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अब ‘ जान भी जहान भी’

जान है तो जहान है और जान भी, जहान भी। लॉक डाउन के शुरुआती दौर में “हमे जान है तो जहान है” वाली उक्ति पर अमल करना था। इसका वास्तविक अर्थ यह के आप को अपनी जिन्दगी को सर्वप्रथम सम्भालना है, आप सम्भलोगे तो दुनिया सम्भलेगी और अब जब लॉक डाउन की मियाद पूरी होने को है, आगे बढ़ाए जाने की बाते चर्चा में है तब नयी बात सामने आ रही है ” जान भी, जहान भी।

मित्रों, लॉक डाउन की परिस्थितियों में हमने अपने आप पर संयम रखकर, अनावश्यक जनसम्पर्क से दूरी बनाकर संक्रमण को सीमित रखने में बड़ी भूमिका निभायी है। अब इसी तरह के संयम को कायम रखते हमको हमारे सहयोगियों, कर्मचारियों को सम्भालनेकी बारी आई है। एक बात अच्छी तरह से समझ ले, संक्रमण थमा है खत्म नही हुवा है तो जितनी भी एहतियात, पूर्वावधान हमने आज तक रखा था उसे कायम रखते हुए अब हमें हमारे उद्योग, व्यापार, हमारे जरूरी कार्य को आगे बढ़ाना है ताकी जो हमारे देश की अर्थव्यवस्था के पहिए रुक से गए थे वो चल पड़े।

दायरे सीमित ही खुलेंगे, हो सकता है सार्वजनिक वाहन व्यवस्थाओंमें बंधन लगे होंगे, रेल में सीमित आसन व्यवस्थाएं रहेगी, कुछ ही गाड़ियाँ चलाई जाएगी, जरूरी और सुरक्षित स्टेशनोंपर ही यात्रिओंको आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जी, आप सही समझ रहे है, आपातकाल जैसी स्थितियाँ महसुस कर रहे है न? नही, वैसा नही होगा क्योंकी यह हमारे आत्मसंयम और स्वानुशासन के साथ किया गया प्रयोग होगा। आने वाले दिन कुछ इसी तरह के होंगे।

हमे सिर्फ और सिर्फ सरकारी सूचनाओंपर ही ध्यान देना है, उन्हीपर अंमल करना है। किसी भी उलूलजुलुल ख़बरोंको न तो पढ़ना है, न ही किसी अन्य को फॉरवर्ड करना है। “हकुना मटाटा“, समझे? इस पूर्वी अफ्रीकी स्वाहिली कहावत का अर्थ है ” सब ठीक हो जाएगा, चिन्ता मत करो”

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