भाई, सब जानकारी दे दी आपको, टिकट कैसे लेना है, टिकट के कौन कौनसे WL, कन्फर्म, सारे किस्म हमने आपको समझा दिए। आप ने सब जानकारी समझ कर टिकट ले लिया और टिकट मिला RAC।
अब RAC टिकट की भी फुल जानकारी आपको है, की केवल सीट मिलेगी, गाड़ीमे चढ़ कर यात्रा कर पायेंगे, कोई कन्फर्म वाला बन्दा अपनी बर्थ पर नहीं आया तो RAC वाले को उसकी जगह सबसे पहले मिलेगी।
लेकिन चलो, थोड़ा प्रैक्टिकल भी कर लेते है। गाड़ी है 22110 AC एक्सप्रेस, हमारे पास हज़रत निजामुद्दीन से भुसावल की 3AC की RAC टिकट है, और नम्बर है B1 में 71। तो साहब हम अपने साजोसामान सहित, सभी रूल्स का पुलिंदा अपने दिमाग़ में रचाए B1 के 71 पर पहुंच गए। अब वहाँ पहले से ही हमशक्ल कहिए, या हमसीट कहिए एक बन्दा B1 का 71 RAC टिकट ले कर जमा जमाया मौजूद है।
” तो आप हो 71 के दूसरे RAC?” हम अपने पसीने पोंछते फुसफुसाए।
“हैं? , तो थाणे भी ओहि 71 नम्बर मिल्यो ह?” बन्दा हरयाणवी था।
” हाँ जी, देखते है गाड़ी चल पड़े और TTE आ जाता है तो मिलेगी पोजिशन, कहाँ खाली है, तब तक हम और आप दोनोंही यही सीट खोल कर टिक जाते है।”
आप को बता दूं, भले ही सब पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक चार्टिंग हो गया हो, भले ही आजकल सब चार्ट आम जनता के लिए IRCTC पर जाहीर कर दिए हो पर गाड़ियों के TTE आज भी किसी भगवान कृष्ण से कम नही। उनके हाथ जो अगम्य आँकड़ोंका लिखा चार्ट होता है वह हमारे जैसे 1000-1200 सीटों वाली गाड़ी के विशाल कुरुक्षेत्र में संभ्रमित अर्जुनोको सही दिशा में ले जा कर टिकाने वाला होता है।
गाड़ी चल पड़ती है, और हमारे भगवान कृष्ण आई मीन, TTE साब का आगमन डिब्बे में हुवा, साथमे 8-10 भक्त गण पहलेसेही चिपटे पड़े थे। जब हम तक पहुंचे, हम हमारी समस्या यानी RAC 71 उन्हें बता दिए।
” ठीक है, बैठिए। 72 वाला भोपाल में रात 12 बजे आएगा, तब तक आराम कर लीजिए, बाकी गाड़ीमे नासिक तक कही कोई खाली नही।” इति TTE।
यहाँ क्लियर हो गया, की कोई भगवान हमे मदत नही करने वाले है। सो जाओ हम 71 पर और हरियाणा वाले भाई 72 पर। अब इंतजार रात 12 का, भोपाल के यात्री का, जिस के बारे में हम दोनोंही 71 वाले सोच रहे थे, न आए तो अच्छा। लेकिन रात 12 बजे एक सरदारजी धमक गए, “ओजी भाईसाब, इत्थे मेरा बर्थ है, खाली कर दो।”
हरियाणा वाले भाई फिर धरतीपर धम्म से आ गए। बोले, “ओय ताऊ, इबकै करणा?”
हम ने जुगत लड़ाई, ” देख भाई, वो 72 वाला तो जम गया अपनी जगह पर, अब हमारे पास 71 नम्बर का बर्थ है और उसकी फुल बेडिंग है। एक काम करते है, टॉस करते है। जो जीतेगा वो ऊपर बर्थ पर सोएगा और जो हारेगा वह बेडिंग ले के केबिन की, बीचवाली जगह में, अपनी बेडिंग लगाकर जमीन पर सोएगा, बोल मंजूर?”
“अरे ताऊ, जाण दे। ला बेडिंग, हूण जमीन का बन्दा हूँ, जमीन पर सो जाता हूँ, वैसे भी तु तो भुसावल सूबे 5 बजे उतर जावेगों, हूण बम्बई जाणो है, सूबे 5 से आगे मैं 71 पर सो जाऊंगा।” मैंने भी लपक के उसे बेड रोल पकड़ा दिया और वह सामने वाली जगहपर झटफट जा के सो गया।
तो मोराल ऑफ द स्टोरी यूँ है, के थोड़ा दिमाग लगाओ, थोड़ा लचीले बनो, भारतीय रेलमे एडजस्ट करना समझ लो तो RAC क्या चीज है आप हर सुरतेहाल में मजे से अपनी यात्रा कर लोगे। वैसे नियम और कानून तो बड़े कड़ें है।
