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ज़ीरो बेस टाइमटेबल के झटके, गाड़ियाँ होंगी शॉर्ट टर्मिनेट

रेल प्रशासन के परीपत्रक हमे मिला है, आराम से देखिए और समझिए क्या क्या बदलाव आने वाले है। कई गाड़ियोंके गन्तव्य घटाए जा रहे है, टर्मिनल स्टेशन बदले जा रहे है। ऐसा लगता है ज़ीरो बेस टाइमटेबल क्या ब्रांच लाइनोंकी गाड़ियोंको ज़ीरो कर देगा?

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किसान रेल मे भुसावल स्टेशन से चढ़ा 28 टन माल

देश की पहली किसान रेल आज भुसावल विभाग से शुरू हुई। यह गाड़ी देवलाली, नासिक से दानापुर (पटना) बिहार के बीच चलेगी।

आज के किसान पार्सल स्पेशल का भुसावल स्टेशनपर उत्साह से स्वागत किया गया। भुसावल से किसानोंने आज करीबन 28 टन माल दानापुर, सतना, कटनी और जबलपुर के लिए रवाना किया। इस पूरे लदान में निम्बू, हरी मिर्च, अदरक आदि सब्जियां थी और साथ ही प्लास्टिक चटाई का भी लोडिंग किया गया। चूँकि भुसावल डिवीजन से लासलगांव से प्याज और रावेर से केले के पूरे रैक भरे जाते है इसीलिए यह फल और प्याज की लोडिंग इस गाड़ीमे दिखाई नही दी। साथ ही देवलाली, नासिक, मनमाड़, चालीसगांव, जलगाँव और बुरहानपुर, खण्डवा के लोडिंग डिटेल्स आने बाकी है।

आशा है, आनेवाले दिनोंमें किसान रेल को और भी उत्स्फूर्त प्रतिक्रिया किसानोंकी ओरसे ज्यादासे ज्यादा माल लदान के स्वरूप में मिलेगी।

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देश की पहली ‘किसान रेल’ आज चलेगी

महाराष्ट्र के देवलाली ( नासिक ) से बिहार के दानापुर ( पटना ) के बीच किसान विशेष पार्सल गाड़ी आज से शुरू की जा रही है। रेल मंत्री पीयूष गोयल एवं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इसका व्हिडियो लिंक द्वारा शुभारंभ करेंगे।

महाराष्ट्र का नासिक, पुणे इलाका फल बागोंसे समृद्ध है। अंगूर, अनार, मौसम्बी, चीकू और हर तरह की सब्जियों का उत्पादन इस इलाके के किसान अपनी खेतोंसे लेते है। फल और सब्जियाँ नाशवान होती है और जल्द ही खराब होने लगती है। इस उत्पाद को यथाशीघ्र बाजारोंतक पोहोचाना जरूरी होता है। समयानुसार चलनेवाली किसान रेल इसी उद्देश्य से चलाई जा रही है, ताकि किसानोंके उत्पाद सही समयपर बाजरोंतक पहुंचे और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके। यह गाड़ी आगे केले के क्षेत्र, जलगाँव जिलेसे होकर गुजरेगी। रेल प्रशासन ने क्षेत्र के किसानोंसे यह आवाहन किया है, उनकी जरूरत के अनुसार कृषि उत्पाद के लदान हेतु, मार्ग के किसी स्टेशनपर आवेदन किया जाए तो स्टापेजेस दिए जा सकते है।

मध्य रेलवे प्रशासन ने किसानों का माल बुक करने के लिए देवलाली से दानापुर तक किसान स्पेशल पार्सल गाड़ी दिनांक 07.08.2020 से समयसारणीनुसार चलाने का निर्णय लिया है। इस पार्सल गाड़ी में फल, सब्जियां और नाशवंत फल याने जल्द खराब होने वाले सामान बुक कर सकते हैं। यह ट्रेन हप्ते में 1 दिन चलेगी।

गाडी क्रमांक 00107 डाऊन देवळाली से दानापूर यह गाडी हर शुक्रवार दिनांक 07.08.2020 से 28.08.2020 तक प्रस्थान स्टेशन देवलाली से सुबह 11.00 बजे निकलेगी और शनिवार को दानापूर शाम 18.45 बजे पोहोंचेगी।

देवलाली से चलने के बाद यह गाड़ी अलग अलग स्टेशनोंपर माल लदान के लिए रुकेगी। नाशिक – आगमन 11.10 / प्रस्थान 11.30, मनमाड – 12.35/12.55, जलगांव- 14.55/15.15,
भुसावल – 15.45/16.05, बुऱ्हाणपूर – 17.00 /17.20, खंडवा – 18.40 /19.00, आगे इटारसी, जबलपूर, सतना, कटनी, मनिकपूर, प्रयागराज छिवकी, वाराणसी, पंडित दिन दयाळ उपाध्याय नगर, और बक्सर पर रुकेगी।

वापसी में गाडी क्रमांक 00108 अप दानापूर से देवळाली यह गाडी हर रविवार दिनांक 09.08.2020 से दिनांक 30.08.2020 तक प्रस्थान स्टेशन दानापुर से दोपहर 12.00 बजे छूटेगी और सोमवार को देवळाली शाम 19.45 बजे आयेगी। स्टापेजेस बक्सर, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय नगर, वाराणसी, प्रयागराज छिवकी, मानिकपुर, सतना, कटनी, जबलपुर, इटारसी और आगे खंडवा आगमन 11.45 / प्रस्थान 12.05, बुऱ्हाणपूर – 13.25 /13.45, भुसावळ – 14.40/15.00, जळगांव – 15.30/15.50, मनमाड – 17.50/18.10, नासिक – 19.15/19.35 देवलाली को रात 19.45 को पोहोचेगी।

किसान का कृषि उत्पाद ही उसकी मेहनत का फल है और वह बाजारोंतक सुनियोजित ढंग से पहुंचे तभी उसका सही मूल्य मिल पाता है। रेल प्रशासन ने किसान रेल शुरू कर इसकी शुरवात कर दी है।

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कोंकण रेलवे पर परनेम टनल मार्ग अवरुद्ध, गाड़ियोंका मार्ग परिवर्तन

दिनांक 06 अगस्त से लेकर 20 अगस्त तक निम्नलिखित गाड़ियोंका मार्ग कोंकण रेलवे के बजाय पुणे, मिरज, लोंडा, मडगाव होकर रहेगा।

परनेम टनल अवरुद्ध
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आपत्ति…, नही यह तो इष्टापत्ति।

कुछ आपदाएं, आपत्तियाँ बेहद दुखदायी, वेदनामयी होती है। दुनियाभर आयी महामारी ने हजारों, लाखों जानें भक्ष्य ली, कइयोंको बेरोजगार कर दिया। लोगोंके कामकाज छीन गए, रोजीरोटी से वंचित हो गए। लेकिन इसके बाद भी जीवन कहीं रुकता है भला? कोई एक मार्ग पर अवरोध आए तो जल अपनी धार के लिए दूसरी ढलान ढूंढ ही लेता है।

आज इस महामारी की आपत्ती मे लोग अपने व्यवसायोंको, व्यापार को, रोजगार को नए रूप देकर आगे बढ़ाने का प्रयत्न कर रहे है। रोजगारोंके अवसर बदल रहे है, संस्थान, प्रतिष्ठान बदल रहे है।

रेलवे ने भी इस विपदाओं में अपने कई ऐसे काम निपटाए है, जिसे करना रेलगाड़ियोंकी व्यस्तता के कारण आसान नही होता। पटरियोंके रखरखाव, ट्रैकोंके डबलिंग, विद्युतीकरण, ऊपरी पैदल पुल, रेल अंडर ब्रिज, रेल ओवर ब्रिज हो सके उतने काम निपटाए जा रहे है। सबसे महत्वपूर्ण काम है 150 -160 वर्ष पुराने टाइमटेबल की पुनर्रचना करना। जब सारी गाड़ियाँ बन्द है, खास करके यात्री गाड़ियाँ तब इससे अच्छा अवसर क्या हो सकता है, ज़ीरो बेस टाइमटेबल बनाने का। आज तक कोई भी नई गाड़ी शुरू करने की बारी आती तो टाइम स्लॉट्स ढूंढे जाते थे और खाली जगह में गाड़ी को ठूँस दिया जाता था, फिर उस वजह से किसी गाड़ी को कही रोकना, तो कहीं मोड़ना तो कही तोड़ना भी पड़ता था। इस पुनर्रचना में सभी गाड़ियाँ खुल कर साँस, मतलब अपने वजूद के हिसाब से चलाई जाएगी। फालतू मे घंटो किसी सुपरफास्ट के लिए साइड होने की जरूरत न पड़ेगी।

एक बड़ा अवसर और मिला है रेल प्रशासन को, यह जानने का आखिर उनकी गाड़ियोंमे कितने यात्री चल रहे है? जी हाँ। फिलहाल द्वितीय श्रेणी टिकट बुकिंग बिल्कुल बन्द है, उसकी जगह आरक्षित द्वितीय श्रेणी याने 2S टिकट दिए जा रहे। हमारा रेल प्रशासन से आग्रह है, द्वितीय श्रेणी का अस्तित्व अब केवल EMU, MEMU, DMU तक सीमित कर दिया जाए।

रेल प्रशासन को पता होना चाहिए, उसने कौनसी गाड़ी के लिये कितने टिकट जारी किए है। 90, 100 यात्री की क्षमता वाले कोच में उतने ही लोग यात्रा करें तो उसे आप यात्रा कह सकते है, नही तो कोच की क्षमता से 4 गुना लोग यात्रा करते नजर आते है। डिब्बे के पैसेज में, सीट्स के ऊपर, सीट्स के नीचे, टॉइलेट एरिया में, यहाँ तक की टॉयलेट्स में भी 6-8 जन घुसे रहते है। किसी राजनेता ने हवाई जहाज के जनरल क्लास को कैटल क्लास कहा था, उन्होंने शायद भारतीय रेल का जनरल क्लास देख लिया होगा, भेड़, बकरियाँ भी शरमा जाए ऐसी भीड़ द्वितीय श्रेणी के डिब्बों में भरी होती है। दरवाजों में लटके लोग घंटो सफर (?) करते है। यह सब अनियंत्रित द्वितीय श्रेणी टिकट के आबंटन का नतीजा है। रेल प्रशासन को पता ही नही की उनकी किस ट्रेन में कितनी सवारियाँ यात्रा कर रही है।

जब सेकण्ड क्लास डिब्बेमे पैर धरने को जगह न हो, तो बेचारा यात्री, टिकट खरीद कर भी जगह न मिल पाए तो गैरकानूनी तरीकेसे यात्रा करने मजबूर हो जाता है, स्लिपर डिब्बे में, दिव्यांगों के डिब्बे में, महिलाओं के डिब्बे में अपनी ठौर ढूंढता है। जब तकलीफ़ोंकी हदें टूट जाती है तो सारे नियमोंको ताक पर रख, जहाँ जगह मिले वही यात्री चढ़ जाते है। अराजकता और भ्रष्टाचार की शुरुवात यहाँ से ही तो होती है। इसके बारे हम न ही बोले तो ठीक होगा, आगे विषयांतर होते चला जाएगा।

आज की स्थिति में रेल प्रशासन केवल और केवल आरक्षित टिकट जारी कर रही है। द्वितीय श्रेणी के भी टिकट 2S क्लास में बदल दिए गए है, जो बिल्कुल सही तरीका है इस आपत्ति काल को इष्टापत्ति बनाने का। यही तरीका आगे भी चलता रहा तो रेल यात्रा में अनुशासन बना रहेगा। न सिर्फ स्लिपर, वातानुकूलित डिब्बे के यात्री अपनी अपनी जगहोंपर बैठ कर ढंग से यात्रा कर पाएंगे बल्कि द्वितीय श्रेणी के यात्री भी चैन की साँस ले पाएंगे। टिकट का जो मोल वह चुका रहे है, उसका सार्थक होगा।

हम रेल प्रशासन से पुनः आग्रह करते है, द्वितीय श्रेणी को अब इसी तरह आरक्षित ही रहने दिया जाए ताकी देश आम जनता रेल में सन्मानपूर्वक यात्रा कर सके।