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इसको का कहते है, जुगाड़।

आपने अपनी रेल यात्रा में बहोत बार देखा होगा पटरी के बाजू कोई बन्दा रेलवे मे गैंगमैन का यूनिफॉर्म पहने खड़ा होता है, कांधे पर बजनदार थैला, हाथ मे एक नम्बर लिखी तख्ती और गाड़ी आगे बढ़ते हुए सिटी की आवाज आती है। रेलवे में यह होता है चाबीवाला।

इन चाबीवालों की ड्यूटी ठंडी गर्मी बरसात, बारों मास पटरी की देखभाल करने की होती है। इनके बजनदार थैले में पटरी, स्लीपर्स में जीन चाबियोंसे लॉक की जाती है वह 8-10 चाबियाँ, लम्बी डंडी का हथौड़ा, झंडी, सेक्शन गैंग की तख्ती, रात की ड्यूटी के लिए लालटेन ( आजकल टॉर्च ), सम्पर्क के लिए फोन की पेटी, पटरी जॉइंट्स के 8 – 10 नट बोल्ट, कसने के लिए पाने ऐसा कमसे कम 20 किलो बजन होता है।

इतना सामान ये लोग कंधे पे लादकर, पटरी की सुरक्षा हेतु रोजाना 10 – 10 किलोमीटर की एक बिट पैदल चलते है। यदि कुछ गम्भीर बात इनको पटरी पर नजर आई जैसे की पटरियों का क्रैक या टूटना तो इन लोगोंकी टीम उस स्थान पर दौड़ती है।

ऐसे वक्त में उस स्थान पर जल्द से जल्द पोहोंचना बेहद जरूरी होता है। उत्तर पश्चिम रेलवे के कर्मियों ने एक जबरदस्त उपाय खोजा है। हमारे यहाँ कार्यकुशलता की कोई कमी नही है, लीजिए आप भी देखिए।

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