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रेल यात्री गाड़ियोंका लगभग सम्पूर्ण वातानुकूलिकरण किया जा रहा है।

भारतीय रेल धीरे धीरे आम यातायात सेवा से खास सेवा बनती जा रही है। आगे क्या होगा यह तो पता नही मगर अभी ही सवारी गाड़ियाँ रेल सेवा के पटल से नदारद हो चुकी है और उसके साथ ही सस्ती रेल यात्रा भी उड़नछू हो गयी है।

जिन क्षेत्रोंमें उपनगरीय रेल सेवा नही चलती उन क्षेत्रोंके लिए सवारी गाड़ियाँ, जो दिनभर में कमसे कम दो गाड़ियाँ, सुबह और शाम में चलती ही थी। अब उनका रूप, नाम, किराया सब बदल चुका है। यह गाड़ियाँ मेमू/डेमू एक्सप्रेस बन गयी है। जिनकी न ही औसत गति एक्सप्रेस के बराबर है न ही पड़ाव घटे है। जो पड़ाव रद्द किए गए है, उन स्टेशनोंके यात्री अलग परेशान है तो पुरानी सवारी गाड़ियोंकी ही समयावधि के लिए एक्सप्रेस के मूल्य का किराया चुकाना पड़ रहा है इसलिए नियमित टिकटधारी यात्री परेशान हो रहे है।

जहाँ गैरउपनगरीय क्षेत्रोंमें कम दूरी की, सभी स्टेशनोंपर रुकनेवाली गाड़ियोंकी जरूरत है और हमारे नेतागण प्रीमियम गाड़ियोंकी माँग, आग्रह जता रहे है। यह वातानुकूलित गाड़ियाँ क्या आम जनता को पुसानेवाली है? यह तो छोड़िए, रेल विभाग की नई डिब्बा संरचना सुनेंगे तो आप भौंचक रह जाओगे।

01 कोच वातानुकूलित प्रथम/द्वितीय या पूर्ण प्रथम (H या HA)

04 कोच वातानुकूलित द्वितीय (2A)

10 कोच वातानुकूलित तृतीय या वातानुकूल तृतीय इकोनॉमी (3A + 3M )

02 कोच स्लीपर (SL)

02 कोच द्वितीय साधारण, जनरल (GS)

01 पेंट्रीकार

01 एसएलआर

01 EOG जनरेटर

कुल 22 कोच, यदि गाड़ी में पेंट्रीकार मान्य न हो तो क्षेत्रीय रेल अपने संज्ञान से किसी भी वर्ग का कोच जोड़ सकती है।

इस विषय का परिपत्रक क्रमांक CC/70/2022 दिनांक 03/06/2022 का आगे दे रहे है।

मित्रों, तो आगे अपनी रेल यात्रा के लिए अपनी जेबें ज्यादा ढीली करने की तैयारी कर के रख लीजिए। क्योंकी 02 कोच स्लीपर में आपको आरक्षण मिलना बेहद मुश्किल है, जो 10, 12 कोच में ही नही मिलता था और वही कथा सामान्य द्वितीय श्रेणी अनारक्षित कोच, जिनकी संख्या भी 02 ही रहने वाली है।

आगे रेल विभाग वातानुकूलित 3 टियर में इकोनोमी श्रेणी का अविष्कार कर के अपनी पीठ थपथपाता है की उन्होंने 3 टियर वातानुकूलित कोच के किरायोंसे लगभग 7 से 8 % कम किराये में यात्रिओंके लिए बड़ी ‘इकोनॉमी’ उपलब्ध कराई है। जो की सांख्यिकी दृष्टिकोण से भले ही रेल विभाग को ज्यादा लगती होगी मगर अकेले या परिवार के साथ याटा करनेवाले यात्री को कुछ इकोनॉमी का एहसास नही करा पाती। यही फर्क 20 से 25 % रहता तो यात्री उसे अलग श्रेणी या इकोनॉमी श्रेणी मान सकता था।

खैर, जबरन नामकरण ही कर दिए है, तो बोलेंगे भाई “इकोनॉमी”। बात फर्क ही महसूस करने की है तो 3 टियर वातानुकूल के किराये 15% बढ़ जाएं और इकोनॉमी के वहीं के वहीं रहे तो फिर “इकोनॉमी” का फील आ ही जायेगा। ☺️

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