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गाड़ियोंमे एक्स्ट्रा डिब्बे

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मुंबई लोकल ट्रेन का टूरिस्ट टिकट

मुम्बई, मायानगरी, देश की आर्थिक राजधानी। हमारे देश मे शायद ही कोई ऐसा होगा जिसको मुम्बई देखने की आस न हो।

अमीर, गरीब, बेरोजगार, रोज़गार वाले, हुनरमंद, कलाकार सबको समा लेने वाली मुम्बई। बीमारोंके इलाज की आखरी उम्मीद मुम्बई।

पूरे देशमेसे हर तबके के लोग अपनी अपनी जरूरतोंको अंजाम देने मुम्बई का रुख करते है। किसी को दिनभर का ही काम रहता है तो किसी को 4 दिन रुकना होता है। कोई बड़ा इलाज कराने आए लोगोंको मुंबई में ही अलग अलग जगहोपर जाना आना पड़ता है।

मुम्बई में कहीं भी जाना हो, घूमना हो, लोकल ट्रेन सबसे बढ़िया और किफायती पर्याय है। लम्बी दूरी की यात्रा करके, फिर लोकल से जगह जगह घूमना, हर बार लाईन में लग के लोकल की टिकट लेना यह मुम्बई के बाहर से आए यात्रिओंके बस का काम नही। उसमे मध्य रेल की मेन लाइन, हार्बर लाइन, ट्रांस हार्बर लाइन और पश्चिम रेलवे की और अलग लाइन, बाहर से आए हुए यात्री का तो सिर ही चकरा जाता है। लेकिन इसका नामी इलाज रेलवे ने किया है।

रेलवे ने मुम्बई के कोई भी लोकल ट्रेन में घूमने के लिए एक टूरिस्ट पास का नियोजन किया है। मुम्बई आने वाले यात्री अपनी सहूलियत के हिसाब से 1, 2 या 5 दिन का टूरिस्ट टिकट निकाल सकते है। इस टिकट पर यात्री, टिकट की अवधि खत्म होने तक जो की रात 12 बजे खत्म होती है, चाहे जितनी और मुम्बई की सभी लोकल सेवा के किसी भी रूट पर, लोकल ट्रेन में यात्रा कर सकता है।

यात्री अपनी सुविधानुसार, द्वितीय श्रेणी या प्रथम श्रेणी का टिकट ले सकता है।

अग्रिम खरीदने की जरूरत हो तो अपनी यात्रा से ज्यादा से ज्यादा 3 दिन पहले भी खरीद कर रख सकते है।

टूरिस्ट टिकट में कोई रियायत, कन्सेशन नही दी जाती है और ना ही इसके अनयूज्ड दिन का कोई रिफण्ड यात्री को मिलेगा।

अग्रिम टिकट यदि कैंसिल करना हो तो यात्रा शुरू करने के दिनांक से एक दिन पहले कैंसिल हो सकता है। इस सूरत में यात्री को द्वितीय श्रेणी में ₹15/- और प्रथम श्रेणी के टिकट के लिए ₹30/- कैंसलेशन चार्ज काट कर बाकी पैसा रिफण्ड मिलेगा।

टिकट निकालते वक्त परिचय पत्र का नम्बर टिकट पर अंकित किया जाता है ताकी टिकट का इस्तेमाल कोई दूसरी व्यक्ति ना कर सके।

नीचे दिए गए फोटो से आपको किराए की जानकारी मिल जाएगी।

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राजधानी एक्सप्रेस में एक दिन, पार्ट-2

अब तक आपने पढ़ा, राजधानी एक्सप्रेस अपने स्टाफ और यात्रिओंके साथ नासिक तक पहुंची। अब आगे….

[ राजधानी एक्सप्रेस में एक दिन पार्ट-1 – https://wp.me/pajx4R-9g ]

18.55 नासिक 29 अप्रेल

मुम्बई नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस थोडीही देर में प्लेटफार्म नम्बर दो से चलने को तैयार है। अनाउंस हो रही थी।
“काकड़े साहेबांचा विजय असो” नारेबाज A1 तक पोहोंच गए, उनके काकड़े साहब A1 के दरवाजे में खड़े रहकर पब्लिक का अभिवादन करने लगे। इधर फ़िल्म हीरोइन माला और उसकी सेक्रेटरी भौचकसी, भीड़ को देख रही थी। उनको यकीन नही आ रहा था की उनके अलावा कोई कैसे इतना लोकप्रिय हो सकता है?
“सारा सामान B3 में चढ़ गया न? अब गाड़ी चलने पर शिफ्ट कर लेंगे। वो ब्लैक वाली ब्रीफकेस सम्भालना” अग्रवाल ग्रुप के लीडर में से कोई बोल रहा था। विक्की को टारगेट समझ मे आ गया था, अब उसकी आँखें जैसे अर्जुन को सिर्फ मछली दिख रही थी वैसे ही काली ब्रीफकेस पर गड़ी थी। वो भी B3 में लपक लीया था।

20.15 पासिंग चालीसगांव 29 अप्रेल

” सर डिनर इज रेडी, सुप लगा दु क्या?” बद्रीप्रसाद H1 और H2 के यात्रिओंको वेंडर को साथ लिए डिनर सर्व करने लगा था। C कूपे के यात्री की आर्डर उसे याद थी, इसलिए उसने उसका डिनर हॉट केस में रखवा दिया, C कूपे वाले ने रात 9 बजे डिनर सर्व करने का आर्डर दिया था। H2 का A कैबिन भोपाल तक तो चेकिंग स्टाफ़ के कब्जे में था। बद्रीप्रसाद अपना टिफिन साथ लाता था, शुद्ध शाकाहारी ब्राम्हण जो था, उसे पेन्ट्री का चाय तक नही जमती थी। वो गजानन जोशी को भ्रष्ट बम्मन कह छेड़ता था, हालाँकि उसे पता था गजा जोशी भी उसके जितना ही कर्मठ ब्राम्हण है। रोजीरोटी के लिए पेन्ट्री में काम करना पड़ता था, वेज नॉनवेज सब उसके निगरानी में ही तो लेना देना होता था।

CTI तिवारीजी A1 के बर्थ चेक करने नासिक के सांसद काकड़े के पास पहुंचे, उनको देखते ही माला बोली,” यहाँ शोर नही चलेगा, बोल देना नेताजी को।”
“मैडम, आप उन नेताजी को नही जानती न? आप को पता ही नही की काकड़े साहब आपके कितने बड़े पुराने फैन है। उनको जब पता चलेगा की आप उनके साथ, उनके सामने वाली बर्थ पर है तो आज वो पूरे स्टाफ को ट्रीट दे देंगे।” तिवारी जी ने तुक्का मारा।
इधर नेताजी, दरवाजे के कॉरिडोर में, अपने भक्तों के साथ, पहले से ही सात में से छठवे आसमान तक पहुंच गए थे और बचा खुचा कोटा अपनी जेब से निकाल कर झटपट पूरा करने की कोशिश में लगे थे।
जब तिवारीजी उनके पास पहुंचे तो उन्हें भी अपना स्टील फ्लास्क बताकर, भंवे उठकर पीने के इन्वाइट किया। तिवारीजी ने कहा, “नो, थैंक्स। ड्यूटी पर हूँ।
वैसे मंत्रीजी, आज आपके सामने वाली बर्थ पर आपकी कट्टर समर्थक बैठी है, आपको अपने देश का 1 नम्बर और सबसे लायक नेता मानती है। मेरे से झगड़ पड़ी, बोल रही थी काकड़े साब तो मंत्री नहीं प्रधानमंत्री होने चाहिए और उसके लिए आज उसने मौन रखा है। बोलती है कल दिल्ली में चमत्कार होगा।”
काकड़े साहब तो पहले ही झूम रहे थे, यह सुन कर तो गदगद हो गए। वैसे ही तिवारीजी के मुँह से मंत्रीजी का सम्बोधन सुन कर उनकी तबियत हरी हो गई थी।
“मास्टर, पहले मंत्री तो बनने दो, आगे देखते है क्या होगा और उसका मौन है तो हमारा भी सबका मौन रहेगा, सुना क्या कार्यकर्ताओ, ध्यान रहे कोई हल्लागुल्ला, शोरशराबा नही पाहिजे मला। शांत रहा, लोकांच्या प्रार्थना देवपर्यंत पोहचु द्या। आपल्याला गरज आहे बा त्याची।”
दोनोंके ईगो को ऊपर की हवा देके तिवारीजी का काम बन गया।

माइकल डिकोस्टा ने अग्रवाल ग्रुप को समझाया, सबसे पहले आप लोग अपने अपने जगहोपर बैठ जाओ। अपने टिकट और लिस्ट मेरे पास देदो, मैं चेक कर लूंगा। विक्की बीचमे कूद पड़ा,” मैं भी यही तो कह रहा हूँ इनको, लाओ अग्रवालजी, मेरे पास दे दो टिकटे, आप समान सेट करो, TTE साब का हिसाब मैं जमा दूँगा।” ” हाँ, बेटे प्लीज। आप बहोत मदत कर रहे हो, नहीं तो आजकल कौन किसके लिए इतना करता है? आपने हमारा सामान भी चढ़वाया, बड़े बुढोंको गाड़ी में अच्छेसे बिठवाया” एक सीनियर अग्रवाल बोला।

AC फर्स्ट के डिनर में रबड़ी यह डेजर्ट था। आज फूड कॉन्ट्रक्टर ने बोला ही था AC फर्स्ट वालोंके लिए अलग से पैकिंग है। सब रबड़ी मजेसे खा रहे थे सिवाय C कूपे, बद्रीप्रसाद और बाकी स्टाफ़ के।

21.20 जलगाँव 29 अप्रेल

भुसावल से आए, लोको पायलट और गार्ड ने अब राजधानी का चार्ज ले लिया था। अब यहाँसे 5 घंटे, लगभग 400 km तक गाड़ी का कोई स्टॉपेज नही था। सीधे भोपाल ही रुकना था। सब यात्री सोने की तैयारी में लग गए थे। डिनर की फाईबरवाली खाली प्लेटे वापस पेन्ट्री में जमा की जा रही थी।

21.55 पासिंग भुसावल 29 अप्रेल

मध्य रेलवे का सबसे बड़ा और महत्वका जंक्शन स्टेशन भुसावल। यह एकमेव गाड़ी है जो भुसावल में नही रुकती। गाड़ी थोड़ी स्लो जरूर हुई लेकिन रुकी नहीं।
के विठ्ठल, माइकल, पवार साब, तिवारीजी, बड़े मिया खान साहब सारे चेकिंग स्टाफ़ खाना खाने H2 के A कैबिन में आ गए। गजानन ने 6 थाली भिजवा दी थी और वह खुद H1 के अटेन्डेंट कैब में डिब्बा लेके बद्री का इंतजार कर रहा था। इधर बद्रीने H2 में सभी साहब लोगोंको खाना पकड़वाया और C कूपे वाले को आवाज दी। तभी खान साहब के वॉकी से आवाजें आने लगी, इमरजेंसी, ट्रेन के TS फौरन H1 में आए, इधर पेन्ट्री से भी कॉल था और B6 से भी अलर्ट की सूचना थी। माज़िद खान तुरंत उठे और H1 की तरफ दौड़े, पीछे सभी चेकिंग स्टाफ़ भी केबिन से निकल कोई पेन्ट्री और कोई B6 के तरफ निकले।

13.00 नई दिल्ली 30 अप्रेल

रेलवे बोर्ड, कमरा नम्बर 601
TS माजिद खान, CTI तिवारी, पेन्ट्री मैनेजर गजानन जोशी, अटेन्डेंट बद्रीप्रसाद सारे कॉरिडोर में बैचेनसे खड़े है। 10.45 को राजधानी एक्सप्रेस दिल्ली पहुँची और इन चारोंको जो मेमो मिला था उस हिसाब से तुरंत रेलवे बोर्ड में जबाब हेतु तलब किया गया था। अभी अभी हाथमे एक लेटर पकड़ाया गया था, जिसमे सभी को डिपार्टमेंटल इंक्वायरी के लिए 8 मई को मुंबई मुख्यालय में हाजिर रहने को बोला गया था। नासिक फूड कॉन्ट्रक्टर भुसे का कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रूपसे रदद् किया गया था। कन्डक्टर पवार की डीप इंक्वायरी के आदेश थे। क्षेत्रीय सुरक्षा आयुक्त जो H2 के A कैबिन के VIP यात्री थे, इंक्वायरी में शामिल होने वाले थे।

12.00 मुम्बई 1 मई

पैरेडाइज होटल, कमरा नम्बर 306 “जानेमन, दुबई की टिकट आज शाम की ही है न? कमसे कम दो महीने उधरीच रहना पड़ेंगा, कैश में काम हो जाएगा। सारे गहने उधर निपटा देंगे” माला बनाम आशा अपने ब्वायफ्रेंड विक्की से बात कर रही थी। नासिक में काली ब्रीफकेस में कमसे कम 65 लाख के गहने और 50 लाख कैश उसके हाथ लगा था। इसके अलावा कल की ट्रिप से और भी छोटा बड़ा कलेक्शन जमा हो गया था।

नासिक से जलगाँव के बीच अग्रवाल मैरेज पार्टी का सामान B3 से B6 में शिफ्ट करते हुए ब्रीफकेस कब A1 में माला बनी आशा के पास पहुंचा किसी को समझा ही नही।

चालीसगांव पास हो रहा था तब डिनर सर्व होना शुरू हुवा और जलगाँव से ट्रेन छूटने के बाद जिन जिन लोगोने रबड़ी खाई थी उनकी सबकी हालत उल्टियाँ कर कर के खराब हो गई थी।

रात 11 बजे, खांडवा स्टेशन पर राजधानी को 15 मिनिट रोका गया। सीरियस यात्रिओंको खण्डवा में दवाखाने शिफ्ट किया गया। एक मेडिकल टीम ने इटारसी तक कई सारे पेशंट की जांच की, दवांए, सलाइन दी गई।

इन सब हडबड़ी में विक्की, माला याने आशा और उसकी सेक्रेटरी बनी उनकी सहेली रिंकी तीनो खण्डवा उतर के मुम्बई लौटती गाड़ी में बैठ गए थे।

उनका खबरी, बंगाली बाबू दिल्लीसे फ्लाइट से आज ही लौट कर आया था। C कूपे वाले कपल राजा और मीना जो कल्याण से चढ़े थे वो भी कल तक उसी राजधानी से पैरेडाइज होटल पहुंचने वाले थे। रबड़ी में केमिकल मिलने का काम उनके जिम्मे था। डु नॉट डिस्टर्ब का टैग लगाके, राजा बीच बीच मे कई चक्कर पेन्ट्री और AC फर्स्ट के लगा रहा था।

AC मैकेनिक अब्बास ने अपने कॉन्ट्रक्टर से बोल दिया था की आगेसे वो सिर्फ साउथ साइड ही जाएगा, उसे दिल्ली रूट पर ना भेजे क्योंकी उसकी पहली बीबी जिसे उसने तलाक दे दिया था, भोपाल की थी और उसके फैमिली से उसे मारपीट होने का डर लगता है।

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राजधानी एक्सप्रेस में एक दिन पार्ट-1

15.00 मुम्बई छ शि म ट

माज़िद खान, एकदम समय के पाबंद, अपने कड़क यूनिफार्म में, अपनी ड्यूटी पर हाज़िर हो चुके थे। उनकी ड्यूटी, गाड़ी छूटने के समयसे 1 घंटा पहले शुरू हो जाती थी। गाड़ी के सभी रनिंग एमिनिटीज स्टाफ़ याने TTE, कन्डक्टर, AC का स्टाफ, पेन्ट्री का स्टाफ, सफाईवाला, इलेक्टिशियन सबकी हाज़िरी उन्हीकों तो भरनी थी। अभी पिछले महिनेही उनकी पोस्टिंग TS ट्रेन सुपरिटेंडेंट के पोस्ट पर मुंबई नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में हुई थी। वैसे यह सेंट्रल रेलवे की पहली राजधानी भी 4 महीने पहले ही शुरू की गई थी। बहोत बढ़िया रिस्पॉन्स मिल रहा था, ट्रेन दोनों साइडसे फूल चल रही थी।

जिस तरह चार महिनेमेही, सेंट्रल रेलवे की राजधानी के समयपालन, गुणवत्तापूर्ण सेवा और रनिंग स्टाफ की मेजबानी के चर्चे न सारी रेलवे बोर्ड में थे बल्कि मुम्बई दिल्ली के बीच चलने वाली पश्चिम रेलवे की दूसरी राजधानी गाड़ियों के यात्रिओंमें भी यह गाड़ी मशहूर हो गई थी। इसका पूरा श्रेय जाता था ट्रेन के एमिनिटीज के स्टाफ़ को। पूरी औपचारिकता, और समर्पण के साथ मध्य रेल के कर्मचारी अपनी राजधानी की लोकप्रियता में चार चाँद लगाए, उसका दिमाख सजाए रखे थे।

ट्रेन सुपरिटेंडेंट माज़िद खान भी उन्ही स्टाफ़ में से एक थे। एकदम डिसिप्लिन वाले और सख्त मिजाज के बड़े साहब। किसी भी स्टाफ की ड्यूटी में कोताही इनको बिल्कुल बरदाश्त नही होती। इनकी ड्यूटी में हर बन्दा एकदमसे अलर्ट रहता था, चाहे वह TTE हो या पेन्ट्री कार का बेयरा, सफाईवाला हो या C&W का इलेक्ट्रिक वायरमन पूरे तरह से होशियार और पूरे गाड़ी के स्टाफ़ को खान साहब अपने परिवार की तरह रखते थे। हर कोई उन्हें बड़े मियाँ के नाम से जानता था।

गजानन जोशी, पेंट्रीकार का मैनेजर, “मर गए, आज बड़े मियाँ है क्या TS? चलो कमर टूटने वाली है, नाच नाच कर” अपने स्टाफ़ का लाइन अप करके खान साहब के पास पहुंचा। AC मेकेनिक अब्बास, उसके दो असिस्टेंट और बाईस AC अटेन्डेंट पहले ही अपनी हाजिरी लगाकर, अपनी ड्यूटी का चार्ज लेने डिब्बोंके तरफ बढ़ रहे थे। चेकिंग स्टाफ अभी आने को था।

15.40 मुंबई छ शि म ट

” चलो, फटाफट गजानन, अपने बेयरोंको यूनिफॉर्म डालने को बोल दो। यात्री आना शुरू गए है। मेरे को किसी का शिकायत नही मंगता, सबका पानी बोतल और वेलकम स्नैक्स के पैकेट रेडी रखो। अब्बास ओवैसी चलो मियाँ, पोजिशन सम्भालो, गाड़ी का टेम्परेचर चेक करो और हिसाबसे मेंटेन रखो। पवार तुम अपने चेकिंग स्टाफ को अपने अपने कोच का चार्ट दो और कोच पर भेजो जल्दी। ये 2 वॉकीटोकी, 1 तुम्हारे पास और 1 इंजिन के पास कौनसा डिब्बा है, B1 न, उसके TTE, कौन विठ्ठल देख रहा है क्या? तो उसके पास दे दो। गजा अपना वॉकी लिया क्या? बेटे ध्यान देते जाओ, चलो भागो।”
खान साहब की भागा दौड़ी शुरू हो गई। जब तक गाड़ी छूटती नही तब तक ये चलना था।

16.55 कल्याण

” वेलकम सर, मध्य रेल की राजधानी एक्सप्रेस में आपका स्वागत है। C कूपे में बर्थ नम्बर 9 और 10 आपके लिए रिजर्व है।” बद्रीप्रसाद, H1 एसी फर्स्ट का अटेन्डेंट अपने डिब्बे के यात्रिओंको स्वागत कर रहा था।
“सर, आपका वेलकम किट ऊपरी बर्थ पर रखा है और मेरे चार्ट में आपका नॉनवेज स्नैक्स लिखा है, तो अभी ले आए सर?”
“नही। मेरे कूपे के डोअर पर डु नॉट डिस्टर्ब का टैग लगादो। मै सिर्फ डिनर करूंगा जो रात 9 बजे, वेज विथ सूप ले आना।” C वाले यात्री ने सूचना दी और अपनी कूपे बन्द कर ली।

बस एक D वाला नासिक में आया की आवभगत का काम खत्म। बद्रीप्रसाद बुदबुदाया। H1 एसी फर्स्ट के लगभग सभी कम्पार्टमेंट फुल थे और H2 जलगांव तक फुल हो जाना था। बद्रीप्रसाद एसी फर्स्ट का अटेन्डेंट था और उसकी ड्यूटी H1,H2 दोनों कोच सम्भालने की थी। कन्डक्टर पवार साहब, H2 के A कम्पार्टमेंट में TS के साथ थे। वैसे तो TS के लिए A1 एसी टू टीयर का 5 नम्बर बर्थ रिजर्व था, लेकिन H2 का A कैबिन के यात्री भोपाल से आने वाले थे इसीलिए चेकिंग स्टाफ वही से ऑपरेट कर रहे थे। “बद्री, वो गजा से 4-6 कप कड़क मिठ्ठी चाय बना ला, आज जगना है, भोपाल से कोई VIP चढ़ेगा। तब मेरेको हाजिर रहना होगा, A कैबिन उसका ही बुक्ड है।” खान साहब बोले।

18.00 पासिंग इगतपुरी

के. विठ्ठल TTE, B1, B2 थर्ड एसी पर चार्ट चेक कर रहा था। नया नया ही लाइन ड्यूटी पर आया था, उसको बहोत सारी चीजें समझनी थी। पवार सहाब ने बताया था, सबसे पहले विनम्रतापूर्वक काम करो, आगे सब मैनेज हो जाएगा। उसके दोनों कोच मुंबई से दिल्ली तक फुल थे। एक बार चार्ट फाइनल किया की काम खत्म, ज्यादा से ज्यादा नासिक तक उसका चेकिंग हो कर वो पवार साहब के पास चला जाने वाला था। लेकिन उसके डिब्बे में उसे एक बंगाली बाबू बड़ा परेशान कर रहा था। उसका अप्पर बर्थ था, जिसे चेंज करके उसे लोअर बर्थ चाहिए था।
” ए बाबू, तूम हमको क्या समझता हाय, हम तुम्हारा कम्प्लेंट कोर देगा, कॉपोरेट नही करता तुम। जब हमारा लोअर बर्थ का चोइस था, फिर कैसा अप्पर बर्थ दिया”
“दादा, ये सब हमारे हाथ मे नही होता है, मै चार्ट जांचके आपको एडजस्ट करेगा, थोड़ा ठहरो।”
“साला, नाश्ता भी हमको वेज दिया, जल भी ठंडा नही था, हम पक्का कॉम्प्लेंट करेगा।” बंगाली बाबा मान ही नही रहा था।

इधर B3 और B6 में नासिक से कुल 70 बर्थ बुक थे आगरा के लिए। अग्रवाल मैरेज पार्टी 48 बर्थ B3 में और 22 बर्थ B6 मे। माइकल डिकोस्टा एक सीनियर TTE था B3 से B6 चारों कोच वह देख रहा था। माइकल काफी एक्सपर्ट था अपनी ड्यूटी करने में। नासिक तक उसके डिब्बे में बहोत सी जगह खाली थी।

A1 से A3 यह तीन कोच CTI तिवारी जी के पास थे और A4 H1, H2 कन्डक्टर पवार साहब मैनेज करने वाले थे। A1 में एक बडी मुसीबत थी, पहली केबिन में पुराने जमाने की बॉलीवुड हीरोइन माला और उसकी सेक्रेटरी का रिजर्वेशन था, माला आजभी अपने आपको सुपरहीट ही समझती थी। उसे एसी फर्स्ट में बुकिंग मिली नही और मजबूरी में एसी 2 में आना पड़ा ऐसा वो सबको बार बार कहे जा रही थी। उसने तिवारी जी से भी कह दिया था की उस कम्पार्टमेंट में वह और उसकी सेक्रेटरी की अलावा किसी को बर्थ न दे। किसी का रिजर्वेशन हो तो भी उसे दूसरी जगह एडजस्ट कर दे, और तिवारीजी के लिए मिस माला और बाकी यात्रिओंको एडजस्ट करना बहोत दिक़्क़तोंवाला काम था।

18.40 नासिक

“ए चढ़ाओ फ़टाफ़ट, गाड़ी बहोत कम रुके है” कोई ग्रुप का अग्रवाल चिल्ला रहा था।

यही बात गजानन जोशी, अपने वेडरोंसे कह रहा था। पेन्ट्री में खाना चढ़ रहा था। लोकल कॉन्ट्रेक्टर दादासाहेब भूसे की टीम वेज और नॉनवेज खाना कन्टेनर में लेकर आई थी।
“क्यों, आज दादा नही आया क्या? सब नए लोग ही दिख रहे है।” गजा ने टीम में एक पुराना हमेशा दिखने वाले बन्देसे पूछा। वो क्या आहे ना, दादा के घर लगिन है। फिर दादा ने आजके दिन दूसरे को आर्डर फिरा दिया और मेरेकू स्टेशन पर मैनेज करनेकु बोल्या। पक्या आज के दिन गजा को बोल देना, एडजस्ट कर लेना। और एसी फर्स्ट वालोंका कन्टेनर अलग दिएला है, वो देख लेना।”

“काकड़े साहेबांचा विजय असो” भीड़, नारेबाजी करते हुए अपने नेताजी को दिल्ली के लिए छोड़ने गाड़ी पर, A1 की तरफ जा रही थी। यह नेताजी का रिजर्वेशन हीरोइन माला के सामनेवाली बर्थ का था।

विक्की, जो एक नम्बर का शातिर चोर था B3 के आसपास मंडरा रहा था। उसके पास खाली नासिक स्टेशन का प्लेटफार्म टिकट था। मैरेज पार्टी देखकर उसकी धड़कने तेज हो गई थी और आँखे फड़कने लग गई थी। जब भी कोई लम्बा गेम हाथ लगने वाला होता था तब तब उसकी हालात कुछ इसी तरह हो जाती थी। ” चालो सरको, लाइए भाईजी, म्हे थानों सामान चढ़ाने में मदत कर देऊ। म्हारो भी रिजर्वेशन B3 में ही है। लाओ फ़टाफ़ट” विक्की अपनी चालोमे लग चुका था।

खान साहब H2 के बाहर, दरवाजे के पास खड़े खड़े गाड़ी की भीड़, चढ़ने वालोंकी जल्दी को बड़े आराम से देख रहे थे, उन्हें क्या पता, यह आराम सब जल्दी ही काफूर होने वाला है।

….. पार्ट 2 बाकी…..
( यह कहानी, इसके सभी पात्र और घटना पूर्णतया काल्पनिक है और इसका किसीभी जीवित अथवा मृत व्यक्तिओंसे सम्बंध नही है। )

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चेंज द बोर्डिंग स्टेशन सुविधा और उसके खुले राज़।

रेलवे में चेंज द बोर्डिंग स्टेशन ऐसी एक बेहद उपयोगी सुविधा है। इस सुविधा में आप अपने आरक्षित टिकट के मार्गमें, स्टार्टिंग स्टेशन के अलावा बीच के कोई भी स्टेशन, जहाँ पर आपकी गाड़ी का स्टॉपेज हो, गाड़ीमे चढ़कर, अपनी रिजर्व सीट ऑक्यूपाई कर सकते हो।

कई सारे यात्री इस सुविधा का उपयोग अलग अलग स्टेशनोंके आरक्षित कोटे से अपना बर्थ आरक्षित करने के लिए करते है। गाड़ी जहाँसे शुरू होती है, वहाँ पर सबसे ज्यादा जगह बुकिंग के लिए जगह उपलब्ध रहती है और वेटिंग लिस्ट भी शुरू हो गई तो वह GNWL कोटा रहता है, जिसके कन्फर्म होने का ज्यादा से ज्यादा चान्स रहता है।

उदाहरण के तौर पर लीजिए, 12859 मुंबई हावड़ा गीतांजली एक्सप्रेस, जिसका मुंबई से इगतपुरी तक GNWL कोटा और आगे जलगाँव तक PQWL कोटा होता है। भुसावल से आगे RLWL कोटा रहता है। अब जिस यात्री को प्रतीक्षा सूची का आरक्षण लेना पड़े तो वह RLWL टिकट लेने के बजाए GNWL या PQWL टिकट लेने की इच्छा रखता है। उसके लिए वह मुम्बई से इगतपुरी के बीच का स्टेशन चुनता है और बोर्डिंग स्टेशन भुसावल या जहाँसे उसे यात्रा प्रारंभ करनी हो, चुनेगा। वैसेही 11039 कोल्हापुर गोंदिया महाराष्ट्र एक्सप्रेस में पूणे से गोंदिया की ओर जाना है तो घोरपडी स्टेशन से टिकट ले कर पुणे बोर्डिंग स्टेशन कर सकते है। ऐसे कई ट्रिक्स आप कन्फर्म टिकट पानेके लिए कर सकते है।

तो यह हुआ बोर्डिंग चेंज करने का हिडेन बेनिफिट याने गुप्त लाभ।

अभी हाल ही में चेंज बोर्डिंग स्टेशन के नियम में कुछ बदल किए गए है,
पहले बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा अपनी यात्रा के स्टार्टिंग स्टेशन से गाड़ी के छूटने के समय से 24 घंटे पहले ही इस्तेमाल करते आती थी लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सुविधा गाड़ी के स्टार्टिंग स्टेशन के छूटने के समय से 4 घंटे पहले, जो सबसे पहला चार्ट बनता है, तब तक ही इस्तेमाल करते आएगी। इसके अलावा नया बदलाव यह है, की बोर्डिंग स्टेशन चेंज करने के बावजूद, आप अपने पुराने बोर्डिंग स्टेशन से भी अपनी यात्रा शुरू कर सकते है बशर्ते आपकी जगह खाली हो, किसी ओर ने बुक न की हो। इसके लिए आपको CRS रिजर्वेशन ऑफिस में अर्जी देनी होगी।

आपने अपनी यात्रा में चेंज बोर्डिंग स्टेशन की सुविधा ली है और इसके बावजूद आप अपनी यात्रा बिना किसी सूचना के अपने पुराने स्टेशन से ही शुरू करते है तो आप अनाधिकृत यात्री है और उसके लिए आप दण्डित किए जा सकते हो।

चेंज ऑफ बोर्डिंग स्टेशन सुविधा लेने के लिए आपको उपरोक्त समय सीमा का पालन करते हुए, यदि आपके पास टिकट खिड़की से लिया गया, छपा आरक्षित टिकट है तो आपको रेलवे के प्रारूप में लिखित अर्जी आरक्षण ऑफिस में CRS को देनी होगी और E-TICKET है तो IRCTC की वेबसाइट पर यह सुविधा का इस्तेमाल कर सकते है, हाँ, टिकट के जिस खंड पर आपने यात्रा छोड़ दी है, उस खंड का कोई भी रिफंड का दावा आप नही कर सकते।

यह सुविधा सभी आरक्षित टिकटों पर, उपलब्ध है।