जी हाँ, यह बिल्कुल सच है। देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई, फ़िल्मनगरी मुम्बई, मायानगरी मुम्बई 24 x 7 चलती, नही जी दौड़ते रहती है। लेकिन वक्त का तकाज़ा, समय की माँग को भी जानती है। सारे लोग जो घड़ी के काँटोंके साथ रेस लगाए रहते है आज अपने अपने घरोंमें रुके है। जानते है, यह वक्त यही सही है। जब दौड़ना होगा, फिर से निकल पड़ेंगे। जल्द ही फिर से घड़ी के रेस का बिगुल बजेगा, 6:57 की दादर पों करेगी, गार्ड ऑलराइट बोलेगा और फिर वही रोटी और वही पेट। दौड़ पड़ेंगे।










