मित्रों, आपको लग रहा होगा जब गाड़ियाँ चल ही नही रही है तो यह बिनामतलब की बातें क्यों? न गाड़ियाँ चल रही है, न कोई यात्री, वेंडर्स प्लेटफॉर्म्स पर है तो अनुशासन का पाठ किसे पढ़ाना है?
ऐसा है, 14 अप्रेल तक गाड़ियाँ बन्द है, लेकिन 15 अप्रेल से आगे की अग्रिम आरक्षण तो IRCTC पर शुरू हो गयी है और वेटिंग लिस्ट के आँकड़े भी 500 – 600 नम्बर्स छूने लग गए है। हम यात्रिओंको आग्रह करते है, आपका बेहद जरूरी काम हो तो ही रेल में, रोडपर यात्रा करने का विचार करें। हो सके जितना घर से बाहर निकलना टालना है। पर्यटन, छुट्टियां, गेट टुगेदर को अगली छुट्टियोंतक पोस्टपोन कर दे।
रेल प्रशासन से भी पूर्ण विनम्रतासे आग्रह है, कृपया प्रतिक्षासूचीवाली व्यवस्था बिल्कुल बन्द कर कीजिए। कोई भी आरक्षित टिकट RAC या वेटिंगलिस्ट जारी नही किया जाना चाहिए। साथ ही सभी गाड़ियोंमे से अनारक्षित द्वितीय श्रेणी बन्द कर दीजिए। सभी यात्री गाड़ियाँ केवल आरक्षित डिब्बे वाली ही रहे, द्वितीय श्रेणी में भी आरक्षित कुर्सियान की व्यवस्था हो।कोई भी यात्री बिना आइडेंटिटी के यात्रा नही करना चाहिए और यह तभी मुमकिन है, जब गाड़ियोंमे केवल आरक्षित डिब्बे ही उपलब्ध कराए जाएं। न ही गाड़ियोंमे बल्कि रेलवे के अहाते में, प्लेटफॉर्म्स पर भी बिना परिचयपत्र के कोई भी व्यक्ति नही घूमना चाहिए। इससे रेल प्रशासन को यह पता रहेगा रेलवे एरिया, प्लेटफार्म पर, गाड़ियोंमे कितने यात्री है, कौन है, उनकी यात्रा की हिस्ट्री क्या है। यह कोरोना संक्रमण को नियंत्रित रखने का सबसे उपयुक्त तरीका रहेगा।
यह 14 अप्रेल तक जो अनुशासन हम भारतीय जनता ने अपने अपने घरोंमें रहकर, व्यक्तिगत सम्पर्क टालकर सीखा है उस अनुशासन को आगे भी शुरू रखना जरूरी है।
