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रेल व्यवस्थाओंमें सुधार के प्रयास

भारतीय रेल में 13452 यात्री गाड़ियाँ रोज चलती है, जिसमे हर रोज 2 करोड़, 30 लाख यात्री यात्रा करते है। यकीन नही आता न? यह आँकड़े भारतीय रेल ईयर बुक 2017-18 से लिए गए है। आज 2019-20 चल रहा है, याने यह फिगर कहाँ से कहाँ पोहोंच गया होगा। इसका सीधा मतलब यह है, यात्रीसंख्या के अनुपात में संसाधनों में कमी है।

आजकी घड़ी में, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में, मुख्य रेल मार्ग पर सिंगल लाइन से डबल और डबल से ट्रिपल, क़्वाड्रापल करने के काम तीव्र गति से शुरू है। यह बुनियादी काम है, इसके रिज़ल्ट मिलने में समय तो जरूर लगना है तब जल्द समाधान का क्या रास्ता है, जो अपनाया जा रहा है, देखते है।

मौजूदा संसाधनोंमें रेल पटरियोंको अपग्रेडेशन कर के उसपर सेमीहाईस्पीड, हाईस्पीड गाड़ियाँ चलाकर ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक क्लियर करना। मालगाड़ियोंके लिए अलगसे फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण करना, तेजस, उदय, गतिमान, हमसफ़र यह गाड़ियाँ उसी के तहत आयी है। डिब्बों को LHB में तब्दील किए जा रहे, ताकी ज्यादा यात्री क्षमता, डिब्बोंके पारंपरिक डिब्बों से कम वजन होने से एक गाड़ी में ज्यादा डिब्बे लगाने की क्षमता बढ़ाना। ज्यादा ट्रैफिक की मांग के चलते डबल डेकर गाड़ियाँ चलाना। सिग्नल यन्त्रणा को अद्यतन कर हर किलोमीटर अंतर में ज्यादा से ज्यादा गाड़ियोंकी मुव्हमेंट हो पाए ऐसी व्यवस्था रखना। प्लेटफॉर्मोंपर यात्री की भीड़ शीघ्रता से खाली हो, इसलिए एस्कलेटर, लिफ्ट्स, रैम्पस, अतिरिक्त पादचारी पुलोंका निर्माण करना। जंक्शन स्टेशन, टर्मिनलपर गाड़ियाँ रखरखाव के लिए खड़ी हो जाती है अतः गाड़ियोंके रखरखाव कार्य का यान्त्रिकीकरण करके गाड़ियोंके स्टोपेजेस को निम्नतम करना। बड़े टर्मिनल स्टेशनोंपर गाड़ियोंके रखने की जगह कम पडनेसे, नए सैटेलाइट टर्मिनल निर्माण करना। उदाहरण के लिए पुणे में हड़पसर और शिवाजीनगर स्टेशन नए टर्मिनल बनाए जा रहे है, जिससे पुणे स्टेशन पर गाड़ियोंकी भिड़ कम की जाएगी।

जिस तरह यात्रिओंके लिए रेल प्रशासन अपने संसाधनोंमें सुधार और बढ़ोतरी करने की सतत प्रयास कर रहा है, यात्रिओंको ज्यादा दिनोंतक तकलीफें झेलने की जरूरत नही रहेगी।

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