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रेल ठहरावोंकी की पुनर्बहाली हेतु ‘नेपानगर’ मे रेल यात्रीयोंका आन्दोलन जारी

“संक्रमण ने सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली बल्कि बचे हुए जीवित लोगों का जीना भी बेहाल कर दिया है।” म प्र के एक सरकारी औद्योगिक इकाई वाले शहर नेपानगर के लोगोंके यह बोल है। नेपानगर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक महत्वपूर्ण छोटा शहर है। सन 1948 मे स्वतंत्र भारत की सबसे पहली नुजपेपर मिल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा यहाँ पर स्थापित की गई थी।

संक्रमण पूर्व काल मे बेहतर कनेक्टिविटी वाले नेपानगर मे दो जोड़ी 51187/88 एवं 51157/58 भुसावल कटनी, भुसावल इटारसी ऐसी सवारी गाडियाँ चलती थी और इसके अलावा 12321/22 मुम्बई हावड़ा मेल वाया इलाहाबाद, 22177/78 मुम्बई वाराणसी महानगरी, 13201/02 लोकमान्य तिलक टर्मिनस पटना जनता एक्स्प्रेस, 15017/18 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर काशी एक्स्प्रेस, 22537/38 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर कुशीनगर एक्स्प्रेस, 11057/58 मुम्बई अमृतसर पठानकोट एक्स्प्रेस यह प्रतिदिन चलनेवाली गाडियाँ नेपानगर स्टेशन पर रुकती थी, जिनमेसे अब केवल कुशीनगर और पठानकोट एक्स्प्रेस ही रुक रही है। दो जोड़ी सवारी गाड़ियों मे से केवल एक जोड़ी भुसावल इटारसी सवारी जो की मेमू स्वरूप मे शुरू की गई चल रही है। 4 जोड़ी प्रतिदिन चलनेवाली गाड़ियोंका स्टोपेज संक्रमण काल निगल गया है ऐसी नेपानगरवासियोंकी धारणा है और भुसावल नागपूर के बीच वाया इटारसी होकर चलनेवाली त्रिसाप्ताहिक बाबाधाम एक्स्प्रेस अब तक भी पटरी पर नहीं लाई गई है।

दरअसल संक्रमण मे गाड़ियों का बंद होना और दोबारा जब गाडियाँ शुरू की गई तो रेल विभाग की पूर्वनियोजित ZBTT शुन्याधारित समयसारणी की संकल्पना नेपानगर के ठहराव के आड़े या गई। इस शून्याधारित समयसारणी मे कई स्टॉपजेस का रद्द करना, सवारी गाड़ियोंको मेमू एक्स्प्रेस मे तब्दील करना, आम मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंको अपग्रेड कर सुपरफास्ट मे बदलना इत्यादि निर्धारित किया गया था। 11093/94 महानगरी एक्स्प्रेस, 11015/16 कुशीनगर एक्स्प्रेस यह दोनों गाडियाँ सुपरफास्ट कर दी गई, इनके स्टोपेज कम और गति, समयसारणी भी बदली गई। बीच के स्टेशनों पर शंटिंग ना करना पड़े इसलिए कई सारी लिंक एक्स्प्रेस और स्लिप कोच सर्विस भी बंद कर दी गई और डर है की, शायद इसी नियमावली के अंतर्गत 22111/12 भुसावल नागपूर के बीच वाया इटारसी त्रिसाप्ताहिक बाबाधाम एक्स्प्रेस को पटरी पर नहीं लाया जाएगा।

खैर यह तो रेल विभाग, भुसावल मण्डल के परेशानियों की बात हो गई, मगर नेपानगरवासी रेल्वे के इस तुग़लकी निर्णय से सकते मे है। सोचते है, आखिर ऐसा कौनसा गुनाह हो गया की बरसों चल रहे ठहरावों को रेल विभाग ने अचानक ही बंद कर दिया? अब शहर के यात्री संगठित होकर पुराने ठहरावों को पुनर्स्थापित करवाने के लिए आन्दोलन कर रहे है, सांसद, विधायक राजनेताओं को अपने ज्ञापन सौंप रहे है।

हाल ही मे 1200 करोड़ रुपये लगाकर नेपा पेपर मिल का आधुनिकीकरण किया गया है, पेपर मिल मे निर्माण क्षमता बढ़ाकर 1 लाख मैट्रिक टन न्यूज प्रिन्ट पेपर बनने जा रही है। स्टाफ और व्यापार, रोजगार बढ़ने के आसार है मगर रेल प्रशासन के ऐसे निर्णय यहाँके नागरिकों को निराश कर देते है। यहाँतक हताशा है, की जो दो जोड़ी पठानकोट एक्स्प्रेस और कुशीनगर एक्स्प्रेस के ठहराव भी प्रायोगिक ठहराव ही है और 3-3 महीने मे आगे बढाए जा रहे है, डर है की कहीं यह ठहराव भी बंद न कर दीए जाएँ! ऐसे मे अन्य गाड़ियोंके स्टॉपजेस बढ़ाने की बजाय पुराने ठहराव भी रद्द करने मे रेल और राज्य प्रशासन कौनसा विकास साधने जा रही है, यह समझ के परे है।

Photo courtesy : indiarailinfo.com, internet

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