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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मुम्बई हावड़ा वाला भाग भुसावल – दानकुनी ऐसा होगा।

रेलवे का महत्वाकांक्षी प्रकल्प, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दो प्रोजेक्ट्स EDFC लुधियाना से दानकुनी 1856 किलोमीटर और WDFC दादरी से मुम्बई के JNPT 1504 किलोमीटर पर ज़ोरोंसे काम शुरू है। दिसम्बर 2021 तक यह दोनोंही प्रोजेक्ट लगभग पूरे किए जाने की संभावनाएं है। इन रेलवे कोरिडोर बन जाने से दिल्ली – हावड़ा, दिल्ली मुम्बई के बीच मालगाड़ियोंके चलाए जाने के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था हो जाएगी। साथ ही वर्तमान व्यवस्थाओंके के लिए अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध हो जाएगा। बहोत ही अत्याधुनिक एवं उन्नत तरीकेसे बनाया गया यह मार्ग भारत के लिए विकास के नए मार्ग खोलने वाला साबित होने वाला है यह बात तय है।

इन दो DFC मार्गोंके अलावा और 4 फ्रेट कॉरिडोर लाइनोंपर काम किया जाने वाला है। वह है, ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर – खड़गपुर से विजयवाडा, ईस्ट वेस्ट सब कॉरिडोर (i) – भुसावल से दानकुनी, ईस्ट वेस्ट सब कॉरिडोर (ii) – राजखरस्वन से अंदाल, नार्थ साउथ कॉरिडोर – विजयवाड़ा से इटारसी। हाल ही में रेल मंत्रालय और DFC कम्पनी के बिच एक समझौता तय हुवा है की उपरोक्त मार्गोंपर DFC, भारतीय रेल को अपनी गाड़ियाँ चलाने देगी।

उपरोक्त कॉरिडोर में जो ईस्ट वेस्ट सब कॉरिडोर (i) है वह भुसावल, वर्धा, नागपुर, राजखरस्वन, खड़गपुर, उलुबेरिया से दानकुनी जिसका कुल किलोमीटर 1645 है, जिसे आगे भुसावल से मुम्बई की ओर WDFC ट्रैक को पालघर में जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट भुसावल के लिए बहोत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।

गत 5 वर्षोंसे भुसावल में रेलवे के प्रोजेक्ट्स के आश्वासन ही बरस रहे है। पहले LHB कोचेस का ओवर हाउलिंग यार्ड बनाए जाने का आश्वासन मिला था। लम्बी चौड़ी जगह इसके लिए तैयार रखी गयी, बादमे पता लगता है, यह प्रोजेक्ट नागपुर शिफ्ट हो गया है। उसके बाद चर्चा चली मेमू यार्ड बनाए जाने की लेकिन वह प्रोजेक्ट भी पिछले प्रोजेक्ट की तरह हवा हो गया। कहाँ गया इसका भी पता नही लग पाया। खैर, यह DFC कॉरिडोर के प्रोजेक्ट की घोषणा स्थायी लग रही है, DPR का अप्रूवल मिल चुका है और उसका काम शुरू होने को है।

इस प्रोजेक्ट से भुसावलवासियोंको बहोत उम्मीदें है। वैसे भी भुसावल शहर में से एशियन 4+2 हाइवे जा रहा है, बिजली निर्माण केंद्र है, बारामाह पानी लाने वाली ताप्ती मैय्या है। कंटेनर डिपो है, हतनुर डैम है, शेलगाँव डैम निर्माणाधीन है याने पानी की कोई किल्लत नही। MIDC की बड़ी जगह प्रोजेक्ट्स के लिए खाली पड़ी है। रेलवे की खुद की बड़ी खाली जमीनें किसी बड़े प्रोजेक्ट के आने का इंतजार कर रही है। व्यवस्थाएं सारी है, बस किसी की पारखी नजरें इनायत हों इसका इंतजार है।

EWSDFC कॉरिडोर की वजह से यहाँपर बड़े वेयर हाउसेस, ट्रांसपोर्ट हब बनाए जाने की संभावना लग रही है। बड़े इंडस्ट्रियल हब इन्दौर, औरंगाबाद, नाशिक जैसे, भुसावल से मात्र 200/300 किलोमीटर की रेंज में है। आशा है, यह प्रोजेक्ट जल्द से जल्द शुरू हो और भुसावल का नाम देशभर में रौशन हो।

मंजूरी का पत्र
प्रोजेक्ट मैप

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