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रेलवे की निजी ट्रेनोंके 3 क्लस्टर, जिनकी निविदाएं कल खोली गई।

कल एक खबर मीडिया में आयी थी, की निजी गाड़ियोंकी निविदाएं खोली गई। 29 रेल मार्ग, 40 रैक और करीबन 7200 करोड़ की लागत। खबर संक्षिप्त ही थी, मगर अनुमान लगाया जाता है तो यह मुम्बई का क्लस्टर नम्बर 2 और दिल्ली के नम्बर 1 और 2 ऐसे कुल तीन क्लस्टर की 29 जोड़ी गाड़ियाँ और शुरवात में निर्धारित की गई निवेश की राशी 7000 करोड़ इससे यही तीनों क्लस्टर समझ आते है। इनमें कौनसे मार्ग, कौनसी गाड़ियोंके लिए आवेदन आया है यह समझने के लिए हमें पहले क्लस्टरों में शामिल मार्ग, गाड़ियाँ देखना होगा।

मुम्बई क्लस्टर – 2

दिल्ली क्लस्टर – 1

दिल्ली क्लस्टर – 2

अब आप आसानी से समझ सकते है, कौनसी निजी गाड़ियाँ आने वाले दिनों में शुरू की जा सकती है।

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Bids for PPP in Passenger Train Operations project opened today.

Ministry of Railways

Bids from private and public sectors to operate 29 pairs of trains with around 40 modern rakes entailing an investment of around Rs 7200 crores.

Railways will expeditiously complete the evaluation and decide the bids.

Posted On: 23 JUL 2021 6:11PM by PIB Delhi

After detailed exercise and multiple rounds of discussion with the industry players, the bids for PPP in Passenger Train Operations project  are opened on 23 July 2021. This is an entirely new attempt to bring world class trains through Public Private Participation (PPP) in India.

Ministry of Railways has received bids from both private and public sectors to operate 29 pairs of trains with around 40 modern rakes  entailing an investment of around Rs 7200 crores. The Ministry of Railways will expeditiously complete the evaluation and decide the bids. 

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DJN/MKV

(Release ID: 1738241) Visitor Counter : 253

Courtesy: http://www.pib.gov.in

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द प रेल और कोंकण रेल्वे पर जलभराव; रद्द गाड़ियोंकी सूची

यात्रीगण कृपया तिथि पर ध्यान दीजिए, साथ ही अपनी रेल यात्रा का नियोजन, रेलवे की अधिकृत हेल्पलाइन, वेबसाइट या ऍप से जानकारी लेकर कीजिए।

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यह भी “योद्धा” ही है।

आप देश की सीमा पर तैनात वीर जवानोंके बारे अवश्य ही जानते है मगर इन के बारे में? शायद नही। ये है रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चाबीवाला।

यह कर्मचारी दिन और रात चौबीसौं घंटे रेल पटरियों की पहरेदारी करता है। ठण्ड, गर्मी या बरसात मौसम चाहे जो हो, रेल गाड़ी के सामने इनकी गश्त लगी रहती है। कन्धे पर लगभग 20 किलो का बोझ जिसमे स्लिपर पर पटरी को लॉक करने वाली चाबियाँ, हथौड़ा, रेल का टुकड़ा, जॉइंट क्लिप, सिग्नल दिया जाने वाली बत्ती, नट बोल्ट, उनको कसने के पाने ई. लाद कर यह आदमी पटरी को अपने औजार से बजाता चलता है। पटरी की एक छन्न कर के आवाज से इसे समझ जाता है, की कही कोई गड़बड़ी तो नही?

बरसात के दिनोंमें रेल पर मलबा जमने, जमीन खिसकने, बहाव से गिट्टी बह जाने की खबरें और उनके चलते गाड़ियोंको रोके जाना, दूसरे मार्ग से चलाना या रद्द करना यह सब निर्णय इन ‘रेल के योद्धा’ लोगोंके प्राथमिक निगरानी की बदौलत लिए जाते है। बहुत सी तकनीकी योजनाएं आती जा रही है, मगर आज भी यह रेल कर्मचारी की उपयुक्तता बिल्कुल भी कम नही हुई है।

रेलदुनिया की ओर से रेलवे के इस योद्धा को सादर नमन।