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कैग की भारतीय रेल पर रिपोर्ट और भारतीय रेल की परिचालन मजबूरीयाँ

CAG अर्थात कंट्रोलर एण्ड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यह भारत के संविधान द्वारा स्थापित एक प्राधिकारी है जो भारत सरकार तथा प्रादेशिक सरकारों द्वारा प्रस्तुत सभी लेखों का अंकेक्षण करता है।

हाल ही मे CAG ने भारतीय रेल पर बनी एक रिपोर्ट कल संसद के पटल पर रखी गई, जिसमे भारतीय रेल के ‘मिशन रफ्तार’ प्रोजेक्ट पर कडा प्रश्नचिन्ह उपस्थित किया गया है। वर्ष 2008 से लेकर 2019 तक भारतीय रेल ने अपने बुनियादी ढांचे पर ढाई लाख करोड़ रुपयों का खर्च किया उसके बावजूद परिणामों मे कोई खासा सुधार नजर नहीं या रहा है।

भारतीय रेल ने वर्ष 2016 मे ‘मिशन रफ्तार’ नामक एक योजना तय की थी, जिसके अंतर्गत मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियों विद्यमान औसत गति 50 kmph को बढ़ाकर 75 kmph करना और मालगाड़ियोंकी औसत गति 25 kmph को बढ़ाकर 50 kmph करना निर्धारित किया गया। कैग ने इस योजना के कार्यान्वयन पर उंगली उठाई है। वर्ष 2021 तक रेल्वे के परिचालन मे केवल संयुक्तिक 0.18% सुधार दर्ज किया गया जिसमे मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंकी औसत गति मे 0.18% याने 50 से बढ़कर 50.6kmph सुधार हुवा तो मालगाड़ियों के सुधार के आँकड़े निगेटीव्ह आए है। वहाँ 25 की जगह 23.6 याने -9.75% गति सुधरी? है।

भारतीय रेल प्रशासन की परेशानियाँ देखेंगे तो गति मे 160 kmph तक सुधार करने की मूल योजना 1960 से शुरू की गई थी मगर हर बार लक्ष्य की तिथि को आगे बढ़ा बढ़ाकर आज तक भी उस लक्ष्य को अछूता रख रखा है। जब कैग ने गाड़ियों की गति के लिए नई दिल्ली – हावड़ा खंड अभ्यास के लिए चुना तो उन्हे एक अजीब सी स्थिति दिखी। रेल्वे के सुरक्षा मानक कहते है, किसी एक ब्लॉक मे केवल एक ही गाड़ी चलना चाहिए मगर समयसारणी मे मांग के दबाव मे एक ब्लॉक सेक्शन मे कई गाडियाँ चलाई जा रही है। जिन्हे रेलवे की भाषा मे विवाद कहा जा सकता है, सिर्फ उदाहरण के लिए चुने गए खण्ड मे 12,500 ऐसे मामले मिले। कैग की सिफारिश यह थी की वैज्ञानिक तरीकेसे समयसारणी की पुनर्रचना की जाए ताकि इस तरह के विवाद टाले जा सकें। यहाँपर शून्याधारित समयसारणी की संकल्पना का निर्माण हुवा।

शून्याधारित समयसारणी मे 4 तरह की गाड़ियोंका समूह बनाया गया है। राजधानी और उस प्रकार की HST हाई स्पीड ट्रेन – 130 kmph, मेल/एक्स्प्रेस – 110 kmph, मेमू – 100 kmph और EMU 96 kmph अब इनका वर्गीकरण करना है तो स्टेशन टर्मिनल की कमी, रखरखाव के लिए पर्याप्त समय, मुख्य ट्रेन टर्मिनल्स पर दबाव, और आरंभिक स्टेशनों से गाड़ी छोड़ने / गंतव्यों पर पहुँचने का लोकप्रिय समय संभालने की कवायद इतनी सारी मदों को ध्यान मे रखते हुए शून्याधारित समयसारणी मे बदलाव लाने मे खासी परेशानी होने वाली है। उसमे जो जो स्टॉपजेस शून्याधारित समयसारणी की मांग अनुसार रद्द करने का प्रयास किया जाता है, राजनीतिक दबाव के कारण वह भी असफल हो रहे है।

कैग इन मामलोंमे सिफारिश करती है, रेल्वे के परिचालनिक समयसारणी मे ZBTT का प्रयोग किया जा रहा है तो नई दिल्ली – हावड़ा खण्ड के 12466 विवादों मे 4900 विवाद तकरीबन 5 – 5 मिनिट के परिचालन समस्या वाले थे जिन्हे आसानी से निपटाया जा सकता था मगर बचे हुए 7566 मामले बड़े पेचीदा थे। 1) 130 kmph वाली गाड़ी के सामने 110 kmph वाली गाड़ी का चलना, 2) मेल/एक्स्प्रेस के सामने EMU/MEMU का चलना, 3) मेमू गाड़ियों का सुस्त समयसारणी, अनियमित अनुमति का कारण गाड़ियोंका असंगत परिचालन, 4) आगे चलने वाली गाड़ियों का अवकालिक ठहराव व अनियमित कारणों से रुका रहना, 5) तीव्र गति की गाड़ियोंको वरीयता देने के लिए अवैज्ञानिक तरीकेसे साइड ट्रैकिंग कराना, 6) प्रमुख टर्मिनलों पर प्लेटफॉर्मों का कुप्रबंधन इन छह मुद्दों पर रेल प्रशासन को काम करने की सिफारिशें कैग समिति करती है।

मालगाड़ियों को समयसारणी मे अंतर्भूत करना, अतिरिक्त स्टॉपेजेस पर नियंत्रण करना, लंबी दूरीकी गाड़ियोंके स्लिप कोचेस, लिंक सेवा हटाना, ZBTT की सिफारिशों के अनुसार गाड़ियोंका परिचालन करना इस तरह के काम रेल प्रशासन ने अपने कार्यशैली मे लाना शुरू कर दिया है। जो बुनियादी ढांचे मे अढ़ाई लाख करोड़ रुपये का खर्च किया गया है, उसमे पटरियाँ बिछाना, रेल विद्युतीकरण करना, मालगाड़ियोंके लिए अतिरिक्त गलियारों का निर्माण करना, ROB/RUB बनाकर लेवल क्रॉसिंग हटवाना, पादचारी पुल का निर्माण, हाई स्पीड पटरियों के दोनों तरफ सुरक्षा दीवारों का निर्माण इसके अलावा आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली विकसित करना इत्यादि काम किए जा रहे है।

रेल प्रशासन अपने तरफ से भरकस प्रयास कर रही है। कुछ समय और लग सकता है, बाधाएं बहुत है, रेल स्टॉक का निर्माण भी जोरोंपर है, हाई स्पीड लोको, सेल्फ प्रोपलड़ रैक, LHB कोच, मेमू गाडियाँ, सम्पूर्ण विद्युतीकरण यह सब उसी दिशा मे किए जाने वाले काम है।

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