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उत्तर मध्य रेलवे में कोहरे और ठण्ड के मौसम की रेल परिचालन व्यवस्था।

उत्तर मध्य रेलवे ने कोहरे के चलते अपनी रेल परिचालन व्यवस्था के लिए अनुदेश जारी किया है। कृपया परिपत्रक देखें और अपनी यात्रा का नियोजन करें।

इलाहाबाद – मथुरा – इलाहाबाद विशेष गाड़ी

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हमसफ़र ट्रेन का स्लिपर क्लास

हमसफ़र ट्रेन कोचिंग फॉरमेशन में स्लिपर क्लासकी बढ़ोतरी हुई है। यह व्यवस्था दरअसल प्रयागराज से नई दिल्ली के बीच दुरंतो एक्सप्रेस के स्थानपर केवल वातानुकूलित 3 टियर वाली हमसफ़र एक्सप्रेस चलाये जानेपर यात्रिओंके उभरे रोष का शमन करने हेतु, लिए गए फैसले से सम्भव हुवा है।

प्रयागराज से नई दिल्ली के बीच रोजाना दुरंतो एक्सप्रेस चलाई जाती थी और उसमें वातानुकूलित डिब्बो के अलावा स्लिपर क्लास के डिब्बे भी लगते थे। जब यह गाड़ी हमसफ़र में तब्दील की गई तो स्लिपर क्लास के यात्रिओंके लिए बड़ी मुसीबत हो गयी और दुरंतो एक्सप्रेस की स्लिपर बुकिंग भी आनेवाले 120 तक दी जा चुकी थी। आननफानन में हमसफ़र एक्सप्रेस में स्लिपर डिब्बे जोड़ना यही सरल पर्याय था, जो अपना लिया गया। फिर क्या, देशभर में चलाई जानेवाली सारी वातानुकूलित हमसफ़र में भी स्लिपर डिब्बे जोड़ने की माँग बढ़ गयी और नतीज़न एक एक हमसफ़र में 4-4 डिब्बे स्लिपर के लगने शुरू हो गए।

हमसफ़र एक्सप्रेस के स्लिपर डिब्बे का किराया अलग आम मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्लिपर डिब्बे के बेसिक किराएसे 1.15% ज्यादा है और यह कैलक्युलेशन होने के बाद आनेवाली कीमत, हमसफ़र एक्सप्रेस का बेसिक स्लिपर किराया रहेगा।

इस बेसिक किरायेमे नियमानुसार लगनेवाला सुपरफास्ट चार्ज, रिजर्वेशन चार्ज अलगसे जोड़ना होगा। कैटरिंग चार्ज यात्री के लिए पर्यायी रहेगा, वह चाहे तो कैटरिंग सर्विसेज इस्तेमाल करेगा।

हमसफ़र एक्सप्रेस के स्लिपर क्लास के लिए डायनामिक किराया वृद्धि नही होगी। तत्काल चार्जेस, पहलेवाले चार्टिंग के बाद बची हुई जगहोंके लिए 10% रियायत, बच्चोंके चाइल्ड टिकट आदि व्यवस्था बाकी मेल एक्सप्रेस की तरह ही रहेंगी।

हमसफ़र एक्सप्रेस में किसी तरह का रियायती टिकट या कॉम्प्लीमेट्री पासेस नही चलेंगे।

सांसद एवं विधयक के कूपन्स चूँकि पूर्ण किराया देय रहने की वजह से हमसफ़र में वैध रहेंगे।

दुरंतो एक्सप्रेस के लिए वैध प्रिविलेज पासेस और PTO हमसफ़र एक्सप्रेस में वैध रहेंगे।

डिफेंस वारंट चूँकि पूर्ण किराया देय होने की वजह से वैध रहेंगे।

हमसफ़र एक्सप्रेस में ग्रेडेड डिस्काउंट स्किम वैलिड नही रहेगी।

साथही परिपत्रक भी जोड़ा गया है।

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रेलवे ट्विटर पर, यात्री मोबाइलपर

हमारे देश के नागरिक कितने जागरूक है, सजग है, अपने हक के लिए कितने ऊपर तक शिक़ायतें लगाते है इसका बेहतरीन उदाहरण रेलवे के ट्विटर साईट्स पर मिलता है। कहते है आजकल रेलवे पटरी पर ही नही ट्विटर पर भी चलती है।

भारतीय रेल ने अपने यात्रिओंकी सुविधा के लिए, रेलवे के सभी क्षेत्रीय, विभागीय अफ़सरोंके ट्विटर अकाउंट जाहीर कर दिये है। इसके अलावा रेल मिनिस्ट्री, रेल सेवा, IRCTC, खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल भी ट्विटर पर रेल यात्रिओंकी समस्या का समाधान करनेका प्रयास करते रहते है।

हमारे टीम ने जब रेल ट्विटर कंप्लेंट्स का अभ्यास किया और साथही कुछ सम्बंधितोंसे बातचीत भी की, उनमे कई सारी बातें सामने आयी। गाड़ी में यात्रा करते वक्त सबसे ज्यादा शिकायतें साफ सफाई के बारे में आती है। प्रसाधन साफ नही है, बेसिन चोक है, फर्श गीला है, बेडिंग गंदा सप्लाई होने, सीट्स के नीचे कूड़ा है इस तरह। उसके बाद क्रम आता है, आरक्षित डिब्बे में अनाधिकृत लोगोंके कब्जे की, खास कर स्लिपर डिब्बो में सामान्य श्रेणी के यात्री, प्रतिक्षासूची के यात्री बैठ जाते है यह शिकायते काफी मात्रा में यात्री ट्वीट के जरिए करते रहते है।

एखाद बार वैद्यकीय सहायता, दिव्यांगकी सहायता या फिर किसी बुजुर्ग, या महिला, बच्चों की मद्त की गुहार लगती है। गाड़ी किसी अनजाने जगह सिग्नल की वजह से रुक जाती है तो भी ट्वीट पोहोंच जाता है की फलाँ गाड़ी बेवजह खड़ी है। एखाद बार यात्री सामान गुम होने की शिकायत तो कब डिब्बे में कॉकरोच, यहां तक की मच्छर है ऐसी भी शिकायत भरा ट्वीट आ जाता है।

इन सब ट्वीट्स को, चाहे जिसे भी एड्रेस किया गया हो सम्बंधित अधिकारी को उसमे जोड़ा जाता है और आगे की कार्यवाही का फोलोअप लिया जाता है। जब तक कार्यवाही पूरी नही होती या शिकायत करने वाले यात्री का समाधान नही होता तब तक यह थ्रेड ट्विटर पर चलते रहता है।

इन ट्वीट्स के जरिये यात्री सीधे अधिकारी से जुड़ता है और अपनी छोटी से छोटी शिकायत का समाधान तुरन्त होते देखता है। अधिकारीगण को भी अपने कर्मचारियोंका काम यथास्थित चल रहा है इस बात की जानकारी मिलते रहती है। जैसे एक तरह से कामकाज की क्रॉस मोनिटरिंग हो जाती है।

ट्विटर के जरिए मोनिटरिंग का सिलसिला भूतपूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने शुरू करवाया था। जिसकी सफलता कल्पनातीत है। चौबीसों घंटे, सातों दिन याने 24×7 लाखों ट्वीट्स शिकायतें और समाधान ऐसे चलते रहती है, जिसकी कोई गणना नही।

किसी बुजुर्ग को, चलती रेल यात्रामें तुरंत वैद्यकीय सहायता उपलब्ध करा देना, किसी दिव्यांग को स्टेशनपर यथास्थित गाड़ी से उतारने, चढ़ाने की व्यवस्था कराना, किसी महिला या असहाय यात्री को सुरक्षा बल द्वारा संरक्षण प्रदान करना यह केवल एक ट्वीट के जरिए सम्भव हो जाना यह इस सम्पर्क माध्यम की सबसे बड़ी उपलब्धी है।

अव्यवस्था की शिकायत करना ठीक है, लेकिन ट्वीट्स पर तुरन्त जबाबी कार्यवाही होती है इसलिए मामूली बातोंके लिए कुछ यात्री ट्वीट्स का सहारा लेते है यह बड़ी अचरज भरी बात होती है। सहयात्री नही मिल रहा है, प्रसाधन में सोप नही है, पिलो कवर नही है, नैपकिन नही मिला क्या इन बातोंके लिए रेलमंत्री को ट्वीट पर टैग करना आश्चर्य भरा है।

यात्रिओंको सम्पर्क उपलब्ध कराया गया है, रेल के कामकाज का मोनिटरिंग करने एवं समीक्षा करने का साधन मिला है, आशा है, यात्री इसका सदुपयोग ही करेंगे।

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खुशखबर : 19019/19020 पूर्ण रद्द के बजाय शॉर्ट टर्मिनेट रहेगी।

19019/19020 बांद्रा देहरादून बांद्रा एक्सप्रेस पहले के परिपत्रक के अनुसार 06 फरवरी तक पूर्णतया रद्द रहने वाली थी उसके बजाय इस गाडीको बांद्रा से भरतपूर तक चलाया जाएगा और भरतपुर में यह गाड़ी शॉर्ट टर्मिनेट रहेगी आगे देहरादून तक नही जायगी। उसी प्रकार देहरादून से न छुटते हुए यह गाड़ी भरतपुर से शुरू होकर बांद्रा जाएगी।

कृपया नवीनतम परिपत्रक देखे, और अपनी यात्रा का नियोजन करें।

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नागपुर : इतिहास हो जाएगी छोटी लाइन की छोटी गाड़ियाँ।

रेल फैन्स के लिए एक बुरी खबर है। नागपुर इलाके में चलाई जा रही नैरो गेज की आखरी लाइन 25 नवम्बर 2019 से इतिहास बनने जा रही है।

वर्ष 2015 के नवम्बर तक नागपुर का छोटी लाइन का नेटवर्क 1000 km का हुवा करता था। नागपुर से छिन्दवाड़ा से नैनपुर, नैनपुर से मण्डला फोर्ट और बालाघाट – नैनपुर – जबलपुर – गोंदिया ऐसी नैरो गेज लाईनें अपना जलवा बिखेरती रेल पर्यटकोंको लुभाती थी। इनमेसे नागपुर ( इतवारी ) से नागभीड़ लाइन को छोड़कर बाकी सभी लाईनें बड़ी गेज में तब्दील हो गयी है या कहें बस होने को है।

भारतीय रेल के इतिहास में दर्ज बंगाल नागपुर रेलवे जो 1876-78 में शुरू हुई थी और स्वातंत्रोत्तर काल मे सतपुड़ा रेलवे के नाम से प्रचलित थी। यह पूरा नैरो गेज का नेटवर्क SER/SECR रेल क्षेत्र के नागपुर विभाग का हिस्सा है।

नागपुर इतवारी से नागभीड़ जंक्शन कुल 116.15 km के इस मार्ग में कुल 18 स्टेशन है। जिसमे भांडेवाड़ी, दीघोरी बुजुर्ग, केम्पलसाड़, टिटूर, माहुली हॉल्ट, कुही, मोहदरा, बहमनी, उमरेड, कारगांव हॉल्ट, भिवापुर, पौनी रोड़, भूयार हॉल्ट, तेम्पा, मांगली, कोटगॉव ऐसे स्टेशन्स है। घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों, छोटे बड़े नदी नालोंके पूलोंसे गुजरता यह ट्रैक अपनी छोटी सी 4 डब्बोंकी झुकझुक गाड़ी 15-20 km की स्पीड से दिनभर 4 फेरे लगाती थी। स्टीम लोको बन्द होने के बाद इन दीनों डीज़ल इंजिन से 116km के सफर को 4 से 5 घंटे लग जाते थे। अब बाकी सारे छोटे नैरो गेज मार्ग ब्रॉड गेज में बदले जाने के बाद आखरी इस मार्ग का भी दिन आ गया है। महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलोपमेन्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ( MRIDCL ) और मिनिस्ट्री ऑफ इंडियन रेल्वेज ( MIN IR ) के गेज कन्वर्जन की संयुक्त परियोजना का हिस्सा है।

आज ही SECR रेल नागपुर ने इसके 25 नवम्बर से बन्द कराए जाने की सूचना जारी कर दी है। 1 दिसम्बर से गेज कन्वर्जन हेतु पटरियाँ उखाड़नी शुरू कर दी जाएगी।

मित्रों, नागपुरवासियोंके दिलोंमें इन छोटी गाड़ियोंकी याद हमेशा रहे इसीलिए यहांपर नैरो गेज संग्रहालय भी बनाया गया है, लेकिन इस छोटी रेल गाड़ी के लाईव ऑपरेशन्स बस कुछ ही दिन बचे है।

नागपुर – छिन्दवाड़ा नैरो गेज रेल की विदाई

बालाघाट नैरो गेज का इतिहास हो चुका दृश्य

दिल लुभानेवाली नैरोगेज रेलगाड़ी

नागपुर का नैरो गेज रेल संग्रहालय

Photo courtesy : bbc.com, shashank@sidelower, Bingley Hall/flicker