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रेल गाडियाँ देरी से क्यूँ चलती है?

रेल गाड़ियाँ लेट होने की सबसे बडी वजह है, जंक्शन स्टेशनोंपर उनका ज्यादा ठहराव और इन्ही जंक्शन पर प्लेटफॉर्म जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।

जंक्शनोंपर आम तौर पर सभी गाड़ियाँ कमसे कम 10 मिनट तो रुकती ही है। रेल यात्री डिब्बोमे पानी भरना, साफ सफाई करना, लाईट्स शुरू करना बंद हो तो मरम्मत करना इन सब बातोंके अलावा यात्री सुविधा देनेवाले स्टाफ की बदली होना, ट्रेन ड्राईवर और गार्ड की ड्यूटी बदली होना। ट्रेन की सुरक्षा मुक़म्मल जाँच होना यह सब रेगुलर काम है और इसके लिए 10 मिनिट लगना स्वाभाविक है। रेल यात्रा के दौरान 300 से 400 किलोमीटर पर पड़नेवाले जंक्शन्स पर यह सब काम नियमित तौर पर होते ही है। सभी गाड़ियोंमे यह सब काम करने के लिए, हर प्लेटफार्म पर एक टीम मौजूद होती है, जो की पूरे समय का पालन करते हुए अपना काम यथाशीघ्र तरीकेसे करते रहती है।

अब जब यह काम चलते रहता है तो पीछे गाडियाँ आ कर, सिग्नल न मिलने के कारण आउटर यार्ड में खड़ी हो जाती है। जब तक प्लेटफार्म खाली न हो, पहलेसे प्लेटफॉर्म पर खड़ी गाड़ी चल न पड़े तब तक उन्हें इंतजार करना होता है। कभी गाड़ियोंके चेकिंग में कुछ अनियमितता मिल जाए तो उससे निबटने में और भी देरी हो जाती है और इसी चक्कर मे गाड़ियां लेट होते चली जाती है।

रेल प्रशासन फौरी तौर पर गाड़ियाँ तो घोषित कर देती है, पर प्लेटफॉर्म्स की कमी, मेंटेनेन्स करने वाले स्टाफ की कमी और देरी से चलने वाली गाड़ियोंकी अनियमितता की वजह से देरी में और भी देरी बढ़ते ही चली जाती है।

कैग के निरीक्षण में यह टिप्पणियोंपर पर्याप्त प्लेटफॉर्मो और साइडिंग को बढ़ाए जाने वाले वाले मुद्दे पर विशेष जोर दिया था। आशा है की रेल प्रशासन इन टिप्पणियों पर ध्यान देकर गाड़ियोंकी समय अनियमितता पर अंकुश लगाएगी।

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