आखिरकार मध्य रेल पर मुम्बई दिल्ली के बीच राजधानी एक्सप्रेस चल पड़ी और यशस्वी भी हुई के अब सप्ताह में दो दिन के जगह चार दिन चलाई जाएगी।
वैसे तो रेलवे की भारत मे शुरवात मुम्बई से ही हुई है, लेकिन सबसे प्रिमियम ट्रेन राजधानी इस मार्ग को अब मिली है। ज़ाहिरसी बात है, जब 150 km कम अंतर से दूसरा पश्चिम रेलवे का मार्ग उपलब्ध था तो इस मार्ग का राजधानी के कोई विचार क्यों करे? नासिक, जलगाव आदी जिलोके लिए राजधानी के जरिए दिल्ली की फ़ास्ट कनेक्टिविटी एक सपना ही था। खैर! वह तो पूरा हुवा, मगर…. जरूरतें और भी है।
इसी मार्ग पर भुसावल एक बहोत बड़ा और मध्य रेल का महत्वपूर्ण जंक्शन स्टेशन है। यहांपर गाड़ियोंके लोको पायलट, गार्ड बदले जाते है। गाडीका रखरखाव, तकनीकी जांचपड़ताल, डिब्बोमे पानी भरने, इलेकट्रिक मेंटेनेन्स जैसे काम किए जाते है। बुलढाणा, अकोला, अमरावती जैसे ज़िलोंसे आके यात्री दिल्ली के लिए यहांसे गाड़ी बदलते है। जब की यह मध्य रेल का गौरव, राजधानी एक्सप्रेस, मध्य रेल के महत्वपूर्ण स्टेशन भुसावल में रुकती ही नही।
राजधानी एक्सप्रेस का भुसावल स्टॉपेज नही होने से, भुसावल से लोको पायलट, गार्ड अपनी ड्यूटी निभाने के लिए जलगांव बाय रोड़ जाते है और जलगाव से इस राजधानी एक्सप्रेस में डयूटी शुरू करते है। गाड़ी की जो प्राथमिक रखरखाव भी मुंबई से छूटने के बाद सीधे भोपाल में ही हो पाता है, जो की मुम्बई से 840 km के बाद पड़ता है।
मुम्बई से जलगाव तक लगभग 50 प्रतिशत सीटे खाली रहती है, यदि राजधानी को भुसावल हॉल्ट मिलता है तो भुसावल जंक्शन होने से स्टाफ़ चेंजिंग की कई सारी समस्या हल हो जाएगी और गाड़ी में ट्रैफिक भी बढ़ जाएगा।
हमारा माननीय रेल मंत्रीजी से आग्रह है, की राजधानी के भुसावल हॉल्ट के लिए सहानुभुतिपूर्वक विचार करे।
