुमान है रेल के यात्री किरायोंमे कमसे कम 5% से 10% की वृद्धि होगी। इसके कई कारण है। विगत वर्षोंमें आपने देखा होगा, महसूस भी किया होगा, रेजो अग्रिम आरक्षण अवधि याने एडवांस रिजर्वेशन पीरियड 120 दिनोंका है, जिसमे एक बेहतरीन सुधार किया जा सकता है। यदिलवे में सुधार, अद्यावतता, आधुनिकीकरण बहोत तेजीसे हो रहा है। स्टेशन बदल रहे है, ट्रेनोंके डिब्बे बदल रहे है। गाड़ियोंकी गति बदल रही है। हर वो साजसज्ज़ा, सुविधाएं रेल्वेमे उपलब्ध हो रही है, जिनकी कल्पना भी यात्रिओंमेंसे किसीने नही की होगी। अभीतक तो यह डेवलपमेंट फेज में था, अब इसके लिए कुछ चुकाने की बारी आ रही है।

गणित भी किरायोंकी वृद्धि की तरफ ही इशारा कर रहा है। रेलवे की हर वर्ष की आय में लगातार कमी आते जा रही है। वर्ष 2019 की अनुमानित आय में
₹.20,000 करोड़ की कमी दिखाई दे रही है। यह आय, वर्ष 2018 की तुलना में 600 करोड़ कम है जबकी खर्च में 4099 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। कैग के रिपोर्टस यह बताते है, रेलवे का वर्ष 2017-18 का परिचालन खर्च अपनी आय के मुकाबले 98.44% है, इसका सीधा मतलब यह है, रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिए साढ़े अठ्यानवे रुपए की लागत आ रही है। जो की गत 10 वर्षोंमें सबसे खराब प्रदर्शन रहा है।

रेलवे के आर्थिक सलाहकार यात्री किरायोंमे वृद्धि तो करना तय है, लेकिन साथ ही इसको तर्कसंगत भी करना चाह रहे है। इसमें फ्लैट सभी वर्गोंमे वृद्धि करने के बजाय विशिष्ट श्रेणी, किलोमीटर अंतर, अलग गाड़ियाँ, अलग स्टेशन, अलगसे सुविधाएं निर्धारित की जा सकती है।

जब तर्कसंगतता की बात की जाती है तब बेसिक किरायोंमे सीधी वृद्धि के बजाए विशिष्ट डिस्टेन्स और क्लास पर निशाना किया जाता है। यहाँ पर हम एक सूचना देना चाह रहे है। जो अग्रिम आरक्षण अवधि याने एडवांस रिजर्वेशन पीरियड 120 दिनोंका है, जिसमे एक बेहतरीन सुधार किया जा सकता है। यदि 120 दिन के अवधि को कम करके 30 दिनों तक ले आना सभी आरक्षण करने वाले यात्रिओंको काफी सुविधाजनक है, लेकिन इससे रेलवे के मुद्राकोष में और निधि उपयोगिता में ( फण्ड कलेक्शन एन्ड यूटिलिटी ) भारी गिरावट आ सकती है। अतः रिजर्वेशन के अवधि को तर्कसंगत करना चाहिए। 120 से लेकर 30 दिनों तकके अग्रिम आरक्षण चार्जेस में उच्चतम अधिमूल्य ( हाई प्रिमियम ) जोड़ना चाहिए, जो अभी के दरोंसे दुगुना बढ़ाने तक की गुंजाइश है। यह एडवांस रिजर्वेशन प्रिमियम सभी वर्गोंके आरक्षण पर जोड़ा जा सकता है। ज्यादा तर आरक्षण की जरूरत 120 पहले, याने 4 माह पूर्व नही रहती, केवल पर्यटक यात्रिओंके ही कार्यक्रम इतने पहले तय हो जाते है और लम्बी यात्रा होने की वजह से, रेलवे के टेलिस्कोपिक फेअर स्किम के तहत इन यात्रिओंको रिजर्वेशन प्रीमियम का ज्यादा बोझ भी नही पड़ेगा। इसका मुख्य फायदा यह होगा की बिना वजह 120 दिन पहले ही आरक्षण करने वाले लोग और टिकटोंका गोरखधंधा करने वाले एजंट भी कम हो जाएंगे।

बाकी रेलवे में बढ़ती सुविधाएं, साफ सफाई और जबाबदेही के चलते आम यात्रिओंको किराया वृद्धि से कोई परेशानी नही होनी चाहिए।