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भारतीय रेल : आधुनिकता की ओर

@piyushgoyal @nitin_gadkari
कल हमने एक लेख प्रकाशित किया था, जो एक सेवानिवृत्त IRSE इंडियन रेलवे सर्विसेज़ ऑफ इंजीनियरिंग अधिकारी श्री आलोक कुमार वर्मा का था। उपरोक्त लेख में किस तरह भारतीय रेलवे की बढ़ती गति और प्रगति को रोकने की चेष्टा की जा रही है इस पर भाष्य था। आनेवाले दिनोंमें 160-200 km प्रति घंटे की स्पीड ट्रायल भारतीय रेलवे पर शुरू होनी है। इसके लिए DFC के दोनों कॉरिडोर तैयार हो रहे है। पंजाब के लुधियाना से मुम्बई JNPT और हरियाणा के दादरी से बंगाल के दानकुनी तक के ये ट्रैक 800 और 350 किलोमीटर तैयार है और इनके उध्धाटन की प्रतीक्षा में है।

प्रस्तुत लेख में यह कहा गया था, की तेल, वाहन और हवाई क्षेत्र की कम्पनियां नही चाहती की पूरी दुनिया मे रेलवे की गति बढ़े और उनके क्षेत्र में कोई प्रतियोगी तैयार हो। यूरोप, अमेरिका जैसे देश इनके जाल में आ गए और जनसंख्या की दृष्टिकोण से उन्हे इस बात का कोई खासा नुकसान नही उठाना पड़ा लेकिन जापान और चीन ने इनके दबाव से ऊपर उठकर अपनी रेल्वेज का विकास किया और वहाँपर आज हाईस्पीड रेल्वेज चलाई जाती है।

भारत मे सन 2004 से रेलवे की गति बढाई जाने के लिए कोशिश की जा रही है। लेकिन भौगोलिक, आर्थिक और राजकीय परिस्थितियों के चलते हर बार बाहरी तबक़े की चाल क़ामयाब हो जाती है।

आप सोच सकते है, भारतिय रेल की गति जो अभी एवरेज 30km से 90km प्रति घंटा है और अधिकतम गति 130km है यदि बढकर 160 – 200 और 200 – 250 हो जाती है तो क्या क्या परिवर्तन आने है। मुम्बईसे दिल्ली 8-10 घंटे में, मुम्बईसे कोलकाता 10-12 घंटेमे और इसी तरह हर वो बड़े और औद्योगिक शहरोंके बीच का अन्तर काटने के लिए लगनेवाला समय कम होता जाएगा। न सिर्फ यात्री वहन बल्कि माल वहन भी शीघ्रता से होगा।
हमारी जनसंख्या, और उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए आज भी रास्ते से या हवाई रास्ते से चलने वाली यातायात के बदले रेल यातायात हमारे लिए बेहद उपयुक्त है। लेकिन जो गतिसीमा की बाधाएं रेलवे पर पड़ चुकी है, वह हमारी रेल्वेज को आगे नही बढ़ने दे रही। जिस तरह रेलवे ट्रैक, रेलवे यार्ड, प्लेटफॉर्म्स का विकास होना चाहिए था, रेलोंके आधुनिक डिब्बे, लोको, सिग्नलिंग सिस्टम यह उस गति के लायक नही थे।

अब वैसी स्थिति नही रही। भारतीय रेलवे के विकास की रफ्तार अब करवट बदल रही है। अब रेलवे में विकास के चौतरफ़ा कार्य किए जा रहे है। हर ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा रहा है। डिब्बे बदलकर LHB हो रहे है। पुरानी सवारी गाड़ियोंको आधुनिक MEMU में बदला जा रहा है। हाईपावर लोको बन रहे है और ऑपरेशन्स में भी आ चुके है। वन्देभारत, गतिमान, तेजस गाड़ियाँ इसका उदाहरण है।

गाड़ियोंकी गति और भी बढ़ेगी। लम्बी दुरियोंके स्टोपेजेस बन्द किए जायेंगे। बड़े और व्यस्त जंक्शनोंके बाईपास तैयार किए जाएंगे। छोटे और बीचके स्टेशनों के लिए मेमू गाड़ियाँ चलने लगेगी। 25-50 -100 किलोमीटर के दायरे के लिए मेट्रो गाड़ियाँ चलाई जाएगी। मित्रों रेलवे के यह दौर हमारे और हमारे देश के विकास लिए बेहद जरूरी है।

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