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स्पेशल राजधानी गाड़ियोंका विस्तृत लेखाजोखा

मई की 12 तारीख से राजधानी स्पेशल गाडियाँ चल पड़ी है। वैसे तो लॉक डाउन की शुरुवात होने से भारतीय रेल पर 24 जोडी राजधानी गाडियाँ चलाई जा रही थी, अब लॉक डाउन के काल मे बहोत सारे लोग कहीं कहीं अटक से गए है और श्रमिक कामगारोंकी श्रेणी में नही आतें तो उनके लिए 15 जोड़ी राजधानी गाड़ियां चलाई जा रही है। इसका मतलब रेग्युलर चलने वाली 9 राजधानी गाड़ियाँ फिलहाल नही चल रही है। आइए देखते है कौनसी है वह गाडियाँ।

3 राजधानी गाडियाँ डिब्रूगढ़ की चलती थी जिसमे केवल 1 02423/02424 वाया बरौनी और रोजाना चलती थी, चलाई जा रही है। 20504/20503 नई दिल्ली डिब्रूगढ़ राजधानी वाया मुजफ्फरपुर, लखनऊ और 20505/20506 नई दिल्ली डिब्रूगढ़ टाउन वाया वाराणसी बलिया नहीं चल रही है।

हावड़ा के लिए 3 राजधानी गाडियाँ चलती थी, जिसमे 02301/02302 नई दिल्ली हावड़ा राजधानी वाया गया चल रही है। 12305/12306 नई दिल्ली हावड़ा राजधानी वाया पटना और 12313/12314 नई दिल्ली सियालदाह राजधानी वाया धनबाद नहीं चल रही है।

मुंबई के लिए 3 राजधानी चलाई जाती थी, जिसमे 02951/02952 मुंबई सेंट्रल नई दिल्ली राजधानी चल रही है तो 12953/12954 मुंबई सेंट्रल निजामुद्दीन अगस्त क्रांति राजधानी और 22221/22222 मुंबई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस निजामुद्दीन मध्य रेल वाली राजधानी नहीं चलाई जा रही है।

राँची के लिए 2 राजधानी गाडियाँ चलती थी जिसमे 02453/02454 राँची नई दिल्ली राजधानी वाया प्रयागराज चल रही ही तो 20839/20840 राँची नई दिल्ली राजधानी वाया बोकारो नहीं चलाई जा रही है।

भुबनेश्वर के लिए 3 राजधानी गाडियाँ चलाई जाती थी जिसमे 02823/02824 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी वाया बोकारो ही चल रही है जिसे रोजाना चलाया जा रहा है मगर 20817/20818 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी वाया सम्बलपुर और 22811/22812 नई दिल्ली भुबनेश्वर राजधानी वाया आद्रा यह दोनों राजधानी नहीं चल रही है।

इस तरह 9 जोड़ी राजधानी गाडियाँ जो भलेही गंतव्य की समानता हो लेकिन मार्ग भिन्न भिन्न थे, स्पेशल वाले रन मे नहीं चलाई जा रही है। जिसमे सबसे जरूरी मध्य रेल की मुंबई निजामुद्दीन राजधानी है जो ऐसे मार्ग पर चलती है जहाँ पर फिलहाल कोई भी गाड़ी नहीं चल रही है। इसमे विशेष बात आपको बता दूँ तो देश का अग्रणी, सबसे पहला क्षेत्र जहांसे भारतीय रेल की शूरवात हुई थी, उस मार्ग पर मुंबई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस से लेकर भुसावल और आगे खंडवा, इटारसी तक और भुसावल से नागपूर तक कोई भी स्पेशल राजधानी ट्रेन नहीं चल रही है। यूँ तो मध्य रेल का नागपूर इटारसी मार्ग छोड़ कोई भी मार्ग पर राजधानी स्पेशल नहीं चल रही है।

वातानुकूलित गाडियाँ चलने की वजह यह मालूम पड़ती है, एक तो इनमें सारा स्टाफ़ मौजूद रहता है। वातानुकूलित डिब्बों में यात्री संख्या कम होने से यह डिब्बे स्लिपर क्लास, जनरल क्लास से ज्यादा सुरक्षित तरीकेसे नियन्त्रित किए जा सकते है। किराया भी ज्यादा रहता है, उस कारण अनावश्यक रूपसे यात्रा करने वाले यात्रिओंको हतोत्साहित किया जा सकता है। इन गाड़ियोंके स्टापेजेस काफी कम है तो यात्री भी सिलेक्टेड हो जाते है।

इन 15 स्पेशल गाड़ियोंको मिली उत्स्फूर्त प्रतिक्रिया देखते हुए रेल प्रशासन यदि इसी तरह की वातानुकूलित गाडियाँ चलाना चाहती है तो क्यों न बाकी वातानुकूलित गाडियाँ भी चलानी चाहिए जिसमे दुरांतों, हमसफ़र, गतिमान, शताब्दी, डबलड़ेकर और गरीबरथ गाडियाँ आती है। इन गाड़ियोंके चलाए जाने से काफी मार्ग कवर कीए जा सकते है। अभी के हालत ऐसे है की कई सारे प्रमुख मार्ग जैसे मुंबई हावड़ा, मुंबई प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ दक्षिण मे मुंबई से हैदराबाद, चेन्नई, बंगलुरु, तिरुवन्तपुरम पश्चिम मे मुंबई से अहमदाबाद राजकोट, जामनगर, भुज, आगे अजमेर जयपुर जोधपुर बीकानेर यह सारी कनेक्टिविटी ठप्प हो गई है शुरू हो जाएगी।

हमारा नारा “जान है, जहान भी है” ऐसा है तो बाकी मार्ग की सम्पर्कता भी अवश्य ही बढ़नी चाहिए तभी तो हम हमारा जहान याने व्यवसाय, व्यापार, रोजगार आदि बढ़ा पायेंगे।

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