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महामारी काल की मार, रेलवे प्रोजेक्ट्स होंगे बेहाल

रेल बजट में रेलवे के सभी क्षेत्रीय कार्यालय अपने अपने क्षेत्रोंके आवश्यक, अतिआवश्यक कार्य के लिए रेलवे बोर्ड से अपनी मांगे रखते है और रेलवे बोर्ड उसे आवश्यकता नुसार मंत्रालय को सौपता है। अर्थ मंत्रालय कुल राशि रेल मंत्रालय को सम्मत करता है। सम्मति प्राप्त राशि रेल मंत्रालय जरूरत के अनुसार क्षेत्रोंको आबंटित करता है, तदनुसार रेलवे के विकास और अनुरक्षण याने रखरखाव के काम किए जाते है। यह जो भी आबंटन का ब्यौरा है उसे रेलवे की पिंक बुक कहा जाता है। ज्ञात रहे, वर्ष 2020-21 के सभी झोन, क्षेत्र के पिंक बुक हमने रेल दुनिया के पाठकोंको उपलब्ध कराए थे।

लेकिन इस महामारी के काल मे रेलवे की सभी यात्री गाड़ियाँ मार्च 22 से 12 मई तक बिल्कुल बन्द थी।उसके बाद 12 मई से 30 राजधानी गाड़ियाँ ढेरों बन्धन के साथ शुरू की गई, 1 जून से 200 मेल एक्सप्रेस गाड़ियाँ उसी प्रकार शुरू की गई। हाल यह है, की 4 – 5 राज्योने अपने राज्योंसे गुजरने वाली गाड़ियोंको मनाही कर रखी है। छिटपुट पार्सल गाड़ियाँ चल रही है, इन सबसे होनेवाली जो आय है, वह तो ऊँट के मुँह में जीरा। ऐसे में रेलवे का विकासकाम तो दूर कर्मचारियोंके वेतन और सेवानिवृत्त कर्मियोंकी पेंशन देने के लिए भी निधि कम पड़ सकता है।

रेल प्रशासन का एक पत्र हम आपको दिखा रहे है जिसमे पिंक बुक 2020 – 21 में शामिल किए गए नए कार्यों / अम्ब्रेला कार्यों को ठंडे बस्ते में रखा जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, वे काम जो ट्रेनों के सुरक्षित चलने पर प्रभाव डालते हैं और जिन्हें आवश्यक माना जाता है और अपरिहार्य को मंजूरी के लिए माना जाता है। ऐसे कार्यों की अनिवार्यता की जांच संबंधित अतिरिक्त सदस्य, अतिरिक्त सदस्य / निर्माण और अतिरिक्त सदस्य / राजस्व द्वारा की जाएगी। जिन कार्यों को 2019-20 तक अनुमोदित किया गया है, लेकिन महत्वपूर्ण भौतिक प्रगति को आगे के आदेशों तक स्थिर रखा जाएगा, सिवाय उन लोगों को छोड़कर, जिन्हें आवश्यक रूप से ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक है। 2018 – 19 – 20 और 2020 – 21 के अम्ब्रेला वर्क्स का अप्रयुक्त प्रावधान, यदि कोई हो, निलंबित किया जा सकता है। क्षेत्रीय रेलवे / पीयू के जीएम उनके द्वारा पहले से स्वीकृत कार्यों की समीक्षा कर सकते हैं। आवश्यक और अपरिहार्य माने जाने वाले कार्यों की स्वीकृति के लिए छूट वित्त मंत्रालय से प्राप्त की जाएगी।

तो मित्रों महामारी की मार रेलवे के विकास पर तगड़ी पड़ी है।

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निजी ट्रेनों के डिपो, यहाँपर होगा उनका रखरखाव।

निजी ट्रेनोके डिपो वर्ष 2022-23 से निजी ट्रेनोंको पटरियोंपर दौड़ा दिया जाएगा। टेंडर्स बँट गए है, निजी ट्रेनोमे रुचि रखनेवाली एजन्सीयाँ भी लगभग तय हो गयी है।

अब आगे की कार्यवाही के लिए रेल प्रशासन की ओरसे तैयारी शुरू की गई है। निम्नलिखित लिस्ट से आपको यह पता चलेगा की हर एक क्लस्टर की जो गाड़ियाँ है, उनके डिपो कौनसे स्टेशन एरिया में रहेंगे। याने उनका रखरखाव कौनसे बेस स्टेशन पर होगा। आइए देखते है।

1 : मुम्बई क्लस्टर न 1
2 : मुम्बई क्लस्टर न 2
3 : दिल्ली क्लस्टर न 1
4 : दिल्ली क्लस्टर न 2
5 : चंडीगढ़ क्लस्टर
6 : हावड़ा क्लस्टर
7 : पटना क्लस्टर
8 : प्रयागराज क्लस्टर
9 : सिकन्दराबाद क्लस्टर
10 : जयपुर क्लस्टर
11 : चेन्नई क्लस्टर
12 : बेंगालुरु क्लस्टर
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Commissioning of BG Line between Akola- Akot of Nanded Division after Gauge Conversion.

Commissioning of Broad Gauge Line between Akola- Akot section of Nanded Division after Gauge Conversion

South Central Railway has commissioned the new Broad Gauge non-electrified railway line between Akola -Akot stations, for a distance of 44 Kms as a part of Gauge conversion works between Akola – Khandwa section.

Akola – Khandwa section is the o­nly Meter Gauge Railway line exist o­n South Central Railway jurisdiction, as a part of mission Uni Gauge concept of Indian Railways, Gauge conversion project has been sanctioned between Akola- Khandwa section for a distance of 175 Kms during the year 2008-09 with a sanctioned cost of Rs. 2067 crore. The execution of gauge conversion works of this project has been divided into 3 phases –

  1. Akola – Akot – 44 Kms
  2. Akot – Amlakhurd – 77 Kms
  3. Amlakhurd – Khandwa – 54 Kms

Accordingly, the Gauge Conversion works o­n Phase-1 between Akola – Akot for a distance of 44 Kms are completed in all aspects and formal authorization has been given for running the trains.

Salient features of this section are:

· 38 minor bridges and 02 major bridges were reconstructed as part of Gauge Conversion works. In addition, o­ne important bridge also reconstructed in this section.

· 05 Station buildings were reconstructed along with provision of high-level platforms and all passenger amenities.

· 22 Level Crossing (LC) gates, which are existing in the Meter Gauge section was replaced with Road Under Bridges (RUB) to enhance safety at Level Crossings and also to facilitate hassle free flow for road traffic.

· As part of gauge conversion work, Akola station yard has been modified and accordingly o­ne new loop line has been constructed, in addition to the existing three lines (one main line and two loop lines).

Shri Gajanan Mallya, General Manager, South Central Railway has complimented the officers and staff of Construction wing and Nanded Division o­n successful completion of Gauge Conversion works and commissioning of New Broad Gauge line between Akola – Akot section as a part of Akola- Khandwa Gauge Conversion Project. This Railway line stands as an alternate and shortest route between Akola- Khandwa and also enhances the train connectivity between Vidarbha region of Maharashtra and Madhya Pradesh state besides providing shortest path for the people of Marathwada region to reach Khandwa and other parts of Madhya Pradesh, he opined.

Press realease by Chief Public Relations Officer SCR.

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पड़ोसी पहले….

कहते है एक अच्छा पड़ोसी, नजदीक के दस रिश्तेदारोंपर भारी। हाल में हम भारतवासी यही तो कर रहे है। भारत अपने कमजोर पडोसियोंके लिए बड़े भाई का फर्ज अदा कर रहा है।

भारतीय रेलवे से डीज़ल लोकोमोटिव के लिए बांग्लादेश रेलवे की काफी दिनोंसे माँग थी और स्थगित पड़ी थी। आज भारतीय रेलवे ने 10 WDM 3 डीज़ल इंजिन देकर पूर्तता की। यह आदान प्रदान का कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में, पूर्व रेलवे पर स्थित गेडे स्टेशन पर हुवा। स्वीकार करनेवाला स्टेशन बांग्लादेश रेलवे में दर्शना स्टेशन था। इन लोकोज के चलते बांग्लादेश का रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने को काफी मदत मिलेगी।

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इसको का कहते है, जुगाड़।

आपने अपनी रेल यात्रा में बहोत बार देखा होगा पटरी के बाजू कोई बन्दा रेलवे मे गैंगमैन का यूनिफॉर्म पहने खड़ा होता है, कांधे पर बजनदार थैला, हाथ मे एक नम्बर लिखी तख्ती और गाड़ी आगे बढ़ते हुए सिटी की आवाज आती है। रेलवे में यह होता है चाबीवाला।

इन चाबीवालों की ड्यूटी ठंडी गर्मी बरसात, बारों मास पटरी की देखभाल करने की होती है। इनके बजनदार थैले में पटरी, स्लीपर्स में जीन चाबियोंसे लॉक की जाती है वह 8-10 चाबियाँ, लम्बी डंडी का हथौड़ा, झंडी, सेक्शन गैंग की तख्ती, रात की ड्यूटी के लिए लालटेन ( आजकल टॉर्च ), सम्पर्क के लिए फोन की पेटी, पटरी जॉइंट्स के 8 – 10 नट बोल्ट, कसने के लिए पाने ऐसा कमसे कम 20 किलो बजन होता है।

इतना सामान ये लोग कंधे पे लादकर, पटरी की सुरक्षा हेतु रोजाना 10 – 10 किलोमीटर की एक बिट पैदल चलते है। यदि कुछ गम्भीर बात इनको पटरी पर नजर आई जैसे की पटरियों का क्रैक या टूटना तो इन लोगोंकी टीम उस स्थान पर दौड़ती है।

ऐसे वक्त में उस स्थान पर जल्द से जल्द पोहोंचना बेहद जरूरी होता है। उत्तर पश्चिम रेलवे के कर्मियों ने एक जबरदस्त उपाय खोजा है। हमारे यहाँ कार्यकुशलता की कोई कमी नही है, लीजिए आप भी देखिए।