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अंधेर नगरी चौपट राजा … यात्री गाड़ियाँ सैंकड़ों, समयसारणी कोई नही!

युद्ध के क्षेत्र में हजारों सैनिक एक नियोजनबद्ध तरीके से अपनी चाल चलते है क्योंकि उनका मुखिया, सेनापति रणनीति के तहत उनको आदेश दे कर चलाता रहता है और यह सेनापति ना हो तो सारी सेना का नियोजन ढह जाता है। भारतीय रेल की हालिया स्थिति कुछ इसी तरह की है।

यात्री गाड़ियाँ शुरू होकर सैकड़ोंसे से हजारोंकी संख्या में पहुंच गई लेकिन स्थायी समयसारणी है ही नही। देश के लगभग सारे क्षेत्रोंमें यात्री गाड़ियाँ चल पड़ी है मगर यात्रिओंको यदि अपनी रेल यात्रा का नियोजन करना है तो उसे कागज पेन लेकर रेलवे की वेबसाइट को खंगालना पड़ेगा और इसके बावजूद जब तक वह अपनी यात्रा शुरू न कर दे तब तक भरोसा नही की कब रेल प्रशासन एक परीपत्रक जारी कर उसका समय या परिचालन में बदलाव कर दे।

दुनिया मे चौथी बड़ी भारतीय रेल, इस संक्रमण काल मे एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रही है। पहले दो ढाई महीने यात्री गाड़ियाँ बन्द थी फिर धीरे धीरे विशेष गाड़ियोंके नाम पर कुछ गाड़ियोंको शुरू किया गया। फिर त्यौहार विशेष गाड़ियोंके नाम पर और कुछ गाड़ियाँ चलने लगी। यहाँतक तो काफी कुछ ठीक था पुराने गाड़ियोंके नम्बर्स में शुरवाती आंकड़े की जगह ज़ीरो लग कर यह गाड़ियाँ अपने नियोजित शेड्यूल्स में ही चल रही थी। रेल प्रशासन भले ही इनको स्पेशल कह चला रही थी, यात्री उन्हें पुराने नामोंसे समझकर, उसकी पुरानी समयसारणी के हिसाब से अपनी यात्रा का नियोजन कर रहा था।

बीच मे ही रेल प्रशासन का ज़ीरो बेस टाइमिंग्ज लागू करने का प्रयोग शुरू हो गया। गाड़ियोंके क्रमांक अलग होने लग गए, उनके टर्मिनल्स बदलने लगे, समयसारणी में 2 घंटे से लेकर 12-12 घण्टों तक बदलाव आने लगे और यह सारा परिपत्रकोंके सहारे बिना किसी समयसारणी के चलाया जा रहा है। समयसारणी यह यात्री और रेल प्रशासन के बीच सेतु का काम करती है। यात्री को जब भी रेल यात्रा करनी है तो वह समय सारणी देखता है, और अपनी यात्रा का नियोजन करता है। समयसारणी के बगैर गाड़ियोंकी स्थिति ऐसी है कि बिना सेनापति के सैन्य। आम यात्रिओंको समझ ही नही आता कौनसी गाड़ियाँ चल रही है, उनके नम्बर्स क्या है, कब कहाँ पोहोचेंगी, कनेक्टिंग दूसरी गाड़ी कैसे मिलेगी। भला वेबसाइट या मीडियामे आनेवाले परीपत्रक को देख नियोजन करें तो आए दिन रेल प्रशासन की ओर से बदलाव किए जा रहे। हाल ही में मुम्बई वाराणसी मुम्बई महानगरी का उदाहरण लीजिए। 11093/94 का नम्बर 01093/94 चल रहा था, समयसारणी भी पहलेवाली ही थी। अचानक एक परीपत्रक आता है, गाड़ी का समय बदला जा रहा है, फिर परीपत्रक आता है फलाँ तारीख से गाड़ी का नम्बर 02193/94 हो रहा है और गाड़ी सुपरफास्ट श्रेणी में चलेगी। अब आप वेबसाइट देखोगे तो गाडीका समय तो बदल गया लेकिन नम्बर अभी भी 01093/94 ही है। तो 02193/94 नम्बर का क्या हुवा और सुपरफास्ट स्टेटस का क्या?

08401/02 पूरी ओखा पूरी एक्सप्रेस का समय बदल गया, यह गाड़ी अपने नियोजित समयसारणी से अब करीबन 4-6 घण्टे पहले चलेगी। यात्री इस पेशोपेश में है, वह क्या करें? रेल प्रशासन कहती है, उन्होंने सभी आरक्षित यात्रिओंको sms भेज समय बदलाव सूचित किया है। यात्री कहता है, उसे कोई sms नही मिला। ऐसी स्थितियों कई यात्रिओंके साथ आ रही है, उनकी गाड़ियाँ, उनको लिए बगैर छूट रही है। बहोत असमंजस भरी परिस्थितियाँ है।

रेलवे को चाहिए, भले ही सोशल मीडिया में दे या अपने वेबसाइट पर दे लेकिन जितनी गाड़ियाँ चलाई जा रही है उन्हें एक जगह अनुसूचित करें और उसी हिसाब से गाड़ियाँ चलाए। यह जरूरी नही की गाड़ियों की भरमार हो, सारी गाड़ियाँ चलनी चाहिए, मगर जो भी चल रही है उनकी जानकारी सूचीबद्ध होना नितांत आवश्यक है। नही तो “अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा” ऐसी स्थिति रेल, उसके कर्मचारी और उसमे यात्रा करनेवाले यात्रिओंकी बनकर रह जाएगी।

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