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उत्तर रेलवे: दिल्ली रेवाड़ी पैसेंजर का हिसार तक विस्तार एवं 14812 दिल्ली सीकर एक्सप्रेस का समय परिवर्तन

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MST धारकों, अच्छे दिन आनेवाले है।

MST धारक एवं छोटी यात्रा करनेवाले यात्रिओंकी परेशानी नामक लेख में, ( यह उस लेख की लिंक है, http://wp.me/pajx4R-9t) उपरोक्त परेशानियों पर अपने विचार आपके सामने रखे थे। रेल्वेसे भी अनुरोध किया था की वे इन छोटी यात्रा करनेवाले यात्रिओंको किस तरह परेशानियों से मुक्ति दिला सकती है।

इस लेख में हमने छोटी दूरी के लिए इंटरसिटी गाड़ियाँ चलाने की सोच रखी थी, उसी सोच में आगे हम आपको रेलवे की भविष्य में आनेवाली गाड़ियाँ कैसी रहेगी यह बताते है।

रेलवे में तीन प्रकार की गाड़ियाँ रहती है। एक लंबी दूरी की गाड़ियाँ, जिसमे नीले कलर के ICF कोच लगते है या फिर आजकल लाल कलर के LHB कोच लगाए जाते है और एक लोको याने इंजिन आगे से गाड़ी खींचता है। यह बिल्कुल पारंपारिक, हमेशा वाली गाड़ी हो गयी। इसमें गति बढाने के लिए याने नीले डिब्बे वाली ICF गाड़ी जो 110 KM प्रति घंटा चलती थी अब LHB कोचेस की वजह से 130 की स्पीड ले सकती है और उसके भी आगे चलके आगे और पीछे दोनों सिरेपर, एन्ड पर लोको, इंजिन लगाकर 160 KM प्रति घंटा चलाई जाने की को शिशें शुरू हो गयी है।

दूसरा प्रकार है EMU/ DMU याने सीधी भाषामे लोकल ट्रेन। इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट, डीज़ल मल्टीपल यूनिट यह गाड़ियाँ मेट्रो शहरोंमें चलती है। मुम्बई की लोकल तो आपने देखी होगी वहीं। इसमें अलगसे लोको इंजिन नही लगता। दोनों सिरोंपर लोको पायलट गाड़ी चला सकता है। जिस दिशा में चलानी है, उस सिरे पर लोको पायलट कैबिन में जाकर गाड़ी चलता है। इसकी इंजिन की मोटरें अलग अलग डिब्बों में लगी होती है। यह गाड़ी उपनगरीय ट्रैफिक ही सम्भालती है, लम्बी दूरी के लिए उपयोगी नही। इसका दायरा लगभग 100 km के आसपास रहता है और स्पीड 80 से 100 km प्रति घंटा होती है।

तीसरा प्रकार है, जो आधुनिक है।
MEMU मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल युनिट। यह गाड़ी मेनलाइन पर चलाने के लिए तैयार की गई है। इसकी रेंज 200 km तक रहती है, बाकी स्पीड और सभी ऑपरेशन EMU की तरह ही होते है।

आने वाले दिनोंमें इसी MEMU गाड़ी को उन्नत बनाया जा रहा है, बिल्कुल T18 वन्देभारत एक्सप्रेस की तरह। T18 एक तरह से MEMU ट्रेन ही है जो लम्बी दूरी के लिए बनाई गईं है, वातानुकूलित और हर डिब्बे में टॉयलेट, बेसिन तैयार किए गए है। मिनी पेन्ट्री के लिए हीटर, हॉट ड्रिंक डिस्पेंसर आदी व्यवस्था भी विकसित की गई है।

इस गाड़ी की 16 डिब्बों की कुल संरचना रहेगी। जिसमे पारंपरिक MEMU गाडीसे 25 % ज्यादा यात्री यात्रा कर पाएंगे। यात्रिओंको आपाद स्थितियों में गाड़ी के लोको पायलट से सीधे बात करते आएगी। गाड़ी के सभी डिब्बे सीसीटीवी से निगरानी में रहेंगे। गाड़ी की ब्रेकिंग सिस्टम बिजली का पुनरुत्पादन भी करेगी।

आनेवाले दिनोंमें 200 से 300 km के दायरेमे ऐसी इंटरसिटी गाड़ियाँ चलाई जाने वाली है।इससे लम्बी दूरी की गाड़ियोंपर पड़ने वाला दबाव काफी कम हो जायेगा और सबसे ज्यादा राहत हमारे MST पास धारक और छोटी छोटी यात्रा रोजाना करने वाले तात्कालिक यात्रिओंको होगी।

तो बस, थोडासा और इंतज़ार अच्छे दिन आने का।

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हमारी रेल स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित।

आजकल मुख्यालय के आदेश का पालन किया जा रहा है, विभाग के आला अधिकारी द्वितीय श्रेणी के डिब्बों में, यात्रिओंके साथ, उनके यात्रा के अनुभवोंसे अपने विभाग को दुरुस्त करने की कवायद करेंगे।

साउंड्स गुड़, है न। सुनने में काफ़ी अच्छा लगता है। रेलवे के सबसे नीचेकी श्रेणी के डिब्बे में रेलवे का उच्च श्रेणी का अधिकारी यात्रा कर रहा है, डिब्बे के लाइट्स, पानी, टॉयलेट की सफाई, यात्रिओंकी तकलिफोंके बारे में पूछताछ की जा रही है। कोई अव्यवस्था दिखाई दी तो उसे तुरंत सम्बन्धित कर्मचारियों से व्यवस्थित किया जा रहा है।

जमीनी हक़ीक़त यह है, द्वितीय श्रेणी की बात तो छोड़ दीजिए, उसमे यात्रा क्या आप प्रवेश भी कर नही पाओगे, लेकिन शयनयान स्लिपर की हालत भी बदतर है। आप यकीन नहीं कर सकते 72 आसनोकी क्षमता वाले स्लिपर में 150 लोग बैठे होते है और सौ-सव्वा सौ खड़े खड़े यात्रा करते है। जब एक डिब्बे में क्षमता से 3 गुना लोग यात्रा कर रहे हैं तो कितने लोग अधिकृत यात्री है और कितने अनाधिकृत? इस का ज़वाब कोई साधारण व्यक्ति भी दे देगा।

इतनी बेतहाशा भीड़ में अनाधिकृत विक्रेता, भिखारी, तृतीयपंथी, पैसे लेकर झाड़ू लगानेवाले रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था सम्भालने वालोंके सामने अपना रोज़गार पूरी शिद्दत के साथ करते रहते है।

आप सोचते होंगे, भीख मांगना, झाड़ू लगाकर पैसे मांगना क्या यह व्यवसाय है? जी, जब गाड़ियाँ तय की जाती है, कहाँ से कहाँ तक जाना है यह तय किया जाता है, एरिया बँटता है यानी सब कुछ सिस्टेमेटिक तरीकेसे फ़ाइनल किया जाता है तो व्यवसाय ही तो है।
एक एक अनाधिकृत व्यवसायी, हर दिन सैकड़ों, हजारों इकठ्ठा करता है और फिरसे दूसरे दिन की लाईन लगाने में लग जाता है।

अब आपको क्या बताए? जो पानी की बोतल 20 रुपये में बिकती है, वह विक्रेता को केवल 6-7 रुपए में मिलती है और गर्मी के सीज़न में एक बन्दा कमसे कम 100 बोतले एक गाड़ी में बेचता है। खाने के मुल्योंमे भी यही होता है, IRCTC का रेट 50 रुपए है तो गाड़ी में बिकता है 100, 120, 150 रुपयोंमें। बताइए कहाँ तक जा रहा है आपका गणित?

आते है फिरसे अधिकारियों की सेकण्ड क्लास डब्बोंकी सरप्राइज यात्रा पर, यह यात्रा कितनी सरप्राइज़ होती है इसका आंखों देखा हाल हमे एक कर्मचारी ने बताया। गाड़ी, उसका डिब्बा तय कीया जाता है। सुरक्षा कर्मी पहलेसेही डिब्बे का एक कम्पार्टमेंट वहाँ के यात्रिओंको खदेड़ कर खाली करा देते है। अनाधिकृत विक्रेताओं को और अवांछित लोगोंको पूर्वसूचना अनुसार नियंत्रित कर लिया जाता है। यात्रा नियमानुसार पूर्ण की जाती है और दूसरे दिन क्यो अगले स्टेशन, अगली गाडीसे ही फिर अपने अपने राग अलापने शुरू हो जाते है।

हम कहते है, सरप्राइज विज़िट ठीक है, रेलवे की ट्विटर शिक़ायत निवारण व्यवस्था बढियाँ है। अधिकारीगण अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त करते रहते है। मजबूती सुरक्षा में भी है। फिर कमी कहाँ है?

जरूरत यात्रिओंकी सजगता और रेल्वेके हर स्थानीय कर्मचारियों के तालमेल में है। यात्री यदि केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही सामग्री खरीदें, अतिरिक्त मूल्य न दें, भिखारी, मांगनेवालोंको खड़ा न होने दे, चलता करे और इन सभी गतिविधियों में रेलवे के कर्मचारी, सुरक्षा बल यात्रिओंके साथ सदैव ततपरतासे, मुस्तैदी से खड़े दिखे तो यह परेशानीयां काफ़ी नियंत्रित हो जाएगी।

रेलवे के कर्मचारियों में चाहे वह चतुर्थ श्रेणी का ही क्यों न हो, सुरक्षा बलोंके जवानोंमें और यात्रिओंमें अपने देश की रेलवे, अपने नैशनल करिअर के प्रति सन्मान, अपनत्व और प्रेम की भावना जागना जरूरी है। देश का नागरिक जब सज़ग होता है तो देश साफसुथरा, सुरक्षित और सुंदर बनता है।

आइए अपना देश, अपनी रेल स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए।

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आरक्षण के अलग अलग कोटे

आरक्षण में विविध प्रकार के कोटे होते हैं। जिसमे कल हमने तत्काल एवं प्रिमियम तत्काल कोटे की जानकारी ली थी। आज कुछ और कोटे की जानकारी लेते है।

1: जनरल कोटा ( GNWL ) – यह कोटा आम तौरपर गाड़ी के शुरवाती स्टेशन या स्टार्टिंग स्टेशन के पास के बड़े जंक्शन स्टेशन से शुरू होकर गाडीके आखरी स्टेशन तक टिकटोंके लिए उपलब्ध होता है। कई सारी रोजाना चलने वाली या ज्यादा स्टोपेजेस वाली गाड़ियोंमे कम अंतर तक भी उपलब्ध रहता है। किसी भी गाड़ी का जनरल कोटा सबसे ज्यादा बड़ा और महत्वपूर्ण रहता है। यह कोटा सभी के लिए खुला है, इसमें सभी तरह के कन्सेशन धारी टिकट ले सकते है। इस कोटे में कन्फर्म टिकट खत्म होने के बाद RAC टिकट भी बनते है। जनरल कोटे के प्रतिक्षा सूची में कन्फर्मेशन के चांसेस बहोत ज्यादा रहते है।

2: लेडीज कोटा – हर गाड़ीमे महिलाओं के लिए 6 बर्थ स्लिपर में, 3 बर्थ वातानुकूलित श्रेणी में उपलब्ध रहती है। यह कोटा केवल महिलाओं के लिए है। यदि किसी महिला के साथ 12 वर्ष से कम उम्र का लड़का यात्रा कर रहा है तो उसे भी इसी कोटे में आरक्षण मिल सकता है। इस कोटे में कन्सेशनधारक यात्री टिकट ले सकते है।

3: वरिष्ठ नागरिक कोटा ( सीनियर सिटीजन या लोअर बर्थ कोटा ) सभी मेल एक्सप्रेस गाड़ी के प्रत्येक स्लिपर क्लास डिब्बेमें 6 लोअर बर्थ, 3 लोअर बर्थ वातानुकूलित श्रेणी उपलब्ध रहती है। इस कोटे में वरिष्ठ नागरिक, पुरूष जिनकी उम्र 60 या उससे ज्यादा है और महिला जिनकी उम्र 58 या उससे ज्यादा है रियायत ले सकते है। इस कोटे के लिए, गर्भवती महिला और 45 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र की महिला जो अकेले या एक PNR पर दो महिला यात्रा कर रही हो, पात्र है, लेकिन उंन्हे किराए में रियायत नही मिलेगी।

तत्काल कोटा, प्रिमियम तत्काल कोटा इसकी जानकारी तो आपको कल दी थी। इस कोटे में कोई भी कन्सेशन, रियायत नही दी जाती। इसके अलावा विदेशी पर्यटक कोटा, विदेशी यात्रिओंके लिए और दिव्यांग कोटा भी अलग से उपलब्ध है।

मुख्यालय कोटा याने HO कोटा या VIP कोटा, यह वो कोटा है, जिसपे कई यात्रिओंकी नजर रहती है।इस कोटे का आबंटन रेलवे के हेड ऑफिस, ज़ोनल ऑफिस, डिविजनल ऑफिस के जिम्मे रहता है। इस कोटे की रचना मुख्यतः रेलवे मुख्यालय के कार्यालयीन कामसे जानेवाले कर्मचारियों के लिए की गई है और VIP याने सांसद, विधायक, मंत्री, उच्चपदस्थ अधिकारी यह लोग VIP कोटे के इस्तेमाल करते है। अत्यावश्यक यात्रा करने वाले यात्री, मरीज इस कोटे से बर्थ के आबंटन हेतु, अपना प्रतीक्षा सूची वाला टिकट लेकर सम्बन्धित रेलवे के दफ्तर से सम्पर्क कर सकते है।

उपरोक्त सभी कोटे जिसमे मुख्यालय कोटा, विदेशी पर्यटक कोटा, दिव्यांग कोटा, लोअर बर्थ कोटा में मांग के अनुसार आबंटन के बाद यदि कोई बर्थ खाली रह जाती है तो उसे जनरल कोटे में वर्ग कर दिया जाता है।

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रेलवे का टिकट

माना की हमने यह बात आपको हमेशा बताई है, आज विस्तार से एक बार और समझ लीजिए। रेलवे में टिकट खरीदते, आरक्षण लेते वक्त कौनसी बात ध्यान रखना है।

सबसे पहले आरक्षित टिकट,

आरक्षित टिकट कन्फर्म मिल जाए तो वाह! क्या बात है। लेकिन वेटिंग लिस्ट याने प्रतीक्षा सूची वाला खरीदना पड़े तो याद रखिए कन्फर्मेशन की ज्यादा सम्भावना GNWL टिकट में होती है और उसके ठीक बाद का नम्बर आता है PQWL टिकट का। इन दोनों वेटिंग लिस्ट में खरीदने में एक फायदा यह भी है की इसमें कन्फर्म फिर RAC और उसके बाद वेटिंग लिस्ट ऐसी संरचना होती है। याने आपका वेटिंग लिस्ट टिकट यदि कन्फर्म नही भी होता है तो RAC तो हो ही सकता है।
लेकिन RLWL रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट में RAC का कोई चान्स नही होता और न ही इसकी कन्फर्मेशन की कोई सम्भवनाए होती है। RLWL टिकट खरीदने पर आपके 60 रूपए व्यर्थ जाएंगे।

तत्काल टिकट या प्रिमियम तत्काल टिकट में भी यही बात है। सबसे पहले यह दोनोंही टिकट का फर्क जान लीजिए। तत्काल टिकट के फिक्स प्रिमियम याने एक निश्चित रकम आपकी देनी है मगर प्रिमियम तत्काल में कोटे के हर 10 % टिकट बिकने के बाद टिकट का मूल्य 20% से बढ़ता है। इन दोनोंही तत्काल टिकटोंमे किसी तरह का कोई भी कन्सेशन नहीं मिलता। यहाँतक की बच्चोंकी टिकट का किराया भी पूर्ण वयस्क किराए जितना देना है।

अब इन तत्काल टिकट के प्रतीक्षा सूची की बात। इन टिकटोंका प्रतीक्षा सूची का संचलन कुछ इस तरह होता है वह केवल तत्काल प्रतीक्षा सूची में ही कतार में खड़े रहते है, याने किसीका तत्काल कन्फर्म टिकट कैंसल हुवा तो ही आपकी वेटिंग लिस्ट आगे बढ़ेगी। अब सोचने की बात है, तत्काल टिकट केवल एक दिन पहले बनती है, कन्फर्म कैंसिल कराने पर कोई रिफण्ड नहीं मिलता तो क्यों भला कोई अपनी तत्काल कन्फर्म टिकट रद्द कराएगा? और जब वह रद्द नहीं होगी तो कैसे आपकी तत्काल वेटिंग लिस्ट की टिकट कन्फर्म होगी? याने कन्फर्मेशन का चांस न के बराबर।

कई बार हम यह सोच लेते है की प्रिमियम तत्काल टिकट का मूल्य अत्याधिक बढ जानेसे, चार्ट फाइनल होने तक वह कोटेमे बुकिंग अवेलेबल रह जाती है तो वह अनबुक्ड बर्थस तत्काल वेटिंग लिस्ट वालोंको मिल जाएगी। लेकिन प्रिमियम तत्काल टिकट केवल जहाँसे GNWL और PQWL कोटा उपलब्ध है उन्ही जगहोंसे प्रिमियम तत्काल टिकट आप खरीद सकते हो। बीच के स्टेशनोंसे यह कोटा उपलब्ध नही है।

इस वजह से यदि आपकी टिकट GLWL या PQWL कोटे से नही निकली है या उन स्टेशनोंसे आपने तत्काल की टिकट नही ली है तो आप की तत्काल वेटिंग की टिकट कदापि कन्फर्म नही हो सकती। बल्कि हम आपको यह सूचित करते है की जहाँसे RLWL टिकट निकल रही है उस स्टेशन से आप तत्काल की वेटिंग टिकट बिल्कुल न ले। टिकट कन्फर्म नही होगी और व्यर्थ ही परेशानी बढ़ेगी।

आशा है की अब आप पक्का समझ गए होंगे की GNWL टिकट में ही कन्फर्मेशन की कुछ गुंजाइश है।

दूसरा अनारक्षित टिकट की बात,

रेलवे ने अपना अनारक्षित टिकट का UTS ( unreserved ticketing system ) सिस्टम जारी कर दिया है जो हर जगह उपलब्ध है। आप अपने घर से ही, ट्रेन पकड़ने के लिए निकलने से पहले UTS पर अपना अनारक्षित ई टिकट बना लीजिए ताकी टिकट खिड़की पर आपका समय जाया नहीं होगा और ना ही छुट्टे पैसे, कम ज्यादा लेन देन का कोई चक्कर। बस घर से निकलो और सीधे गाड़ीमे बैठिए। जनरल अनारक्षित टिकट के लिए UTS सिस्टम बेहद उपयोगी है।