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यह कैसी आपाधापी, की यात्री उपभोक्ता समिती को क़ानूनपालन की मांग करनी पड़ी?

यूँ तो भारतीय रेल के किसी भी आरक्षित कोच में वीना आरक्षित यात्री का यात्रा करना अनुमतिपात्र नही है, मगर आजकल रेल विभाग का वाणिज्यिक चेहरा टिकट चेकिंग स्टाफ़ बड़े धड़ल्ले से अनारक्षित यात्रिओंको जुर्माने की रसीद काट कर आरक्षित यानोंमें यात्रा करने की अनुमति बांट रहा है।

मध्य रेल के कई स्टार्टिंग स्टेशनोंमें यह बात अक्सर देखी जा रही है। मुम्बई, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, पुणे इत्यादि स्टेशनोंपर गाड़ी अपने प्रस्थान पूर्व समय से प्लेटफार्म पर लगती है और यह गोरखधंधा शुरू हो जाता है। वैसे अनारक्षित यात्री चलती गाड़ी में आरक्षित कोच में यात्रा करते हुए पाया गया तो उसे कानूनन दण्डित किया जाना चाहिए मगर यह क्या, यहाँपर तो बाकायदा प्लेटफॉर्म पर ही जांच दल अनारक्षित यात्रिओंको पेनाल्टी काट काट कर आरक्षित कोचों में यात्रा करने का परमिट बाँट रहे है।

यह आपाधापी दरअसल इसलिए होती है, क्योंकी रेल विभाग अनारक्षित यात्री को दण्डित तो करता है मगर उन्हें कोच से उतारता नही है या सजा के लिए न्यायिक प्रक्रिया को नही अपनाता। इस तरह कोच में 72/80 यात्रिओंके बीच सैकड़ों अनारक्षित यात्री अपने अपने ‘दण्ड युक्त परमिट’ लेकर यात्रा करते रहते है। गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशनपर ही शयनयान की यह भयावह स्थिति रहती है की अधिकृत यात्री बेचारा अपनेआप को सिमटकर यात्रा करते रहता है और बाथरूम टॉयलेट का उपयोग भी करने से कतराता है।

चूंकि प्रारम्भिक स्टेशन पर ही अनाधिकृत यात्रिओंपर कोई कार्रवाई नही हुयी इसीलिए आगे प्रत्येक जांच स्टेशन या जाँच कर्मी उस ‘दण्ड युक्त परमिट’ को देख कर कोई कार्रवाई नही करते और इसी खचाखच वाली स्थिति में गाड़ी गन्तव्य तक अपनी यात्रा पूरी करती है। ज्यादातर यह स्थिति उप्र, बिहार, पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जानेवाली गाड़ियोंमें होती है। इन गाड़ियोंमे एक आरक्षित यात्री और उसके साथ 4-6 अनारक्षित यात्री होते है जो किसी तरह की कोई शिकायत नही करते।

हाल ही में उत्तर रेलवे के वाणिज्यिक अधिकारियों ने भी मध्य रेल के जांच दल के इस तरह के आचरण पर बड़ी आपत्ति उठाई थी। प्रारम्भिक स्टेशनपर सुरक्षा बल और सारी व्यवस्थाओंकी उपलब्धता होने के बावजूद जाँच दल इस तरह काम कर के अपने ‘टार्गेट्स’ के लिए ऊँचे ऊँचे झंडे गाढ़ अवॉर्ड्स प्राप्त करें और मुसीबत रेल में यात्रा करनेवाले यात्री झेले यह कहाँ का न्याय है?

कोई यात्री शिकायत भी करे तो ऐसी पेनाल्टीधारियोंकी भीड़ को किसी दूसरे कोच में मात्र खदेड़ दिया जाता है और यात्रा चलती ही रहती है।

आखिरकार यह प्रश्न क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता समिति ने अपनी मीटिंग के दौरान क्षेत्रीय अधिकारियों के सामने रखा और साथ ही रेल मंत्री को भी इस विषयपर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

रेल अधिनियम भी यही कहता है, की आरक्षित यान में अनारक्षित यात्री पेनाल्टी भर कर भी यदि आरक्षित कोच में उसे आरक्षित जगह का आबंटन नही किया जा सकता है तो वह उस कोच में यात्रा करने योग्य नही है। उसे उसके टिकट के योग्य वर्ग में ही यात्रा करनी होंगी। और इसी नियम के तहत क्षेत्रीय उपभोक्ता सदस्य, रेल अधिकारियों से जाँच दलोंके इस तरह आरक्षित कोच में अनाधिकृत यात्रिओंको ठूंसने का विरोध कर रहे है।

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