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अभी तो भईया, आदेस निकला है। लागू होवे को कछु समय तो लगेगा की नाही?

हैं! जी, बिल्कुल भी गलती मत करना। अपने चद्दर, बिस्तर साथ लेकर ही वातानुकूलित रेल यात्रा करना।

दरअसल रेल प्रशासन ने “तत्काल” स्वरूप से लागू ऐसा आदेश जारी कर कह दिया, की वातानुकूलित कोचेस में लिनन, कम्बल, नैपकिन और परदे संक्रमनपूर्व स्थिति के भांति यात्री सेवा में उपलब्ध होंगे।

अब दिक्कत यह है, दो वर्षोंसे यह सारी व्यवस्था बन्द पड़ी थी। सामग्री बची कहाँ है, यात्रिओंको देने के लिए? और जै बची भी है तो देनेलायक या यूं कहिये उपयोग के लायक नही रह गयी है। कम्बल, तकिये, लिनन, परदे सब ढंग में लाना, उनके धुलाई हेतु यांत्रिक धुलाई व्यवस्था फिर से दुरुस्त करना, सामग्री सप्लाई, पैकिंग, रखरखाव आदि के कॉन्ट्रेक्ट का नुतनी करण होना है और इसके लिए एखाद, दो महीना लगना उचित है।

यात्रीगण से हम आग्रह करते है, यदि आपकी रेल यात्रा वातानुकूलित कक्ष में निर्धारित है तो कृपया अपने बेडरोल की व्यवस्था निश्चित कर ले चाहे वह आपकी व्यक्तिगत ही क्यों न हो, अन्यथा आपको रेल यात्रा के दौरान बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे के बेडरोल सम्पूर्ण तयः शुरू होने में 15 अप्रेल तक का समय लग सकता है, ऐसी चर्चा है।

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