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आखिर यह म. रे. सुनती क्यों नहीं ?

महाराष्ट्र राज्य का बहुतांश रेल मार्ग मध्य रेल के कार्यक्षेत्र मे पड़ता है। चूंकि संक्रमण काल मे तमाम सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के नियोजन की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन के तहत आनेवाले ‘आपदा प्रबंधन समिति’ के जिम्मे है, तो रेल्वे मे यात्री किस तरह यात्रा कर सकेंगे इस पर भी उनका ही नियंत्रण है। जब जब उन्होंने निर्बंध लगाए या छूट दी उसी प्रकार से रेल प्रशासन अपनी यात्री व्यवस्था मे बदलाव करते जा रहा था, यात्री गाडियाँ भी आपदा नियंत्रण समिति की निगरानी मे ही बढाई गई और टिकट आबंटन भी उसी प्रकार शुरू किए गए। लेकिन रेल प्रशासन ने आपदा नियंत्रण समिति के 30 अक्टूबर के पत्र का अनव्यार्थ अपने हिसाब से लिया है, उसे केवल मुम्बई उपनगरीय क्षेत्र में ही लागू किया है। वह पत्र क्या है, जरा आप भी देखीए,

उपरोक्त पत्र के दूसरे पैराग्राफ के दूसरे वाक्य पर गौर कीजिए, ‘As one time ticketing was allowed on long distance passenger trains before too, this relaxation means that all fully vaccinated citizens may travel in local and passenger trains on all routes and through all kind of tickets that may be issued by railways, including daily ticketing.’ इसका रेल प्रशासन क्या अर्थ निकालती है? चलिए इसे हिन्दी मे रूपांतरण करते है, “चूंकि लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों में पहले भी एक बार टिकटिंग की अनुमति थी, इस छूट का मतलब है की, सभी पूरी तरह से टीकाकरण वाले नागरिक, सभी मार्गों पर स्थानीय (उपनगरीय) और यात्री ट्रेनों में यात्रा कर सकते हैं और दैनिक टिकट (साधारण द्वितीय श्रेणी) सहित रेलवे द्वारा जारी किए जा सकने वाले सभी प्रकार के टिकटों के माध्यम से यात्रा कर सकते हैं।”

क्या राज्य प्रशासन की आपदा नियंत्रण समिति मुम्बई के लिए अलग और मुम्बई के अलावा राज्य के लिए अलग नियम लगाकर, अलग से और पत्र जारी करेगी?

गैर उपनगरीय क्षेत्रों मे मेल/एक्स्प्रेस और सवारी /डेमू / मेमू गाडियाँ ही चलाई जाती है, जब सभी मार्ग और सभी तरह के टिकटिंग जारी करने की सूचना दे दी गई है तो और कौन सी अलग से अनुमति की राह रेल प्रशासन तक रही है?

डेली टिकटिंग का अर्थ है ‘साधारण द्वितीय श्रेणी’ टिकट। क्या राज्य आपदा समिति को प्रत्येक अनुमति शब्दश:, रेल्वे की परिभाषा मे देनी होंगी?

महाराष्ट्र की सर्व साधारण जनता यातायात के लिए बहुत परेशान है, मेल/एक्स्प्रेस के 1 या 2 साधारण डिब्बों मे आरक्षण नहीं मिल पाता, अनारक्षित टिकट रेल प्रशासन ने शुरू ही नहीं किए, MST बंद है, साधारण सवारी गाडियाँ नहीं चल रही बची खुची कसर राज्य परिवहन निगम के हड़ताल ने पुरी कर दी। अब बेचारा यात्री क्या करें?

रेल प्रशासन आपदा नियंत्रण समिति के पत्र को अपने हिसाब से परिभाषित कर रही ही। पूरे देश भर मे अनारक्षित टिकट शुरू हो गए है, MST पास जारी हो गए है, अनारक्षित गाडियाँ डिब्बे खोले जा चुके है और यहाँ महाराष्ट्र मे मध्य रेल पता नहीं क्या करना चाहती है? राज्य आपदा नियंत्रण समिति ने अपने परिवहन के लगभग सारे निर्बंध मे छूट दे दी है बसों मे, टैक्सीयोंमे पूर्ण यात्री क्षमता से चलाने की अनुमति है, रेल मे कहाँ से निर्बंध रहँगे?

मध्य रेल प्रशासन को चाहिए की, मिली अनुमति का पुनर्वलोकन करे और महाराष्ट्र के सर्वसाधारण यात्रीओं पर कृपा कर अनारक्षित टिकट और अनारक्षित गाड़ियाँ अपने कार्यक्षेत्र मे जल्द से जल्द चलवाए।

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