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झमेला दो जोनल रेलवे का और लटक गयी 19005/06 सूरत भुसावल सूरत गाड़ी का परिचालन

मित्रों, कल परसों की बात है। हमने आपके साथ पश्चिम रेल का एक परिपत्रक साँझा किया था। बड़ी खुशखबर थी, 59013/14 सूरत भुसावल सूरत सवारी गाड़ी के 19005/06 एक्सप्रेस रूप में पुनर्स्थापित होने की, मगर आज परे के मुम्बई मण्डल व्यवस्थापक DRM की ओर से उस गाड़ी की अनिश्चित काल स्थगित करने की सूचना ट्विटर पर जारी हो गयी।

मुम्बई मण्डल पश्चिम रेलवे की ओर से जारी ट्वीट

और यह उस गाड़ी के बुकिंग की ताज़ा स्थिति….

दो दिन पहले जारी हुवा था पश्चिम रेलवे की ओर से परिपत्रक

दरअसल गड़बड़ी कहाँ हुई, यह हम समझाने का प्रयास करते है। यह निम्नलिखित गाड़ी के सम्बंध में जारी किया गया मध्य रेल का परिपत्रक देखिए, स्थिति समझने जे लिए आपको रैक शेयरिंग वाला कैटेगरी का हिस्सा देखना होगा। दरअसल मध्य रेल ने जो पत्रक जारी किया उसमे 19005/06 का रैक शेयरिंग 11127/28 भुसावल कटनी भुसावल एक्सप्रेस से किया गया है। रैक शेयरिंग का चार्ट भी देखते है।

यह है, रैक शेयरिंग चार्ट। इसमे स्पष्ट किया गया है। 08 तारीख को रात 23:10 को 19005 सूरत से निकल 09 को सुबह 7:55 पर भुसावल पहुचेंगी। 09 को ही सुबह 11:10 को भुसावल से 11127 बन कर निकलेगी अगले दिन याने दिनांक 10 को कटनी पहुचेंगी। दिनांक 10 को रात 23:50 को 11128 कटनी से चलेगी और अगले दिन दिनांक 11 को शाम 18:35 को भुसावल पहुचेंगी। भुसावल से वही रैक 19006 भुसावल सूरत एक्सप्रेस बनकर शाम 19:35 को सूरत के लिए रवाना होगा और दिनांक 12 को प्रातः 5:15 को सूरत पहुंचेगा। इस तरह 1 रैक का फेरा होगा और यह गाड़ी प्रतिदिन चलाने कुल 4 रैक लगेंगे।

अब निम्नलिखित पश्चिम रेलवे का परिपत्रक देख लिजिए। उन्होंने 11127/28 से रैक लिंक की बात ही नही की है।

और तो और सबसे बड़ी गड़बड़ 19005/06 एवं 11127/28 इन दोनों गाड़ियोंके डिब्बा संरचना के फर्क की है। 19005/06 में 8 स्लीपर, 7 जनरल द्वितीय श्रेणी और 2 एसएलआर कुल 17 डिब्बे और 11127/28 भुसावल कटनी भुसावल एक्सप्रेस में 3 स्लीपर, 5 द्वितीय श्रेणी सिटिंग, 2 वातानुकूलित थ्री टियर और 2 एसएलआर कुल 12 कोच यह डिब्बा संरचना है। मध्य रेल अपने परिपत्रक में लिखता है, प रे से विनंती है, (डिब्बों की) कमी को पूरा करे। 😢

अब पश्चिम रेल के मुम्बई मण्डल ने 19005/06 इस गाड़ी को ही अनिश्चित काल के लिए रद्द कर दिया जो 08 जून से चलना शुरु करनेवाली थी।

इस बाबूगिरी के खेल में बेचारे रेल यात्री फिर एक बार हार गए है।

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