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एक अर्ज हमारी भी…

श्रमिक भाईयों,

गाँव लौटने से पहले एक बात दिल की है, जरा सुन भी लो। आप सब इस तरह ज़िद पर अड़ गए हो, की बस घर जाना है, अपने गाँव जाना है। जैसे कोई बच्चा स्कुल में, चलती क्लास से घर जाने के लिए अड़ जाता है।

हम यह जानते है की आप को लगने लगा है, आप बड़ी भारी मुसीबतोंमें फँस गए हो, आप के पास रोजगार नही बचा, खाने के लिए व्यवस्था नही रही। लेकिन अब, अब तो कामकाज खोल दिए गए है, रोज़गार शुरू करा दिए गए है, अनाज बाँटा जा रहा है, जगह जगह पर स्थानीय लोग श्रमिकोंकी मदत कर रहे है, तैयार खाना, सूखा नाश्ता, फल, पानी सारी व्यवस्था रास्ते में निकल पड़े लोगोंतक, स्थानीय कर रहे है। रेल प्रशासन द्वारा आप लोगोंके लिए सैकडों गाड़ियाँ चलाई जा रही है। राज्योंके परिवहन विभाग बसें चला रहे है। स्थानीय लोग अपनी ट्रकें, लॉरियाँ आप श्रमिकोंके लिए दे रहे है।

लेकिन हमारी प्रार्थना है, भाइयों अब रुक जाइए, अब तो रुक ही जाइए। एक बात समझिए, जो आप अपने गाँव जाना चाहते हो, वहाँ पोहोंचने के बाद भी 14-15 दिनों तक आप को आप जा परिवार नसीब नही होना है। आपको गाँव के बाहर क्वारंण्टाइन में रहना होगा।

फिलहाल वहाँ कोई महामारी नहीं पोहोंची है क्या आप उसे अपने परिवार के लिए साथ मे लिए जा रहे हो? मेरे भाई, जरा गौर करो। गाड़ियाँ और भी शुरू हो रही है। ज़्यादा से ज्यादा 10-15 दिनोंमें रेल गाड़ियाँ शुरू हो जाएगी। जो आपके गाँव जाएगी भी और वहाँसे आपको वापसी के लिए भी खड़ी मिलेगी। परिवार की याद आ रही है, तो मिल आना अपने गाँव के परिवार से। लेकिन यहाँ के परिवार का क्या, आप के यहाँ के दुख सुख के साथियोंका क्या?

जरा याद कीजिए, आप यहाँ शहरोंमें अपना रोजगार पाने के लिए आए थे। यहाँ आपको रोजगार मिला, रहने के लिए छत मिली, खाने के लिए रोटी मिली जिसे भुला कर आप जा रहे हो? जिस जगह आप ने रोजी पायी, आज वह संस्थाएं, दुकानें, कारखाने, उनको चलाने लोग, वह भी मुसीबत में ही है। इस महामारी ने सिर्फ आप ही का काम नही छीना है, उनका भी काम छीन गया है। उनकी भी दुकानें, व्यापार, कारखाने लगभग 2 महीनोंसे बन्द ही है। आप घर जा रहे हो क्योंकी आप के लिए वह रास्ता खुला है, यह स्थानीय लोग कहाँ जाएँगे? नही न जा सकते कहीं? अब आप बोलोगे यहाँ इनका घर, कामकाज, व्यापार, व्यवसाय और परिवार सब है। लेकिन भाई अब तक तो यह सब आपके पास भी था। क्या आप जहाँ काम करते वह आपका ठिकाना नही था, जहाँ रहते थे, खाते पीते थे, जिनके साथ दिन भर काम करते थे क्या वह आपके अपने नही थे?

मेरे श्रमिक भाइयों, रुक जाइये, थम जाईए, घर गए हो तो लौट आइए। घर लौट कर घर परिवार के लिए मुसीबतें खड़ी न कीजिए। गाँव जाकर कोई नया काम, नया संसार बसाओगे उस से बेहतर यहाँ का बसाबसाया संसार, कामकाज जो बस शुरू होने जा ही रहा है छोड़ने का कोई मतलब नही है।

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