भारतीय रेलवे के प्रबंधन के बारे में कुछ भौतिक तथ्य,
जो सभी भारतीयों को ज्ञात होने चाहिए !
क्योंकि रेलवे भारत सरकार व विश्व का सबसे बड़ा उपक्रम है ॥
(०1.) इंजीनियरिंग विभाग :—
रेल चलाने के लिये सबसे पहले रेलवे लाइन डालनी होती है। यह काम रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग करता है। इस विभाग में तीन विंग हैं 1) पी वे (Permanent Way) इसका काम है रेल लाइन विछाना एवं उसका अनुरक्षण करना। 2) भवन निर्माण(works) इस विंग का काम है रेलवे के आफिस एवं कर्मचारियों के लिये क्वार्टर बनाना एवं उनका अनुरक्षण करना। 3) पुल (Bridge) रेल लाइन पर पड़ने वाली छोटी बड़ी सभी नदियों पर पुल बनाना एवं उसका अनुरक्षण करना।
(०2,) मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग :—
इस विभाग का काम है सवारी गाड़ी एवं मालगाड़ियों के डिब्बे बनाना एवं उनका अनुरक्षण करना। डीजल इंजन बनाना एवं उनका अनुरक्षण भी इसी विभाग का काम है। बिजली के एंजिन आने से इस विभाग का काम थोड़ा कम हुआ है क्योंकि यह काम बिजली विभाग में चला गया। ट्रेन एक्सीडेंट के समय जो एक्सीडेंट रिलीफ वैन ट्रेन आती है, वह इसी विभाग का काम है। इस काम के लिए बड़ी बड़ी क्रेनें और टूल्स एण्ड प्लांट खरीदे जाते हैं, जो कि स्टोर विभाग खरीदता है। उसके बारे में हम आगे बात करेंगे।
(०3.) इलैक्ट्रीकल इंजीनियरिंग विभाग:—
इस विभाग में चार विंग होते हैं।
(1) इलैक्ट्रीकल (जनरल):- इसमें आफिस एवं क्वार्टर की सामान्य बिजली व्यवस्था करना और उसका अनुरक्षण करना होता है।
(2) इलैक्ट्रीकल (टी आर डी) – इस विंग का काम रेलवे ट्रेन को बिजली के एंजिन से चलाने के लिए ट्रैक्शन उपरिउपस्कर का निर्माण एवं उसका अनुरक्षण करना होता है।
(3) इलैक्ट्रीकल (टी आर एस) – इस विंग का काम होता है बिजली के एंजिनों का अनुरक्षण और ई एम यू (EMU) ट्रेन के रैकों का अनुरक्षण।
(4) इलैक्ट्रीकल (परिचालन) – इस विंग का काम होता है बिजली के ट्रेन के एंजिनों एवं लोको पायलटों को ट्रेनों के लिए उपलब्ध कराना और बिजली की ट्रेनों का परिचालन सुनिश्चित करना।
(०4.) सिगनल एवं टेलीकम्युनिकेशन विभाग :-
ट्रेनों को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए सिगनल और कम्युनिकेशन व्यवस्था चाहिए। यह काम इस विभाग के जिम्मे होता है। इस कार्य में भी दो विंग हैं।
(1) सिगनल – नये स्टेशनों पर सिगनल प्रणाली लगाना, पुराने स्टेशनों की पुरानी सिगनल प्रणाली का अपग्रेडेशन करना एवं उसका अनुरक्षण करना।
(2) टैलीकम्यूनिकेशन – इस विंग का काम रेलवे की अपनी संचार व्यवस्था का निर्माण करना और उसका अनुरक्षण करना। रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम के उपकरणों कम्प्यूटर, मानीटर वगैरह, इलोक्ट्रौनिक ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड को लगाना एवं उनका अनुरक्षण करना।
(०5.) परिचालन विभाग:—
इस विभाग का काम है सभी तरह की ट्रेनों का परिचालन करने की व्यवस्था करना। सभी जंक्शन स्टेशनों और रोड साइड स्टेशनों पर स्टेशन मास्टर, पाइंट्स मैन आदि पोस्ट करना।
(०6.) वाणिज्य विभाग :—
इस विभाग का काम है रेलवे की समस्त वाणिज्यिक व्यवस्था की देख रेख करना जैसे – साधारण टिकट बुकिंग, आरक्षित टिकटों की बुकिंग, माल बुकिंग, पार्सल बुकिंग, रेलवे खान पान व्यवस्था आदि आदि।
(०7.) कार्मिक विभाग :—
जब इतने विभाग हैं तो उनमें कर्मचारी भी होंगे।
उन कर्मचारियों को भरती करने की प्रक्रिया आर आर बी के द्वारा करना। उनकी पोस्टिंग, ट्रांसफर, वेतन भत्तों की व्यवस्था करना इसी विभाग का काम है।
(०8.) लेखा विभाग :—
रेलवे के हर विभाग के आय व्यय की देखभाल करना इसी विभाग का काम है। यह देखना कि हर विभाग अपने बजट के अन्दर ही काम करे। कर्मचारियों के वेतन को पास करके उनके बैंक खातों में भिजवाना, ठेकेदारों के बिल पेमेण्ट करना भी इसी विभाग का काम है।
(०9.) स्टोर विभाग :—
रेलवे के सभी विभागों के लिए उनके द्वारा भेजे गये माँगपत्रों के अनुसार सामग्री खरीदना टेन्डर प्रक्रिया द्वारा। यह भी बहुत बड़ा काम है। कुछ बड़े और ज्यादा मंहगे सामानों की खरीद रेलवे बोर्ड करता है। छोटी खरीदें हर विभाग के डिविजनल प्रमुख अधिकारी भी करते हैं। इस सबके लिए ‘सैड्यूल आफ पावर’ किताब है, उस हिसाब से सब अपनी अपनी क्षमता के अनुसार सामग्री खरीदते हैं।
(10.) मेडीकल विभाग :—
रेलवे के अपने अस्पताल और डाक्टर होते हैं। रेलवे अपने कर्मचारियों का खुद इलाज करती है और समय समय पर कार्यरत कर्मचारियों की विभागीय मेडीकल परीक्षण भी होता है।
- सुरक्षा विभाग (RPF) – रेलवे की सम्पत्ति की देखभाल और रक्षा करना इस विभाग का कार्य है। चलती गाड़ी में भी RPF स्टाफ चलता है। रेलवे यात्रियों के साथ हुई वारदातों (क्राइम) के लिए राज्य सरकार से रेलवे की ड्यूटी हेतू पुलिस ली जाती है, जिसे GRP – Government Railway Police कहते हैं।
इन 11 विभागों से रेलवे का संचालन होता है। और इसके प्रबंधन के लिए हर विभाग में एक डिवीजनल प्रबंधक या इंजीनियर होता है। उसको सहायता करने के लिए 4–6 और सहायक अधिकारी होते हैं। इन सारे विभागों को एक अधिकारी कमाण्ड करता है उसे मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कहते हैं। मंडल में एक या दो ADRM भी होते हैं जो DRM की सहायता करते हैं।
यह तो हुई रेलवे के एक मंडल (डिवीजन) की प्रबंधन व्यवस्था। रेलवे में इस प्रकार के 73 डिविजन हैं।
इन डिवीजनों को भूगोलीय स्थिति के हिसाब से 17 जोन्स (क्षेत्र) में बाँटा गया है।
एक जोन में 3 से 6 तक डिवीजन होते हैं।
रेलवे के हर एक जोन का सबसे बड़ा अधिकारी महाप्रबंधक (General Manager) होता है। महाप्रबंधक को 11 विभागों के विभाग प्रमुख सहायता करते हैं। जोनल आफिस का काम अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले हर डिवीजन की देखभाल करना है। प्रत्येक DRM अपने GM को रिपोर्ट करता है। GM आफिस के अधिकारियों के अधिकार ज्यादा होते हैं।
प्रत्येक GM आफिस रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट करता है। रेलवे बोर्ड नई दिल्ली में स्थित रेलवे का सबसे बड़ा आफिस है। रेलवे बोर्ड में सबसे बड़ा अधिकारी चेयरमैन रेलवे बोर्ड होता है। उसके अन्डर में 5 मेम्बर रेलवे बोर्ड होते हैं। एक फायनेनसियल कमिश्नर होता है। इन सबको सहायता करने के लिए हर विभाग के कई लेवल के कई अधिकारी होते हैं। क्लैरीकल स्टाफ होता है। CRB भारत सरकार के रेल मंत्री को रिपोर्ट करता है।
इसके अलावा पूरे भारत भर में कई प्रोडक्शन यूनिट हैं, जिनमें से कुछ मुख्य के नाम में नीचे लिख जा रहा है ।
1) इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ICF- पेरम्बूर चेन्नई में।
यहाँ सवारी डिब्बे बनते हैं।
2) रेल कोच फैक्ट्री RCF- कपूरथला में।
यहाँ भी सवारी डिब्बे ही बनते हैं।
3) मॉडर्न कोच फैक्ट्री MCF- रायबरेली
यहाँ भी सवारी डिब्बे बनते है।
4) डीजल लोकोमोटिव वर्कशॉप DLW – वाराणसी
पहले डीजल और अब विद्युत इंजन बनते हैं ।
5) चितरंजन इलैक्ट्रिक लोकोमोटिव वर्कशाप CLW – चितरंजन।
6) वहील एण्ड प्लाण्ट वर्कशॉप RWF – बैंगलोर।
7) स्प्रिंग फैक्ट्री – सिथोली, ग्वालियर।
8) डीजल इंजन कम्पोनेंट वर्कशॉप DMW- पटियाला।
इसके अलावा हर जोन के पास अपने रिपेयरिंग वर्कशॉप होते हैं। जोनल ट्रेनिंग सेन्टर होते हैं, जहाँ स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाती है। अधिकारियों के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट अलग है। अधिकारियों के लिए वडोदरा में रेलवे स्टाफ कालेज है। लखनऊ में RDSO – रिसर्च डिजाइन एवं स्टैण्डर्ड आर्गेनाइजेशन है।
अभी पिछले कुछ वर्षों में मधेपुरा (बिहार) में भी वर्कशॉप खुले हैं।
रेलवे एक बहुत बड़ा संगठन है उसके प्रबंधन के लिए अपने अल्प ज्ञान से ऊपर जो कुछ भी लिखा गया है, वह बहुत कम है। हर विभाग के ऊपर एक नहीं, कई-कई किताबें लिखी जा सकती हैं। लेकिन एक आम भारतीय को इतना समझ लेना भी काफी है।
