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क्या होगा, जब ट्रेनें चलेगी 130 की रफ्तारसे।

“आज झाझा से पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन तक 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के लिए स्पीड ट्रायल के दौरान दानापुर स्टेशन से गुजरती स्पेशल ट्रेन।
पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा स्टेशन की दिशा में 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से सफल ट्रायल 09.02.2020 को किया जा चुका है।”

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शनयह ट्वीट है पूर्व मध्य रेलवे का और ख़बर है 9 फरवरी की याने कल की। मित्रों, झाझा से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच की दूरी है 388 km और कमसे कम 12 से 15 स्टेशन ऐसे है जहाँ अमूमन सभी मेल / एक्सप्रेस गाड़ियाँ रुकती है। क्या जानना चाहोगे कौनसे है वह स्टेशन? झाझा, क्युल, मोकामा, बख्तियारपुर, पटना जंक्शन, दानापुर, आरा, बक्सर, दिलदारनगर फिर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

देशभर में सभी प्रमुख रेल मार्गोंपर 130 किलोमीटर प्रति घंटा स्पीड की ट्रायल शुरू हो गयी है। दक्षिण पूर्व और दक्षिण पूर्व मध्य रेल के हावड़ा – बिलासपुर – नागपुर मार्ग पर भी स्पीड ट्रायल की खबर है, पश्चिम रेल के मुम्बई – वडोदरा – रतलाम – दिल्ली मार्ग, उत्तर रेलवे के दिल्ली – आग्रा – झांसी – भोपाल मार्ग पर तो ऑलरेड़ी गतिमान, शताब्दी जैसी हाईस्पीड गाड़ियाँ चलाई जा रही है।

इसी बीच प्राइवेट गाड़ियोंका दौर भी जल्द ही शुरू होने जा रहा है। क्या आप जान सकते है, क्या कुछ बदलने जा रहा है, भारतीय रेलोंपर? हर 25 / 50 किलोमीटर पर स्टॉपेज वाली एक्सप्रेस और सुपरफास्ट गाड़ियोंके दिन लदने वाले है। जी हाँ हमारी रेलवे पर सुपरफास्ट की परिभाषा है, जो गाड़ी अपनी पूरी यात्रा याने स्टार्ट टू एन्ड 55km प्रति घंटे के एवरेज स्पीड से करती है उसे सुपरफास्ट माना जाता है चाहे वह कितने ही स्टापेज क्यों न लेती हो। मध्य रेलवे की एक गाड़ी है, 12139 / 12140 सेवाग्राम एक्सप्रेस। यह गाड़ी मुम्बई से नागपुर 837 किलोमीटर की यात्रा लगभग 15 घंटे और 10 मिनट में पूरी करती है, जो की 55km प्रति घंटे की एवरेज स्पीड जैसे तैसे बन जाती है और स्टोपेजेस है 33, याने एवरेज हर 25km पर एक स्टॉप। अब आप बताइए क्या इस गाड़ी को कोई सुपरफास्ट बोल सकता है? मगर रेल प्रशासन के सुपरफास्ट मानकोंमें फिट है तो बन गयी सुपरफास्ट।

लेकिन आनेवाले दिनोंमें, जो 130km प्रति घंटे स्पीड और प्राइवेट ऑपरेटर की गाड़ियाँ चलेंगी उसमे ऐसा कतई नही होनेवाला है। जान लीजिए पटना, दानापुर, आरा, मोकामा, बक्सर जैसे स्टेशनोंसे भी गाड़ियाँ सीधी चल सकती है। मध्य रेलवे पर के महत्वपूर्ण जंक्शन भुसावल, जहाँ रेलवे के हर तरह के टेक्नीशियन, मेंटेनेंस स्टाफ़ मौजूद है वहाँसे राजधानी एक्सप्रेस सीधी बिना रुके निकल जाती है तो बाकी स्टेशनोंका क्या? अब ट्रेनोंमें पोलिटिकल रोड़े बिल्कुल नही लगेंगे। फ़लाँ शहर जिला है, पर्यटन स्थल है, इंडस्ट्रियल हब है तो क्या? रेल प्रशासन सिर्फ अपना लम्बा रन देखेगी, टेक्निकल स्टॉप जहाँ जरूरत है वह देखेगी और प्राइवेट ऑपरेटर अपना ट्रैफिक देखेगी। कुल यह समझ लें एयरवेज वाली सोच है, जहाँ ट्रैफिक पोटेंशियल है तो स्टोपेजेस रहेंगे अन्यथा नही।

छोटे छोटे स्टेशनोके लिए डेमू, मेमू ट्रेनें तो आ ही रही है नहीं तो है सेवाग्राम एक्सप्रेस जैसे सुपरफास्ट। हाईस्पीड ट्रेन, बुलेट ट्रेन इस प्रकार की गाड़ियाँ बड़े स्टेशनों की मिल्कियत है, बीच वाले स्टेशनोंके यात्री चाहे तो अपने आस पास के स्टेशनोंपर आ जा कर इनमें सफर करने की अपनी ख्वाहिश या जरूरत पूरी कर सकते है।