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न रहेगी वेटिंग लिस्ट, न होगा कोई यात्री परेशान – 2

कल, परसों इसी शीर्षक से हमारा आर्टीकल प्रकाशित हुवा था, आज उसी के बारे में बात कर रहे है इसीलिए इसको पार्ट 2 शीर्षक दिया गया है।

मित्रों, कल के आर्टीकल पर हमें बहोत सारी प्रतिक्रियाएँ मिली। किसी ने फ़ेवर किया, पसंद किया। किसी ने और अलग अलग सुझाव दिए, किसी को बुकिंग्स में नो रूम का डर सता रहा था तो कोई बोल रहा था इससे जनरल टिकट लेकर यात्री स्लिपर में ही चलेंगे, परेशानी और बढ़ेगी। लेकिन एक बात सभी को मंजूर थी, स्लिपर क्लास की मौजुदा स्थितियों में सुधार होना जरूरी है।

हमेशा रेल यात्रा करने वाले हमारे मित्र ने कहा, चार्टिंग के पश्चात वेटिंग लिस्ट स्टेटस वाले टिकट पर से कैंसलेशन चार्जेस जीरो कर देने चाहिए, याने उनको फुल रिफण्ड देने होना। उसके पीछे उनका यह लॉजिक था की उससे लोग अपना वेटिंग स्टेटस वाला टिकट रद्द कर के रिफड़ ले लेंगे और जबरन यात्रा नही करेंगे। हो सकता है शायद ऐसा भी सही हो, लेकिन इससे लम्बी वेटिंग लिस्ट पर कोई असर नही होगा बल्कि लोग और उत्साह से चाहे जिस नम्बर का वेटिंग टिकट मिलें लेने में सुस्ती नहीं करेंगे। हमारा जो उद्देश्य है, वेटिंग लिस्ट ही नही रहेंगी तो इसकी रिफण्ड या क्लर्केज याने कैंसलेशन चार्जेस पर चर्चा का कोई विषय नही।

दूसरा, जनरल टिकट लेकर स्लिपर में यात्रा करने वाले यात्री बढ़ेंगे तो इस सिचुएशन में वह यात्री गाड़ी में चल रहे चेकिंग स्टाफ़ से बिना इजाज़त यदि आरक्षित कोचेस में यात्रा करते पाया जाए तो पूर्णतया अनाधिकृत होगा और दण्डित किए जानेका अधिकारी होगा। वैसे भी TTE से इजाज़त तभी मिलेगी जब कोई जगह खाली होगी, क्योंकी TTE कभी किसीको कहीं पर भी एडजस्ट नही करते है और ना ही किसीको किसी दूसरे का बर्थ अलॉट करते है।

अब बात रेवेन्यू लॉस की करते है, वेटिंग लिस्ट बन्द किए जाने पर रेलवे के पास जो 120 दिन पहले से अतिरिक्त धन जमा होता है या इन टिकटोंके कैंसलेशन चार्जेस के जरिए जो 60 – 60 रुपयों का धन इकठठा होता है वह भी बन्द हो जाएंगा। रेवेन्यू, राजस्व का बड़ा नुकसान होगा। एक बड़े फण्ड में कटौती दिखाई देगी। तो इसका इलाज इस प्रकार होगा की जो कन्फ़र्म टिकट 120 दिनोंसे निकाल लिए जाते है उनका कैंसलेशन चार्ज नो रिफण्ड से लेकर 25 % रिफंड तक तय किया जा सकता है।

इसे यूँ देखिए, एडवान्स कन्फर्म्ड टिकटों के कैसलेशन पर तत्काल बुकिंग शरू होने के पहले तक कैंसल करने पर 25 % रिफण्ड, और तत्काल बुकिंग शुरू होने के बाद किसी भी कन्फ़र्म टिकट को कैंसलेशन पर कोई रिफण्ड नही मिलेगा। यह बिल्कुल एअरवेज टिकिटिंग के जैसा ही है, जिसमे कई फ़्लाइट नो रिफण्ड रहती है। इससे बोगस, अनाधिकृत एडवान्स टिकट बुकिंग पर नकैल कसेगी। इसके बाद जो हर क्लासेस में रियायतें रेल प्रशासन के द्वारा प्रदान की गयी है, उन पर भी प्रशासन ने पुनरावलोकन करना चाहिए। चूँकि रेल प्रशासन हर टिकट पर नीचे एक लाइन छापती है ” इस टिकट के किरायोंमे रेलवे आपसे एवरेज में सिर्फ 57 % वसूल रही है” याने कोई यात्री पूरा किराया चुका भी रहा है तो भी रेलवे के किराएके 43% सब्सिडी में वह टिकट उसे मिला है। तो इसका मतलब यही है, आपको अपनी कन्सेशन पॉलिसीज पर रिव्ह्यू करना जरूरी है। एक तरफ प्रशासन कन्सेशन दिए जा रहा है तो दूसरी तरफ रियायत धारकोंको आवाहन करता है, आप अपनी रियायत पूर्ण छोड़ दीजिए या 50% छोड़ दीजिए। याने यात्रियोंकी सदविवेक बुद्धि पर इस विषय को छोड़ दिया जाता है की उसे कितनी रियायत लेनी है। जबकी फुल्ली पेड़ टिकट भी 43% सब्सिडाइज्ड है।

रेल प्रशासन ने कुछ गाड़ियाँ ऐसी चलाई है, जिसमे कोई रियायत नही मिलती। जैसे गरीब रथ एक्सप्रेस और सवारी गाड़ियाँ जो की पहले ही रियायती किरायोंकी गाड़ीयाँ है।अब हमसफ़र एक्सप्रेस बचती है जिसमे यात्री को किरायोंमे कोई रियायत नही है। आनेवाले दिनोंमें नई गाड़ियाँ जो की प्राइवेट पार्टीज चलाएंगी जैसे लखनऊ तेजस और अहमदाबाद तेजस उसमे भी किसी तरह की कोई रियायत नही रहेंगी। और जो भी नई गाड़ियाँ शुरू की जा रही है या तो वह प्राइवेट गाड़ियाँ है या हमसफ़र एक्सप्रेस गाड़ियाँ है। इसका मतलब यात्रिओंने समझना चाहिए की रेल किरायोंपर रियायतोंका कितना बोझ है, प्रशासन उस पर किस तरह गाड़ियोंको प्राइवेट पार्टीज को ओपरेटिंग करवाकर या हमसफ़र एक्सप्रेस शुरू करवा कर निज़ात पाने की कोशिश कर रही है।

यात्रिओंकी अपेक्षाएं भी कुछ कम नही रहती, जरा आप अपने टिकट को देखिए तो, कितने सब्सिडी में आपका टिकट है। आये दिन डिब्बेमे चार्जिंग पॉइंट काम नही कर रहा है इतनी तक शिकायत ट्वीटर के जरिए ठेठ रेल मंत्री को, यात्री कर देते है। हाल ही में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश महोदय की ख़बर पढ़ने में आयी, इन्होंने रेलवे से अपील की है, अपने दरवाजे बड़े करे, ताकी यात्री आसानीसे चढ़ उतर सके। हम सोचते है, यात्रिओंको अनुशाषित होने की जरूरत है। रेलवे ने अपने दरवाजोंपर एंट्री / एग्जिट ऐसी मार्किंग की थी, लेकिन यात्री है की मानते नही।

आज रेलवे जितना किफ़ायती यातायात साधन शायद ही कहीं उपलब्ध होगा। ट्विटर के जरिए जबाबदेही भी बढ़ गयी है। जगह जगह सुरक्षा बल के जवान तैनात रहते है। CCTV लगे है, अब तो गाड़ियोंमे भी लगाए जाने है। रेल्वे अपनी सुविधाओंमें, साफ सुथरे और सुरक्षित होने में नया मापदंड कायम करने जा रही है। और क्या चाहिए, बस यात्री भी सहयोग करें। अनुशासन, स्वच्छता का पालन करे। भारतीय रेल हमारी राष्ट्रीय सम्पत्ति है, आइए इसे राष्ट्र का गौरव बनाए।

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