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रेलवे : लॉक डाउन के बाद

14 अप्रेल तक लॉक डाउन के बाद क्या रेल की यात्री सेवाएं शुरू हो जाएगी? सभी के मन मे यही विचार चल रहा है। सब लोग अपनी अपनी उंगलियां मरोड़े बैठे है वही भाई फिंगर क्रॉसड।

लॉक डाउन की हर रोज समीक्षा की जा रही है। देश के सभी जिम्मेदार नेता, प्रशासनिक अधिकारी प्रत्येक हलचल पर बारीक़ी से नजर रखे हुए है। इन हालातोंमें रेलवे की यात्री सेवाओंके बारे में कोई भी भाष्य करना ठीक नही होगा अपितु हम सकारात्मक सोच रखते हुए गाड़ियाँ शुरू की गई तो क्या व्यवस्था होनी चाहिए इस बारे में अपने विचार रखते है।

मित्रों, यह तो हमारे पहले आए लेख में भी हमने कहा था की न सिर्फ गाड़ियोंमे बल्की रेलवे के अहाते और प्लेटफॉर्म्स पर भी बिना परिचयपत्र और कारण के सारी आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध होने चाहिए। गाड़ियोंके सभी वर्ग आरक्षित हो यहाँतक की द्वितीय श्रेणी साधारण को भी द्वितीय श्रेणी सिटिंग क्लास में परावर्तित कर देना चाहिए ताकि बिना अग्रिम आरक्षण के किसी व्यक्ति का रेलवे के अहाते में प्रवेश ही न हो।
ऐसी व्यवस्थामे द्वितीय श्रेणी के टिकिट बुकिंग काउंटर्स का कोई मतलब नही रहेगा साथ ही PRS काउंटर्स की मैन्युअल बुकिंग पर भी बंधन रखने में हर्ज नही केवल ई टिकट ही जारी किए जाए उससे आरक्षण काउंटर्स की भीड़ पर नियंत्रण रखने की जरूरत नही रहेगी और कोई गाड़ी किसी कारणवश रद्द की जाती है तो कैंसलेशन और रिफण्डस की भी कोई पेचीदगी नही।


आगे डिब्बों में AC प्रथम श्रेणी तो बिल्कुल सोशल डिस्टेनसिंग के हिसाब से ठीक है पर AC 2टियर में भी कैबिन में 4 और साइड बर्थ पर 1 ऐसे ही व्यवस्था हो और AC 3 टायर और स्लिपर क्लास में भी यही आसन व्यवस्था कायम की जा सकती है। यानी स्लिपर क्लास के LHB कोच में 9 कम्पार्टमेंट में प्रत्येक 5 यात्री, नॉन LHB के 8 कम्पार्टमेंट में भी उसी तरह 5 यात्री के रिजर्वेशन दिए जाए। इन किसी भी श्रेणी में आरक्षणोमे RAC और वेटिंगलिस्ट बिल्कुल न हो।

जब तक लॉक डाउन शुरू है या संक्रमण फैलने का डर है तब तक MST/QST पासधारकोंपर भी यात्रा प्रतिबंध लगना चाहिए। अब बात गाड़ियोंकी करते है, केवल वहीं गाड़ियाँ शुरू की जाए जिसमे केवल आरक्षित यात्री ही यात्रा कर सकते है उदाहरण के लिए तेजस, राजधानी, शताब्दी, दुरन्तो, हमसफ़र, गरीबरथ और सुविधा एक्सप्रेस जैसी प्रिमियम गाड़ियाँ। इन गाड़ियोंमे स्टापेजेस भी कम होते है अतः व्यर्थ भीड़ होने की तकलीफ नही रहेगी।

मित्रों, रेल गाड़ी के पहिए थम जाने से न सिर्फ प्रशासन को नुकसान हो रहा है बल्कि कई लोगोंके व्यवसाय, रोजगार भी रेलवे से जुड़े होने से बन्द ही पड़े है। रेलवे अपने आप मे एक बहोत बड़ी इंडस्ट्री है। पर्यटन व्यवसाय, रेलवे का खानपान विभाग, रेल्वे प्लेटफॉर्म्स पर अनेकों स्टॉल्स, पार्सल विभाग जिसमे कई सारे बाहर से लोग जुड़े होते है, रेलवे के कंस्ट्रुक्शन जैसे कई विभाग है जो आउटसोर्सिंग या PPP मॉड्यूल पर काम करते है सब के सब ठप्प पड़े है। रेलवे शुरू हो जाती है तो इन लोगोंका भी रोजगार चल पड़ेगा। हमारी यही सदिच्छा है, जल्द ही यह संक्रमण की स्थिति काबू में आए और रेलगाड़ियोंकी सीटियाँ, खड़खड़ाहट का संगीत फिर से हम सभी जीवन मे गूंजने लगे।

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