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अकोला – आकोट – खण्डवा का बड़ी लाइन मे रूपान्तरण, क्या अब ऐसे होगा?

1963 में शुरू हुई रतलाम – महू – खण्डवा – अकोला इस मीटर गेज लाइन पर जयपुर काचेगुड़ा मीनाक्षी एक्सप्रेस बेहद लोकप्रिय गाड़ी चलती थी। न सिर्फ दक्षिण के राज्यों बल्कि महाराष्ट्र के विदर्भ और मध्यप्रदेश के निमाड़ मालवा इलाके लिए राजस्थान की एकमेव सम्पर्क स्थापित रखने वाली यह गाड़ी थी। अनुपम जंगल, झरने के दृश्योंसे भरपूर यह इलाका कभी घाटी तो कभी गुंफाओंसे गुजरता था।

इसी बीच रेल प्रशासन का यूनिगेज नामक एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आया और देश मे जितनी अलग अलग गेज की लाइनें थी उनको एक गेज, बड़ी लाइन में रूपांतरित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया। करीबन सन 2008 में राजस्थान में जयपुर – चित्तौड़गढ़ – रतलाम लाइन बड़ी की गई और आगे रतलाम महू खण्डवा अकोला यह 472 किलोमीटर का सेक्शन भी यूनिगेज प्रोग्राम के तहत गेज कन्वर्जन में लाया गया। रतलाम – इन्दौर – महू बड़ी लाइन हो कर गाड़ियाँ भी चलने लगी मगर बड़े पेंच महू – खण्डवा और खण्डवा – अकोला रेल खण्ड में फंस गए।

महू खण्डवा सेक्शन में पातालपानी, कालाकुण्ड सेक्शन का गेज वही छोटी लाइनका रख कर उसे हेरिटेज लाइन का दर्जा दिया गया और उस सेक्शन में पर्यटक गाड़ी चलाई जा रही है। महू से सनावद तक यह गेज कन्वर्शन थोड़ा लम्बी दूरी से घूम कर आ रहा है जिसका काम अभी जारी है। दूसरी तरफ खण्डवा के पास मथेला स्टेशन पर एक लूप बनाया गया और उसे सनावद लाइनसे जोड़ा गया। दरअसल खरगौन जिले में सेलड़ा गांव में NTPC का औषणिक ताप बिजलीघर बना है और उसकी कोलरीज की मालगाड़ियोंके लिए यह लाइन जल्दी बनाई गई। मथेला सनावद होकर यह कोयले से लदी गाड़ियोंका ट्रैफिक शुरू हो गया है और विद्युतीकरण भी प्रगतिपथपर है।

अब बची है बात खण्डवा अकोला 172 किलोमीटर गेज कन्वर्शन की जिसमे अकोला आकोट का काम लगभग पूरा हो गया है। आकोट से आगे यह ट्रैक 38 किलोमीटर मेलघाट टाइगर रिज़र्व से होकर गुजरता है जिसमे करीबन 23 किलोमीटर का ट्रैक बाघोंके आवाजाही का क्षेत्र है। महाराष्ट्र शासन ने इस गेज कन्वर्शन पर आपत्ति उठाई है। शासन ने कहा है, बजाय मेलघाट बाघ प्रकल्प से यह ट्रैक गुजरे, इसे थोड़ा घुमा कर ले जाना चाहिए। आकोट के बाद इस ट्रैक को जलगाँव जामोद होकर ले जाया गया तो मेलघाट प्रकल्प बाधित नही होगा और बुलढाणा जिले के लोगोंकी भी रेल यातायात की व्यवस्था हो जाएगी। नए ट्रैक बिछाने का अतिरिक्त खर्च इस यात्री यातायात के जरिए भर कर निकाला जा सकता है। देश के महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व में मेलघाट का शुमार होता है।

इसी से सम्बंधित मेलघाट टाइगर रिजर्व की और महाराष्ट्र शासन के इच्छानुसार ट्रैक को जलगाँव जामोद से कैसे ले जाया जा सकता है इसकी जानकारी आपको दे रहे है।

मेलघाट बाघ प्रकल्प (courtesy: melghattiger.gov.in)
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का रेलमंत्री और पर्यावरण मंत्री को पत्र
अकोला – खण्डवा पर्यायी रेल मार्ग (courtesy:indiarailinfo.com)

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