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“ती सध्या काय करते”

दरअसल ऐसी एक मराठी मूवी आयी थी, जिसमे फ़िल्म का हीरो इस सवाल के ज़रिए अपनी बचपन की बिछड़ी दोस्त का पता लगाने की कोशिश करते हुए बताया गया है।

लॉकडाउन अवधी का लगभग महीना गुजर गया है और सब के मन मे यही सवाल है “आजकल क्या कर रहे हो?” पहले तो यह सवाल पूछे जाने का अर्थ यह था की, वह अपनी रोजी रोटी के लिए या जीवन मे किसी मंजिल को पाने के लिए कुछ न कुछ तो करता है पर वह जो कुछ कर रहा है आखिर वह है क्या? यह जानने, समझने के लिए या किसी का स्टेट्स नापने के लिए होता था। पर आज कल इस सवाल का छुपा अर्थ यह होता है, भाई, समय कैसे काट रहे हो?

दुनियाभर में इस लॉक डाउन की वजह से करीबन 80% आबादी घरोंमें बैठी है। सोशल डिस्टेनसिंग के लिए यह बेहद जरूरी भी है। केवल जरूरी सेवाएं देने विभाग, इन घरों मे बैठी करोड़ों की आबादी शान्ति और संयम के साथ सुरक्षित जी सके इसलिए अपनी जान हथेली पर रखकर देश की सेवा कर रही है। हम लोग अपने घरों मे सुरक्षित रहे इसलिए यह 20% लोग जिसमे स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानून व्यवस्था, बिजली और पानी की व्यवस्था देने वाले विभाग सजग है। हम अपनी और अपनोंकी सुरक्षा के लिए रुके रहे पर हमारा देश न रुके इसलिए हजारों ट्रांसपोर्टर्स जिसमे ट्रक ड्रायवर्स अपनी लॉरियाँ लेकर राशन,अनाज, फल, सब्जियां, दवाएं एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचा रहे है।

रेल्वे भी अपनी मालगाड़ियाँ और पार्सल विशेष गाडियाँ चलाकर इसमे महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 20 अप्रैल से कई जगहों पर सड़क निर्माण के काम शुरू किए गए है उसके लिए सीमेंट, ताप बिजली घरों के लिए कोयला, लौह कारखानों के लिए खनिज, कच्चा तेल इन हमेशा की ढुलाई के साथ साथ अनाज, दूध, सब्जी की ढुलाई भी रेल्वे अपनी अन्नपूर्णा मालगाड़ियों से कर रहा है। अत्यावश्यक सामान और दवाओं के लिए पार्सल विशेष गाडियाँ चलाई जा रही है। इन गाड़ियों के लिए लोको पायलट, गार्ड्स, स्टेशन मास्टर, परिचालन विभाग के कर्मचारी, रखरखाव कर्मी गाडियाँ चलाने के लिए जरूरी है, अपनी सेवाएं दे रहे है। हालांकि गाड़ियां पटरी पर कम होने से इन लोगों के ड्यूटी साइकल काफी कम है। लोको पायलट और गार्ड्स को 4 – 6 दिन मे एक बार ड्यूटी कॉल आ रही है।

हर कोई जो अत्यावश्यक सेवाओं मे है, अपना काम मुस्तैदी से कर रहा है। जिनके पास इसके बाद भी खाली समय बच रहा है तो कोई जरूरतमंदों की मदत कर रहा है तो कोई राशन, खाना पहुंचा रहा है, और नहीं कुछ तो बैठे बैठे मास्क ही बना रहे है, और जहां लोगों के पास मास्क नहीं है उन्हें ले जा कर दे रहे है। रेल्वे का आईआरसीटीसी खानपान विभाग कई जरुरतमन्द लोगों को पैक खाना और पीने का पानी उपलब्ध करा रहा है।

वह आजकल क्या कर रहे है यह तो आपके समझ मे आ ही गया होगा, आप बताए आप आजकल क्या कर रहे हो?

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