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भरोसा खोती भारतीय रेल!

मित्रों, मैं भारतीय रेल का “डाय हार्ट” रेल फैन हुँ और कोई मेरे रेल को कुछ उल्टा-सीधा कहे उस बात से नफरत करता हूँ। मगर बीते 3-4 माह से हावड़ा – नागपुर – मुम्बई मार्ग की गाड़ियोंकी चल स्थिति देखी जाय तो बात बहुत चिंताजनक है।

SECR दपुमरे में गाड़ियोंका परिचालन भयावह तरीकेसे बिगड़ा है। हावड़ा मुम्बई वाया नागपुर मार्ग की लगभग सभी यात्री गाड़ियाँ कमसेकम 4 से 15 घंटे देरीसे चलाई जा रही है। इसका कारण कोल ट्रैफिक से शुरू हुवा था। एक समय था की यह मार्ग पर मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंको दरकिनार कर कोयले की मालगाड़ी भगाई जा रही थी। वक्त की नजाकत, माँग थी, यात्री सहते चले गए और गाड़ियाँ देरी से चलते रही।

अब दपुमरे में पूरे झारसुगुड़ा से लेकर नागपुर तक जगह जगह रेल अनुरक्षण, तीसरी लाइन की जोड़तोड़ का काम बड़े ज़ोरोंपर किया जा रहा है। आये दिन एक खण्ड निपटा की अगले खण्ड का परिपत्रक हाजिर ही रहता है। फलाने दिन से फलाने दिन तक इतनी इतनी गाड़ियाँ रद्द। भई, यह चल क्या रहा है? बिलासपुर से राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर के लिए पहले ही नाममात्र सम्पर्कता है और देखा जाय तो पूरे वर्ष के 365 दिनोंमें शायद ही यह गाड़ियाँ अपने 50% भी फेरे कर पाई हो!

हावड़ा मुम्बई के बीच मेल, एक्सप्रेस, गीतांजली, ज्ञानेश्वरी, आजादहिन्द जैसी गाड़ियाँ लगातार अंटसन्ट समयोंपर चल रही है। इस क्षेत्र के रेल यात्रिओंका रेल प्रशासन के समयपालन प्रति भरोसा लगातार टूटता जाना बिल्कुल वाज़िब लगता है। जहाँ मुम्बई, पुणे के जाने के लिए यात्री इन गाड़ियोंका नियोजन करते थे अब मजबूरी में एक दिन पहले की गाड़ी में आरक्षण करा रहे है। रात पहुंचने वाली गाड़ियाँ दिन में और दिन में पहुँचने वाली गाड़ियाँ अब रात में अपने गन्तव्यों पर पहुंच रही है।

यह बात सच है, की रेल विकास और अनुरक्षण हेतु यह गाड़ियाँ पिट रही है मगर यह भी बात उतनी ही सच है, यात्री सुविधाओं को बिल्कुल ही नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है, की रेल प्रशासन ने यात्रिओंके समय की कद्र करना ही छोड़ दिया है। रेल रद्दीकरण की सूचनाएं आननफानन में लगाई जाती है। यात्रिओंको समय ही नही मिलता की वह अपनी रेल यात्रा का पुनर्नियोजन सुचारू रूपसे कर सके। रेल प्रशासन मार्ग की कुछ गाड़ियाँ रद्द कर कुछ गाड़ियाँ शुरू रखता है, मगर जो गाड़ियाँ रद्द नही और चल रही है उनका परिचालन इस तरह किया जाता है की यात्री यह सोचने मजबूर हो जाता है, आखिर वह इस गाड़ी में यात्रा क्यों कर रहा है?

हमारी उन तमाम रेल यात्रिओंकी ओर से, रेल प्रशासन से हाथ जोड़कर विनंतीपूर्वक गुजारिश है, आप आधी गाड़ियाँ रद्द कर चुके है और जो चला रहे उनमें से चाहे तो और कुछ बन्द कर दीजिए मगर जो चला रहे उन्हें ढंग से चलाए। ब्लॉक की घोषणा समुचित अवधि रख कर करा कीजिये ताकि बेचारा (? ) यात्री समय रहते अपनी यात्रा में बदलाव कर अपने कार्यस्थल, साक्षात्कार, परीक्षाओं पर पहुंच सके।

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