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भारतीय रेल में निजी गाड़ियाँ, एक दृष्टिकोण

भारतीय रेल में निजी ट्रेन के विरोध में कई वीडियो, मैसेजेस सोशल मीडिया में घूम रहे है। मगर जनता को बरगलाने के सिवा कुछ ज्यादा नही है इसमें।

जो लोग निजी ट्रेन्स के खिलाफ बोलते है, यह भूल जाते है की वही रेलवे के आधुनिकीकरण, अतिरिक्त लाइने, नई गाड़ीयाँ, मार्ग विस्तार के लिए सदा आग्रही रहते है। आप किसी रेलवे प्रवासी संघ को देख लीजिए, आपको यही सारी मांगोंकी फेहरिस्त मिल जाएगी। यहाँतक की देश के गणमान्य राजनीतिक भी इन मांगों के समर्थन में पत्र भेजते रहते है।

हमारे देश की भाग्यरेखा, जीवनरेखा कहलाने वाली भारतीय रेल वित्तीय संकटों से जूझ रही है, यह पता होते हुए भी किसी यात्री उपभोक्ता संघ ने, रेलवे जो अपने हर टिकट पर छापकर जताते रहती है कि 40 प्रतिशत से भी ज्यादा रियायत वह टिकटोंपर दे रही है, कभी उस विषयपर चर्चा नही की और ना ही उस विषय मे रेलवे को कोई सुझाव दिया। आज भी भारतीय रेल के किराए किसी भी सार्वजनिक परिवहन में सबसे कम ही होंगे।

भारतीय रेलवे अपने विशालकाय नेटवर्क को आधुनिकता की ओर ले जाना चाहती है और इसके लिए उसको ढेर सारे निधि की जरूरत है। जब रेलवे ने देखा की उनकी आय ज्यादातर मालवहन से आ रही है तो उसके लिए अमूमन 83,000 करोड़ रुपए के समर्पित गलियारोंकी रचना की गई। पूर्व और पश्चिम मालवहन गलियारा लगभग तैयार हो चुका है और कुछ हिस्सेपर गाड़ियाँ दौड़ने भी लग गयी है। इसी तरह पूरे देश के मालवहन मार्ग का अभ्यास कर और 6 समर्पित मालवहन गलियारोंकी रचना की जा रही है। धन के आपूर्ति हेतु, रेलवे ने अपनी इकाइयों के निजीकरण की शुरुवात करी। आईआरसीटीसी, रेल विकास निगम लिमिटेड ऐसी कम्पनियों में निजी निवेश खोला गया। हवाईअड्डों की तर्ज पर, स्टेशनोंके निजीकरण व्यवस्था की जा रही है। आज कोई भी समझ सकता है, भारतीय रेलवे स्टेशन की सेवाओंमें कितना सुधार हुवा है। अब निजी ट्रेनोंके चलाने की भी बात की जा रही है।

सोशल मीडिया में, निजी ट्रेन के विरुद्ध कहते हुए, यह कोई नही कह रहा की निजी ट्रेन की वजह से लगभग 30,000 करोड़ की आय होगी। यह बात सरासर गलत है की निजी ट्रेन चलने की वजह से नियमित ट्रेन बन्द होगी, जबकी रेल प्रशासन ने बिल्कुल कह दिया है, कोई भी नियमित गाड़ियोंका परिचालन बन्द नही होगा अपितु सवारी गाड़ियोंकी जगह मेमू ट्रेनों में वृद्धि ही होगी।

एक तर्क यह भी है, रेल कर्मियोंको नौकरियों से कम किया जाएगा। किसी भी व्यापार, व्यवसाय में वृद्धि होती है तो कर्मचारियों की बढ़ोतरी ही होती है। जब निजी गाड़ियाँ बढ़ेगी तो रेलवे के केवल कमर्शियल कर्मचारी निजी ट्रेन में भरती नही होंगे बाकी ऑपरेटिंग स्टाफ़ और रेल लाइन की देखभाल करने वालोंकी ज्यादा भर्ती ही कि जाएगी। आप देख सकते है DFCCIL में बहुत सारी नौकरियां निकली है।

निजी ट्रेनोंसे यात्रिओंकी सुविधामे बढ़ोतरी ही होगी। आपने आईपीएल के क्रिकेट मैचेस तो देखे होंगे, उसमे कई विदेशी खिलाड़ी सहभागी होते है और आप यह भी जान चुके होंगे की उनकी सहभागिता से हमारे खिलाड़ियों का स्तर कितना सुधरा है, कितने खिलाड़ी हमारे देश मे आगे आए है। ठीक उसी तरह का फायदा इन निजी ट्रेनों को देश विदेश की जानी मानी कम्पनियों के परिचालित करने से भारतीय रेल को होगा। अत्याधुनिक सुविधा, अव्वल दर्जे की हॉस्पिटलिटी, तेज गति से चलनेवाले आरामदायक कोचेस और सबसे बड़ी बात ढेर सारी अतिरिक्त गाड़ियाँ। इसके लिए विद्युतीकरण, अतिरिक्त रेल लाइने बिछाई जा रही है। इन गाड़ियोंके बीच मे हमारी नियमित गाड़ियाँ, अतिरिक्त मेमू गाड़ियाँ भी चलती रहेगी।

जब हम हमारे घर का कुछ हिस्सा किराएपर चढ़ा देते है तो उसके पीछे होने वाले फायदे, परेशानी सब चीजोंको ध्यान में रखते ही है। एक तरफ अतिरिक्त आय, अत्याधुनिक परिचालन स्टॉक्स से हमारे कर्मियोंकी पहचान, यात्रिओंको आरामदायक और अतिरिक्त रेल सेवा यह सब मिलने वाला है। इसके ऐवज में हो सकता है की इन गाड़ियोंको हमारी प्राइम टाइम गाड़ियोंके स्लॉट्स, हमे देना पड़े। खैर, देखते है आगे आगे होता है क्या।

1 thought on “भारतीय रेल में निजी गाड़ियाँ, एक दृष्टिकोण”

  1. Pray, Where are new private trains going to get passengers. They will attack Rajdhani or equivalent to get passengers. One hand we say we dont have capacity in trunk routes another hand we want to create choking points with high speed trains. Please give all spur lines to private sector. Let them run full efficiency there. I have no hassle if dedicated freight lines are used by new private trains. So ask yourself following basic questions to say yes or no to private trains
    1) Will they choke existing line capacity?
    2) How they will attract new passengers?
    3) Would they run commitment for 5 years or pay penalty if they don’t run?
    4) Will they bring their own coaches?
    5) Related to question 3- Give guarantee of employment to their employees by running
    6) Will they pay true infrastructure price of use of tracks and related facilities?

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