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….और दुनिया तब भी चल रही थी।

हमारे पास एक बेहद खूबसूरत वीडियो आया है। पहले आप यह वीडियो देख लीजिए, फिर बात करते है।

देखा लिया न? जी, हम बिल्कुल धोखे में जी रहे थे और सबसे बड़ा धोखा तो यह है, की हमारे बगैर फ़लाँ जगह कुछ नही हो पाएगा। हमारे परिवार का क्या होगा, दोस्तोंका क्या होगा, बिजनेस कैसे चल पाएगा, हमारे बगैर वहॉं पत्ता भी नही हिलता है।

दोस्तों, अब तो समझिए इस बात को, ” जान है तो जहान है ” आप है तो यह दुनिया आपकी है, आप कहीं हाजिर नही हो पाए तो आपकी कमी तो खल सकती है मगर दुनिया रुक जाएगी? ऐसा नही होगा। हम यह नही कहते की आप महत्वपूर्ण नही है, न। हमारा कहने का यह मतलब बिल्कुल नही है। आप हो, और महत्वपूर्ण भी हो लेकिन वह वक्त नही हो जो एक गैप बन जाए, अंतराल या रिक्ति बन जाए। काम, बिजनेस, दफ्तर, दुनिया चलती ही रहती है। हर चीज कोई भी गैप, रिक्ति पूरा करने की कोशिश करती है और कार्य को अपने अन्जाम तक पहुँचा देती है।

आप इन बातोंको आध्यात्मिक न ले तो बेहतर है। हम केवल लॉक डाउन की बात कर रहे है, जिसमे आप को कई चीजोंको, आदतोंको छोड़ना पड़ा रहा है। अपने मित्रोंसे मिलने जाना, रिश्तेदारोंके छोटे बड़े कार्य प्रसंग में हाजिर होना, पर्यटन करना, ऑफिस टूर करना अबतक यह सब अतिमहत्वपूर्ण कार्य लगते थे जो अब पर्यायवाची रखने होंगे।

जब तक इस संक्रमण की सही सही तोड़ नही मिल जाती तबतक हर तरह का जमावड़ा आम आदमी को खतरे से कम नही लगेगा। लोग रेलवे, बस, टॅक्सी यहाँतक रिक्शा में भी भीड़ में सफर करने से कतराएंगे।

आज तक सबके दिमाग़ में रेल गाड़ियाँ कब शुरू होंगी और कब हमारा घूमने का, रिश्तेदारोंके यहां जाने का प्रोग्राम फिक्स होगा, बिजनेस एक्सपैंशन के लिए कौनसे शहर का टूर करना है, माल खरीदने कहाँ जाना है ई. विचार चल रहे थे अब सोच में फर्क आते जा रहा है। गाड़ियाँ शुरू भी हो गयी तो किस तरह जा पाएंगे? क्या वातानुकूलित प्रथम श्रेणी का टिकट ले कर यात्रा करना ठीक रहेगा? या स्पेशल टैक्सी कर लेना ज्यादा उचित रहेगा। फॉरेन टूर्स का क्या होगा? लगता है डर?

जो लोग उम्रदराज़ है, बीमारियों से ग्रस्त है, जिनकी रोग प्रतिकार शक्ति कमजोर है ऐसे लोगोंमेंसे सीनियर सिटीजन्स की रेल किरायोंकी रियायत पहले ही अमर्याद काल तक रद्द की जा चुकी है। दिव्यांग और बीमार व्यक्तियोंकी रियायत शुरू है लेकिन हमारे देश जिसमे कई सारे लोगोंको मधुमेह, रक्तचाप की तकलीफें है, जिनकी रोग प्रतिकार शक्ति पहलेसेही कमजोर है ऐसे में क्या यह लोगोंका आगे भी रेल या कोई भी यात्रा करना उचित रहेगा?

भाईयों, हम आपको डरा नही रहे है, अपितु आनेवाले हालातोंकी कुछ तस्वीर सामने लाने का प्रयत्न कर रहे है। महत्वपूर्ण, बेहद जरूरी इन शब्दोंके मायने जल्द ही बदलने वाले है। दुनिया के लिए कुछ जरूरी नही है और न ही महत्वपूर्ण बस जो कुछ है वह है आप और आपकी समझदारी।

वीडियो के लिए हम अन्जान रचयिता के हार्दिक आभारी है, यह हमें फॉरवर्ड मेसेज के ज़रिए मिला है।

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