आप कहीं पर्यटन, तीर्थयात्रा या किसी जरूरी कार्य की वजह से यात्रा कर रहे हो, चाहे कोई साधन हो, कैसी व्यवस्था हो, भले ही रेलवे के वातानुकूलित कक्ष में आपकी टिकट आरक्षित हो आप एक बात हमेशा ध्यान में रख लीजिए या यूं कहिए गांठ बांध लीजिए, अपने साथ मे अपना दाना पानी जरूर रखे कमसे कम एक ग्लूकोज बिस्किट का पैक और एक पीने के पानी की बोतल अवश्य होना चाहिए। फिर आपका सफर चाहे एक घंटे का हो या एक दिन का।
हाल की घटना है, 12157 पुणे सोलापुर हुतात्मा एक्सप्रेस जो पुणे से शाम 18:00 को निकलती है और रात 22:00 को सोलापुर पोहोंचती है। सैकडों यात्री इस गाड़ी में रोजाना सफर करते है। दिनांक 07 मार्च को यह गाड़ी हमेशा की तरह पुणे स्टेशनसे शाम छह बजे सोलापुर के लिए चल पड़ी। पहला स्टोपेज था दौंड जो की निर्धारित समयानुसार शाम सात बजे आना था। मगर यह गाड़ी दौंड को पहुंची रात 01:20 पर। याने एक घंटे के सफर के लिए उसे सवा सात घंटे लग गए। आगे सोलापुर पहुंचने के लिए उसे दूसरे दिन की सुबह 4:20 हो गयी थी।
इस अनहोनी घटना की वजह रेलवे प्रशासन द्वारा लिया गया एखाद घंटे का इंजीनियरिंग ब्लॉक था। क्या हुवा था, ब्लॉक खोलने में कैसे देरी हो गयी यह संशोधन के विषय है। सोचने का विषय यह है, जब जब इंजीनियरिंग ब्लॉक लिया जाता है, तब रेलवे उस मार्ग के आसपास के सभी इंजीनियरिंग कार्य निपटने का प्रयत्न करती है। समय का पालन बाकायदा सख़्ती से, अनुशासन के साथ किया जाता है। मार्ग के सभी अधिकारी वर्ग, परिचालन एवं सुरक्षा कर्मचारी हाई अलर्ट मोड़ पर रहते है। सम्बंधित इंजीनियरिंग विभाग के तमाम अधिकारी, कर्मचारी कार्यस्थल पर उपस्थित होते है। लेकिन यह यांत्रिक कार्य है, कुछ ऐसी अवांछित, अपरिहार्य परिस्थिति खड़ी हो जाती है, की ब्लॉक को रिटर्न नही किया जा सकता है। आप कुछ इस तरह समझिए, न उगले बने न निगले बने। ऊपर से नीचे तक सारा की सारा प्रशासन अपनी एडियोंपे आ जाता है। गाड़ियाँ बीच रास्ते मे खड़ी हो जाना याने तमाम कर्मचारियोकी जान हलक में आ जाती है।
इधर यात्री एकदम बेहाल हो जाते है। पूरी गाड़ी का सफर गिन कर चार घंटे का है और कई यात्री तो बस एक घंटे में दौंड स्टेशन के लिए ही सवार हुए थे। बमुश्किल से किसी यात्री के पास खाने के लिए कुछ था या शायद ही कोई पीने के पानी की व्यवस्था ले कर चला था। छोटे छोटे बच्चे थे, बीमार, बूढ़े, कोई ड्यूटी से लौटा कर्मचारी तो कोई रोजगारी पर काम करने वाला श्रमिक। सब के सब बेहाल, बेदम। गाड़ी कब चले इसका पता नही। क्या हुवा है इसका भी पता नही। रेल कर्मचारी अपने आप मे परेशान, उंन्हे ही पता नही चल रहा की गाड़ी कब चल पड़ेगी।
भाइयों, मित्रों एक बात का अवश्य ध्यान रखे, अक्सर इस तरह के रेलवे ब्लॉक इतवार छुटियोंके दिन लिए जाते है क्योंकी इस दिन समय से प्रतिबंधित दफ्तर, बैंक में काम करनेवाले यात्री, स्कूल कॉलेजेस को जानेवाले विद्यार्थी गाड़ियोंमे न के बराबर रहते है। रेल प्रशासन की कोशिश यही रहती है, कम से कम तकलीफ़ यात्रिओंको को हो। रेल प्रशासन के भरकस प्रयासोंके बावजूद कभी ऐसे दुःखद और परेशानियों भरे पलोंसे यात्रिओंको सामना करना पड़ सकता है।
ईश्वर न करे लेकिन कभी आप ऐसे परेशानी में फंस गए तो हमेशा अपना थोड़ा बहोत खाना- पानी साथ रखे। गाड़ी से जब तक अधिकृत सूचना न मिले तब तक गाड़ी से न उतरे। अपना और अपने सहयोगी यात्रिओंका धैर्य बांधे रखे। आपाधापी में कोई भी गलत कदम न उठाए।
रेल प्रशासन आपकी सुरक्षा के लिए हमेशा ततपरता से जुटा रहता है। हर सम्भव प्रयास किए जाते है की यात्री को उचित मार्गदर्शन किया जा सके। तो हमेशा सजग रहे, सुरक्षित रहे।
