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समर्पित मालगाड़ी गलियारा और भारतीय रेल : अरब और ऊँट

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर भारतीय रेल के अलावा DFCCIL डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड याने मालगाड़ियोंके लिए समर्पित रेल गलियारा, जिसपर केवल मालगाड़ियोंका ही परिवाहन किया जाएगा। इस DFC की और भारतीय रेल की रेल लाइने एक ही गेज BG की है, डिब्बे, लोको भी एक ही तरह के है बल्कि DFC ज्यादा उन्नत है। इस मार्गपर भारतीय रेल द्वारा प्रशिक्षित और उनमें कार्यरत परिचालन स्टाफ ही काम कर रहा है। मित्रों, फिर विषय है क्या? आइए बताते है, दरअसल कल भारतीय रेल ने इस DFC के ट्रैक पर अपनी यात्री गाड़ियाँ यदि ‘अनिवार्यता’ रही तो चलाने की अनुमति ले ली। निम्नलिखित पत्र देखिए,

अब आप सोच रहे होंगे, इस DFC और IR के बीच अरब और ऊँट कहाँसे आ गए? मित्रों, पंचतंत्र की कहानी है अरब और ऊँट। कहानी में दयालु अरब अपने तम्बू के बाहर बन्धे ऊँट को धूप और गर्मी से बचने के लिए सिर्फ सिर ढांक सके इतनी सी जगह देता है और देखते ही देखते सिर, आगे के दो पैर, पेट, पीठ यूँ करते करते पूरा ऊँट तम्बू के अन्दर और अरब जगह की कमी के चलते तम्बू से बाहर यह हालात हो जाती है। कहानी की तात्पर्य यह है, की मालिक कोई और लाभ ले कोई और।

इस बात को विस्तार से समझने के लिए हमे DFCCIL को थोड़ा समझना होगा। DFC में फिलहाल दो भाग है, EDFC और WDFC पूर्व और पश्चिम समर्पित गलियारा। EDFC की कुल लम्बाई 1873 किलोमीटर की है और WDFC की 1504 किलोमीटर। EDFC का मार्ग खुर्जा, भाऊपुर, दीनदयाल उपाध्याय नगर, लुधियाना – दादरी, दीनदयाल उपाध्याय नगर – सोननगर ऐसे है तो WDFC का रेवाड़ी – वड़ोदरा – JNPT जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट मुम्बई ऐसा है। आप मैप देख सकते है.

यह DFC अतिउन्नत तकनीक से बनाया जा रहा है। भारतीय रेल पर 4.26 मीटर ऊंचाई और 3200 मिलीमीटर चौड़ाई तक की माल लदान की अनुमति है जबकि DFC पर 7.1 मीटर ऊंचाई उपलब्ध होने के कारण दोहरी/तिहरी मंजिल तक एवं 3660 मिलीमीटर चौड़ाई के कन्टेनर्स का लदान किया जा सकता है। भारतीय रेल पर ज्यादा से ज्यादा 700 मीटर लंबी गाड़ी चलाई जा सकती है (हाल ही मे जो पायथन, वासुकि वगैरे मालगाडियाँ चली उन्हे एण्ड टू एण्ड चलाना पड़ता है ) तो वहीं DFC पर 1500 मीटर लंबी गाड़ी चलाई जा सकती है। ट्रेन लोड की बात की जाए तो IR पर 5400 टन तो DFC पर 13000 टन की क्षमता है। भारतीय रेल पर माल गाड़ियोंकी अनुमानित अधिकतम गति 75 kmph (?)और DFC पर अधिकतम गति 100 kmph उपलब्ध है। नवंबर 2021 के आँकड़े देखे जाए तो EDFC पर 8700 और WDFC पर 6020 मालगाड़ियाँ चल चुकी है। हजारों करोड़ की लागत का यह मालगाड़ी समर्पित गलियारा हमारे देश की महत्वकांक्षी परियोजना है। आप निम्नलिखित मैप देखिए आनेवाले दिनों मे किस तरह देशभर मे इस DFC का जाल फैलाया जानेवाला है।

जब रेल मंत्रालय का यह पत्र सोशल मीडिया मे आया तो तमाम रेलप्रेमियों के मन मे एक बात कौंध गई कहीं यह ‘अरब और ऊँट’ वाली कहानी तो नहीं सिद्ध होने जा रही? ऐसा न हो की भारतीय रेल की यात्री गाडियाँ धीरे धीरे ऊँट की DFC की लाइनों पर कब्जा जमाने लग जाए? हमने यह बात तज्ञोंसे समझने का प्रयत्न किया तब उन्होंने कहा की भारतीय रेल केवल मजबूरी, आपात स्थिति मे ट्रेनों का डायवर्जन के वक्त ही, ट्रैफिक क्लियरेन्स के लिए DFC का उपयोग करेगी। DFC के प्लेटफॉर्म्स बहुत कम ऊंचाई के और माल लादने के लिए ट्रॅक और क्रेन के हिसाब से बनाए गए है, यात्रीओंकी यातायात के लिए कतई उपयुक्त नहीं है। DFC के पास अधिसूचित “स्टेशनों” पर भी उपयुक्त प्लेटफॉर्म होने की संभावना नहीं है और प्राथमिक प्लेटफॉर्म यात्री सुविधाओं से रहित होंगे। सबसे मूल बात, DFC के अधिकारीयों को खुद ही यात्री ट्रेनों को स्वीकार करने में दिलचस्पी नहीं लेंगे क्योंकि आगे यात्री यातायात चलाने वाली भारतीय रेल ही मालभाड़े से उत्पन्न अर्जित कर यात्री किराये मे समायोजित कर अपना कारोबार खींच रही है।

मित्रों, DFC का जाल भले ही देश भर मे फैलने वाला है, और भारतीय रेल लाख चाहे मगर DFC के रेल मार्ग पर केवल पण्यवहन ही चलता रहेगा क्योंकी यह उसके लिए समर्पित है।

Map courtesy : dfccil journal

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