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4 जोड़ी गाड़ियोंके टर्मिनल्स में बदलाव! मगर यात्रिओंपर संकट नही।

उपरोक्त परिपत्रक देखिए, 19167/68 साबरमती एक्सप्रेस सप्ताह में 4 दीन और जोधपुर – वाराणसी के बीच चलनेवाली मरुधर बहने इन 4 जोड़ी गाड़ियोंको वाराणसी जंक्शन की जगह अब वाराणसी सिटी स्टेशनपर टर्मिनेट करने का निर्णय लिया गया है।

गौरतलब यह है, की यह सारी गाड़ियाँ वाराणसी जं. से वाराणसी सिटी तक विस्तारित हो जाएगी। अर्थात अब वाराणसी जंक्शन पर ठहराव लेकर आगे बढ़ेगी। हम, रेल प्रशासन के इस तरह के टर्मिनल्स बदलाव के निर्णय की प्रशंसा करते है। मध्य रेल या इतर रेल्वेज में टर्मिनल्स बदलाव के वक्त मुख्य स्टेशन की सेवा खण्डित हो कर उसे पूर्व स्टेशनपर ही टर्मिनेट करने का निर्णय लिया जाता है। कुछ उदाहरण देखते है।

मध्य रेलवे का नागपुर स्टेशन। नागपुर जंक्शन के दोनों ओर टर्मिनलों का प्रावधान है। मध्य रेल का अजनी टर्मिनल और दूसरी ओर दपुमरे का इतवारी टर्मिनल। दपुमरे की गाड़ियाँ नागपुर आने से पहले ही इतवारी में टर्मिनेट हो जाती है और मध्य रेल की अजनी में। दोनोंही ओर के यात्री नागपुर जैसे अत्यंत सुविधाजनक जंक्शन सेवा से वंचित रह जाते है। खैर यहाँपर नागपुर के दोनों टर्मिनल स्टेशन अलग अलग क्षेत्रीय रेलवे के है। मगर पुणे में ऐसा नही है।

आइए, पुणे जंक्शन की व्यवस्था देखते है। ठीक इसी तरह कुछ पुणे जंक्शन के नवनिर्मित टर्मिनल की भी कथा है। पुणे के लिए हड़पसर टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है। यदि कोई लम्बी दूर की गाड़ी हड़पसर में टर्मिनेट होती है तो यात्री को पुणे जाने के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था की तरफ देखना पड़ता है। मुम्बई से पुणे रेल यात्रा के दौरान खड़की, शिवाजीनगर स्टेशन को भी टर्मिनल बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। रेल विभाग को चाहिए की, मुम्बई से पुणे की इन्टरसिटी गाड़ियोंको पुणे जंक्शन पर 5 मिनट का स्टोपेज दे कर हड़पसर में टर्मिनेट करे और दौंड से पुणे की ओर आने वाली गाड़ियोंको शिवाजीनगर, खड़की में टर्मिनेट करने की व्यवस्था करें। यह मुख्य जंक्शन की कनेक्टिविटी को कायम करने के लिए बेहद जरूरी है, अन्यथा उस जंक्शन स्टेशन का क्या उपयोग जिसपर गाड़ियाँ पहुंचने से पहले ही टर्मिनेट हो जाती है?

इसी तरह अहमदाबाद का साबरमती टर्मिनल, जोधपुर का भगत की कोठी टर्मिनल, भोपाल का रानी कमलापति टर्मिनल सूची में आ जाते है। यह कथा उन सारे मुख्य रेल मार्ग के बीच मे पड़ने वाले जंक्शन स्टेशन की है, जो अब बड़े शहर होने के कारण रेल टर्मिनल बनते गए और व्यस्तता के कारण उनके 5/10 किलोमीटर अगलबगल में नए टर्मिनल का विकास किया जा रहा है। रेल प्रशासन को चाहिए की ऐसे स्टेशनोंपर 2 अप/डाउन प्लेटफार्म ऐसे हो जिसपर गाड़ी आए, 5 मिनट रूके और किसी अगले स्टेशनपर जाकर टर्मिनेट की जाए। इसके लिए चाहे तो उपरोक्त जंक्शन स्टेशन के यार्ड/पिटलाइन/ लोको शेड का भी स्थानांतरण किया जा सकता है।

जंक्शन स्टेशन को जंक्शन की तरह उपयोग में लाए जाने के लिए इस तरह के निर्णय रेल प्रशासन को लेना नितांत आवश्यक है।

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