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आ गया ज़ीरो बेस्ड टाइमटेबल!

बीते छह महीनोंसे तमाम मीडिया और रेल यात्रिओंमें चर्चित भारतीय रेलवे का महत्वाकांक्षी, ज़ीरो बेस्ड टाइम टेबल आखिरकार 1 दिसम्बर से लागू हो गया है। अब आप पुछेंगे, इसकी अधिकृत घोषणा कब हुई? क्या ऐसा कोई परीपत्रक रेलवे के द्वारा आया है, या ऐसा कोई टाईम टेबल प्रकाशित किया गया है? जी नही! ऐसी कोई अधिकृत घोषणा रेल प्रशासन के द्वारा नही आयी और ना ही कोई टाइम टेबल छपा है। फिर?

वही तो चक्रव्यूह है। पिछले 8-10 दिनोंसे हर एक क्षेत्रीय रेलवे, मीडिया में, अखबारोंमें सूचनाएं जारी करते जा रहा है, फलाँ गाड़ियाँ बदले समयोंमे चलाई जाएगी। सोशल मीडिया में परीपत्रक आ रहे है उसमें लिखा होता है zbtt या TTZB के तहत इस गाड़ी के समयोंमे बदलाव हुवा है। वैसे ही आम रेल यात्री इस पेशोपेश में है, कौनसी गाड़ियाँ चल रही है और कौनसी बन्द है। उसमे कही कोई खबर, अखबार या सोशल मीडिया में आती है तो उसका सम्भ्रम इस कदर बढ़ जाता है, जैसे कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु।

क्या आप को पता है, आज कुल 1204 गाड़ियाँ चलाई जा रही है। कौन कौनसी? भारतीय रेल में उपनगरीय गाड़ियोंकी गिनती छोड़ दे तो सवारी गाड़ी से लेकर राजधानी तक ढेरों वर्ग की गाड़ियाँ चलती है। मेल/एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, शताब्दी, हमसफ़र, गरीबरथ, अंत्योदय, गतिमान, तेजस, डबलडेकर, राजधानी ऐसे कई वर्ग, प्रकार है। लेकिन इन दिनों सिर्फ दो प्रकार की गाड़ियाँ चल रही है, फेस्टिवल स्पेशल और स्पेशल ।

फेस्टिवल स्पेशल गाड़ियाँ वह है, जिन्हें 30 नवम्बर तक ही चलना था और बची सारी गाड़ियाँ जिनके नाम मे “त्यौहार, फेस्टिवल” नही है, वह स्पेशल। यदि आप थोड़े से होशियार है, तो इन गाड़ियोंमे फर्क समझ जाएंगे। फर्क जानना इस लिए जरूरी है, की यह जो त्यौहार वाली गाड़ियाँ है, इनके किराए स्पेशल गाड़ियोंसे सव्वा, डेढ़ गुना ज्यादा है, याने स्पेशल गाड़ियोंमे किराया ₹200/- लग रहा है तो इन फेस्टिवल स्पेशल्स में ₹250 से 300 लगेगा। है न दिवाली? 😊

खैर! यात्रिओंको जरूरत थी, गाड़ियाँ वैसे ही गिनीचुनी चल रही है, क्या करे बेचारा? जो है, जैसी है कुछ भी किराया लगे टिकट बनवाओ और निकलो। अब यह 30 नवम्बर तक चलनेवाली फेस्टिवलोंको, एक महीना की बढ़ोतरी दी गयी है। यह गाड़ियाँ जनता की अपार माँगपर 30 दिसम्बर तक बढ़ाई गई है। लेकिन बीच मे यह ZBTT शून्य आधारित टाइम टेबल को भी लागू करना था तो जो भी गाड़ियाँ चल रही है, उनके परीपत्रक निकाल निकाल रेलवे ने उनके समयोंमे, दिनोंमें, टर्मिनल्स में परिवर्तन किया जा रहा है ऐसी सूचनाएं जारी करना शुरू कर दिया। यह सारी सूचनाएं लोकल न्यूजपेपर्स में छपती है, जिस एरिया की रेलगाड़ी उस एरिया के अखबार में रेलवे के विज्ञापन आते है। अब आप महाराष्ट्र में अखबार पढ़ेंगे तो उसमें बाकी राज्योंकी गाड़ियोंके बदलाव खान मिल पाएंगे? हालाँकि रेलवे की टिकट बुकिंग साइट्स पर और बाकी अधिकृत वेबसाइटों पर भी रेलवे के टाइमिंग्ज सुधार किए जाते है, लेकिन कौन रोज यह साइट्स खंगालता है? या कितनी गाड़ियोंके शेड्यूल्स आप देख पाओगे? रेलवे ने चाहिए कि बदलावोंकी समरी याने एकत्रित समयसारणी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना चाहिए।

अब जो भी गाड़ियोंके बदलाव किए जा रहे थोड़ा उनके तरफ भी देखते है। यह बदले हुए टाइमिंग्ज इतने त्रुटिपूर्ण और असंबद्ध है की इनसे जानकारी मिलना तो दूर बल्कि यात्री कोमा में ही चला जाए। जरा यह देखिए,

इसमें 02720 गाड़ी के मलकापुर से खण्डवा के समय देखिए। मलकापुर 6:50 और खण्डवा 7:37 याने कुल रनिंग समय 47 मिनट। अब आपको जानकर हैरानी होगी यह अंतर 167 किलोमीटर है जो हमारी रेल ज़ीरो बेस में सिर्फ 47 मिनटों में तय करेंगी याने स्पीड हुवा 213 kmph

और दूसरा

नासिक, इगतपुरी और कल्याण के समय देखेंगे तो आप चौंक जाएंगे। इस तरह हर गाड़ी देखेंगे तो बहोत सारी त्रुटियां मिलेंगी। ऐसे ऑनलाइन समयसारणी देखने से रेल यात्री के यात्रा का सुचारू नियोजन नही हो पाता।

हमारा रेल प्रशासन से आग्रह है, गाड़ियोंके टाइम टेबल में किए जाने वाले हर रोज के बदलाव पर नियंत्रण कर किसी ठोस, निश्चित पॉलिसी पर गाड़ियोंकी यातायात रखनी चाहिए, एक नियमित समयसारणी जारी करना चाहिए, भले ही वह छपी न हो, ऑनलाइन वेबसाइट पर ही क्यों न हो, लेकिन यात्री को पता तो चले कि कौनसी गाड़ियाँ अब नियमित रूपसे चलेंगी, कौनसे किराया दर सुचि से उसे किराया लगना है। और कितने दिन रेलवे अपने यात्रिओंको अनिश्चितता के झूले में हिंडोले देती रहेगी?

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