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तो वह ‘दादर’ नही दौंड ही था!

कल शाम से इंदौर और मालवा के रेल प्रेमी संगठनोंमें और रेल यात्रिओंमें एक अजीब सी असमंजस की भावना थी। विषय था इन्दौर और ग्वालियर की पुणे के ओर जानेवाली गाड़ियोंको पुणे के बजाय दादर में शार्ट टर्मिनेट किए जाने का।

हुवा यूँ था की रेल बोर्ड की ज़ीरो बेस टाइमटेबल को लेकर विभिन्न क्षेत्रीय रेल विभागोंके साथ एक्सरसाइज चल रही है। सवारी गाड़ियोंको एक्सप्रेस बनाया जा रहा है, देशभर की लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंको बन्द किया जा रहा है, कई ब्रांच पर चलनेवाली गाड़ियोंको मेन लाइनपर दौड़ाया जानेवाला है, तो कई गाड़ियोंके फेरे कम किए जा रहे। गाड़ियाँ कहीं शार्ट टर्मिनेट की जाएगी तो कहीं एक्सटेंड भी की जाएगी। यह सारी कवायदें रेल विभाग अपने क्षेत्रीय रेल्वेज के आपसी तालमेल से बिठाने का प्रयत्न कर रहे है।

इसी बीच इन कवायदोंका चिठ्ठा, लेटर, याने कार्यालयीन पत्र मीडिया में आ गया। उस पत्र में पश्चिम रेलवे की इन्दौर पुणे 2 जोड़ी गाड़ियाँ और एक जोड़ी ग्वालियर पुणे गाड़ी, कुल 3 जोड़ी गाड़ियोंके टर्मिनल बदलने का प्रस्ताव था। हड़कम्प मचने का कारण यह था की पुणे टर्मिनेट होनेवाली इन गाड़ियोंको दादर में टर्मिनेट किया जाएगा ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी यह दिखाई दे रहा था।

मालवा प्रभाग को पुणे से जोड़ने वाली पश्चिम रेलवे की यह गाड़ियाँ काफी लोकप्रियता की श्रेणी में आती है। हमेशा फूल बुकिंग्ज के साथ चलती है। उन्हें जब दादर में टर्मिनेट किया जाएगा यह देख, यात्री संगठनोंका माथा ठनका। उनके साथ अन्याय किया जा रहा है ऐसी भावनाएं जागृत होने लगी, आन्दोलन के सुर सजने लगे। इन्दौर से रेलवे के जानेमाने अभ्यासक नागेश नामजोशी जो रेलवे सलाहकार समिति के गणमान्य सदस्य रह चुके है, हरकत में आए। उन्होंने रेलवे अधिकारियोंसे बातचीत की और उन्हें परिस्थितियों से अवगत कराया। प्रथमतः पश्चिम रेलवे के अफसर भी सकतें में आ गए। यह उनके क्षेत्र की महत्वपूर्ण गाड़ियाँ है और उन्होंने ऐसे किसी भी प्रकार के टर्मिनल बदलाव की कोई पेशकश रेल बोर्ड के पास नही की थी।

आखिरकार जाकर यह खुलासा हुवा, की मध्य रेलवे के पुणे स्टेशन पर गाड़ियोंको खड़ी रखने, उनका रखरखाव करने के लिए समुचित जगह की कमी है। इस के चलते हड़पसर, शिवाजीनगर इन उपनगरीय स्टेशनोंको टर्मिनल मे बदलने की तैयारी की जा रही है। ग्वालियर पुणे और इन्दौर पुणे गाड़ियोंको पुणे विभाग, दौंड स्टेशन तक एक्सटेंड करके वहाँ टर्मिनेट करने की सोच रहा है। इस प्रस्ताव में गाड़ी पुणे से और 76 किलोमीटर आगे ले जाकर दौंड स्टेशन पर टर्मिनेट की जानेवाली है और इसमें किसी यात्रीका कोई कनेक्टिविटी का नुकसान होने का सवाल ही नही। तब जाकर मालवा वासियोने राहत की साँस पायी।

वैसे भी जबसे इन्दौर की भूतपूर्व सांसद और भूतपूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन राजनीति में सक्रिय नही है तब से इन्दौर और मालवा प्रभाग की रेल गतिविधियों के विकासमें एक अजीबसा ठण्डापन आ गया है। परिसर के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स ठण्डे बस्ते में जा चुके है। फिर वह नई लाइनोंकी बात हो या गेज कन्वर्शन की या फिर नई गाड़ियोंकी हो या गाड़ियोंके विस्तार की। कही कोई बात ख़बरोंमें ही नही है। नगरवासियों के मन मे अनदेखी किए जाने की भावना है। ऐसे में ही जब इस तरह के अन्यायपूर्ण टर्मिनल बदलाव के प्रस्ताव की खबरें आयी तो यात्री संगठनोंने अपने अधिकारों के लिए पूरी ताकत लगा दी।

नतीजतन अब उन्होंने इस मामले में तो राहत पायी है। लेकिन यात्री संगठनोंको यह बात भी समझ आ गयी है की यह राहत अंशतः है, उनको आगे भी अपनी इन्दौर और मालवा के रेल विकास की माँगोंपर इसी तरह संघर्षरत रहना होगा।

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