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मन्थली सीजन टिकट सहुलियित किसकी, परेशानी किसको।

मन्थली सीजन टिकट याने MST यह डेली कम्यूटर्स, रेल मे तय दूरी के लिए रोजाना चलनेवालोंके लिए वरदान है। रोज कतार में लगकर टिकट लेने से मुक्ति यह इसका सबसे बड़ा फायदा है। लेकिन हमारे MST धारी मित्र इसका बहुतायत में लाभ उठाते है, कैसे? जानते है।

डेली अपडाउन करने की वजह से MST यात्री सभी गाड़ियों, उनके स्टाफ़ से भलीभाँति परिचित होते है। उनको गाड़ियोंमे फलाँ स्टेशनोंके लिए कोटे कहाँ कहाँ होते है, याने बर्थ कहाँ खाली मिलेंगे यह भी पता होता है। अक्सर यह लोग स्लिपर में, चेकिंग स्टाफ़ को राम रमाई करते हुए यात्रा करते पाए जाते है। जबकी द्वितीय श्रेणी के अलावा किसी भी अन्य श्रेणी में इनकी यात्रा को अनुमति नही है। हाल ही में कुछ गाड़ियोंमे अलग अलग क्षेत्रीय रेलवे ने गन्तव्योंके पास के स्टेशनोंके लिए MST धारकोंको स्लिपर क्लास में यात्रा करना मंजूर किया है लेकिन इसके लिए भी उन्हें अतिरिक्त किराया देना होगा।

जहाँ उपनगरीय गाड़ियाँ नही चलती वहाँपर MST पासधारक सवारी गाड़ियोंके अलावा मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट गाड़ियोंमे भी यात्रा करने की अनुमति है। चूँकि यह यात्रा केवल द्वितीय श्रेणी में अलाउड होने से वातानुकूलित गाड़ियोंमे जैसे राजधानी, शताब्दी श्रेणी की गाड़ियाँ MST धारकोंके लिए प्रतिबंधित है। सुपरफास्ट गाड़ीमे यात्रा करने हेतु MST धारक को प्रति यात्रा सुपरफास्ट शुल्क ₹15/- देना होता है या MST का सुपरफास्ट का अतिरिक्त पास निकालना होता है। यह पास उन्हें केवल 15 एकल यात्रा के किराए में याने ₹225/- मात्र में उपलब्ध होता है।

अब आपके मन मे यह सवाल आया होगा, यह MST के किराए किस तरह लागू होते है? तो मित्रों, यज्ञपि यह लोग लोग सवारी गाड़ियोंके अलावा मेल एक्सप्रेस में यात्रा करते है फिर भी इनके किराए का बेस सवारी गाड़ियोंके किराए ही है। अमूमन सवारी गाड़ियोंके 15 से 18 एकल यात्रा के किराए जितना किराया किसी MST पास को महीनेभर के लिए चार्ज किया जाता है। यानी 60 एकल यात्रा के लिए केवल 25 से 30% किराया वह भी सवारी गाड़ी के किराए से, ही इनको लगता है।

एक निश्चित अंतर के लिए रोजाना चलने की वजह से लगभग सारा चेकिंग, सिक्युरिटी और ऑपरेटिंग स्टाफ़ इन लोगोंसे परिचित होता है। साथ ही, किसी एक ही उद्देश्य से इकठ्ठे इतने सारे लोग उसके मुकाबले कभी कभार यात्रा करने वाले लम्बी दूरी के यात्रिओंपर आसानी से दबाव रख पाते है। और इसी वजह से यह लोग आसानीसे स्लिपर डिब्बों में, आरक्षित यात्रिओंकी जगहोंपर एडजस्ट होकर यात्रा कर लेते है। आरक्षित यात्री इनके बैठने पर आपत्ति लें तो आपस मे होहुज्जत भी होते रहती है।

इन सब बातोंपर उपाय क्या है? रेल प्रशासन के जो भी नियम बने है, वह काफी हद तक नैतिकता से पालन करने वालोंके हिसाब से बनाए गए है। जैसे रोड़ ट्रैफिक में पैदल चलनेवाले बायीं ओरसे चले ऐसा नियम है और फिर भी कोई दायी ओर से चलेगा तो हर व्यक्ति के पीछे ट्रैफिक पुलिस तो नियंत्रण के नही न दौड़ सकती है? उसी तरह रेलवे के भी नियम है। स्लिपर के हर कोच पर चेकिंग स्टाफ तो रहता नही। बिना आरक्षण के आप आरक्षित डिब्बों में यात्रा न कीजिए, बिना टिकट रेलवे के अहाते में प्रवेश न करें, भारतीय रेल आपकी अपनी सम्पत्ति है, इसका दुरुपयोग न करे, साफसफाई रखें आदि। यज्ञपि इनके तोड़े जाने पर सजा का प्रावधान है फिर भी लोग उनके हिसाब से इन क़ानूनोंकी धज्जियाँ उड़ाते रहते है।

रेलवे ने बीचमे सभी गैर उपनगरीय क्षेत्रोंमें MST/QST पासेस बन्द करने का विचार किया था, लेकिन राजकीय इच्छाशक्ति के दबाव से सम्भव नही हो पाया। बन्द करने की आवश्यकता भी नही है। रेल प्रशासन इसे गैर उपनगरीय क्षेत्र में एक्सप्रेस के रेट से चार्ज कर सकती है या फिर इसका इलाज मेमू, डेमू, इंटरसिटी गाड़ियाँ बढ़वाकर किया जा सकता है। लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे ऐसेभी छोटे अंतर के यात्री को जगह नही मिल पाती, जब दूसरी मेमू या इंटरसिटी गाड़ियाँ उपलब्ध होगी तो वैसे ही यह लोग लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे यात्रा न करना पसंद नही करेंगे जो कि उनकी मजबूरी थी।

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